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स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर प्रेरणादायक भाषण | Independence Day Speech in Hindi

By Gourav / About :-8 years ago

स्वतंत्रता दिवस- 15 अगस्त पर जोशीला भाषण | Speech on Independence Day In Hindi 

माननीय अतिथिगण और स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित सभा में मौजूद अन्य जन, ----
                                                                                                                        आज हम यहाँ भारतीय स्वतंत्रता दिवस को मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं|

भारतीय स्वतंत्रता दिवस जिसे हम 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी के रूप में मनाते है भारत को ये आजादी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ चलाये गए स्वतंत्रता आंदोलन के बाद मिली थी| भारत ने इस आजादी के लिए बड़ी कीमत चुकाई है, कभी विश्व गुरु कहलाने वाला भारत विदेशी आक्रमणकारियों और ब्रिटिश आतताइयों के चंगुल में ऐसा फंसा की उससे बहार निकलने में लगभग 950 वर्षों का समय लग गया|

भारत में अंग्रेजों के जुल्मों की दास्तान इतनी भयावह थी की उस वक़्त के तत्कालीन देशवासियों का मन एक दूसरे को यही समझाता था_________
                                     
 " खौला न जो अब वो खून नहीं वो पानी है,
जो काम न आया देश के वो बेकार जवानी है"

इसी विचारधारा से प्रभावित होकर भारत ने अंग्रेजों के खिलाफ एक जुट होकर धावा बोल दिया और उन्हें समय-समय पर साथ देने के लिए आगे आये सरदार भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरू, गोविन्द वल्लभ पंत, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय जिनके देश पर जान न्योछावर कर देने के जज्बे ने अंग्रेजों की नींव हिला दी| लाला लाजपत राय ने अपने मृत्यु से पहले ये कहा था_________

"मेरे कफ़न की एक-एक कील
अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील साबित होगी"
 
भारत की आजादी की लड़ाई में जब पूरा भारत एक जुट खड़ा हुआ तो समकालीन कवियों की लेखनी ने पूरे देश में क्रांति का माहौल बना दिया था| सन 1857 की क्रांति जब पहली बार सुलगी तभी अंग्रेज ये समझ गए की अब उनका शासन ज्यादा दिन तक नहीं स्वीकारा जायेगा, भारत की गलियां-गलियां  "वन्दे मातरम"  के शोर से गूंज उठी थी|और आखिर पूरा भारत सन 1942 में एक सुर में बोल ही पड़ा_____"अंग्रेजों भारत छोड़ो" और अंततः सन 14 अगस्त 1947 को भारत माँ के दो टुकड़े करके ये अंग्रेज हमारे बीच हिन्दू-मुस्लिम भारत-पाकिस्तान की कभी न भरने वाली खाईं छोड़ कर भारत से कूच कर गए| कभी भारतीय उपमहाद्वीप के विशाल क्षेत्रफल पर राज करने वाले भारत और माँ भारतीय के अनेकों टुकड़े कर दिए गए| भारत पाकिस्तान बंगलादेश जैसे देशों को जन्म देकर भारत को कभी न भूल पाने वाला दर्द और सशक्त न बन पाने की कसक के बीच छोड़ कर पलायित हो गए और 15 अगस्त 1947 को हमारे राष्ट्र को भारत पाक सीमा पर हो रहे सामूहिक नरसंहारों के बीच आजादी मिली| आजादी के मिलने के बावजूद नोआखाली से आ रही सूचनाओं ने भारतीय आजादी के नायक राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी की आँखों को अश्रुपूरित कर रखा था|

भारत ने सन 1947 के अंग्रेजों के भारत छोड़ने के बाद अपने अदम्य सहस और शौर्य के बल पर इतिहास की एक नई गाथा लिखी| आज भारत का लोहा राजनितिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक सभी क्षेत्रों में पूरी दुनिया द्वारा माना जा रहा है| भारत अपने दम पर चाँद तक पहुंच चूका है, ऐसे में आइये हम सब मिलकर ये प्राण करें की भारत की इस स्वतंत्रता को सदियों तक ऐसे ही पवित्र और पावन बनाये रखेंगे और भारत में किसी भी नागरिक को इस बात का अहसास नहीं होने देंगे कि हम कभी गुलाम थे या आज कहीं न कहीं से खुद को गुलाम महसूस कर रहे हैं| 72वां  गणतंत्र दिवस माना रहे भारत को अगर हम सामाजिक परिप्रेक्ष के दृष्टि से देखें तो स्वतंत्र भारत में रहकर भी गुलामी जैसी संकीर्ण विचारधारा की चर्चा इस लिए भी अनिवार्य हो जाती है क्योंकि भारत की बेटियां आज भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहीं हैं| उनके साथ बढ़ रहे अन्याय ने अंग्रेजो से मिली आजादी की सार्थकता को मायूस करने का कार्य किया है| भारत राष्ट्र की भूमि रानी लक्ष्मीबाई, पदमवती, कर्णावती जैसी वीरांगनाओं की भूमि है, ऐसे में समाज में व्याप्त बुराइयों का स्थान वहीँ ख़त्म हो जाता है जहाँ से स्वंत्रता सेनानियों के बलिदान की गाथाओं का प्रारम्भ होता है| माँ भारती के सपूतों को आज आज़ादी के लिए दिए गए मूल्यवान बलिदानो को याद रखना होगा तभी हम भय मुक्त समाज का निर्माण कर पाएंगे और स्त्री-पुरुष सभी को सामाजिक समरसता का पाठ पढ़ा पाएंगे| भारतीय स्वतंत्रता दिवस को सारगर्भित बनाने वाली इन पंक्तियों के साथ मैं आप को स्वतंत्र भारत की उपलब्धियों के बीच छोड़ना चाहूंगा/चाहूंगी----

 " कर जस्बे को बुलंद जवान
तेरे पीछे कड़ी आवाम 
 हर पत्ते को मार गिराएंगे
जो हमसे देश बटवाएंगे
भले हाथों में चूड़ी खनके
छन-छन करते पायल झुमके
पर देश की हैं हम प्रचंड नारी
वक्त पड़ने पर उठाएंगे तलवार भारी
जहाँ प्रेम की भाषा है सर्वोपरि 
जहाँ धर्म की आशा है सर्वोपरि 
ऐसा है मेरा हिंदुस्तान 
 जहाँ देशभक्त की भावना है सर्वोपरि"
                       
हम माँ भारतीय के गौरवशाली इतिहास को आगे बढ़ाने के निर्वाहक बने, नष्टकरता नहीं| 
जय हिन्द! जय भारत!
 
 

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर प्रेरणादायक भाषण | Independence Day Speech in Hindi