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अंधेपन के कारण रेलवे ने नहीं दी नौकरी आज है पहली नेत्रहीनIAS |First Blind IAS Officer Story In Hindi

अंधेपन के कारण रेलवे ने नहीं दी नौकरी आज है पहली नेत्रहीनIAS |First Blind IAS Officer Story In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-1 month ago
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“जीवन में एक हादसे के बाद रुक जाना जिंदगी नही है, जिंदगी तो आगे बढ़ते रहने में है”

इन पंक्तियो की तरह ही कहानी है प्रांजल पाटिल की जिन्होंने अपने जीवन में आंखो की रोशनी न होने के बावजूद अपनी मंजिल को पाने का सपना नही छोड़ा। आंखो की रोशनी के बिना जीवन जीना अधूरा है लेकिन प्रांजल के लिए नही आपको बता दे की आज प्रांजल एक आईएएस ऑफिसर है। प्रांजल महाराष्ट्र राज्य के उल्हास नगर की रहने वाली है एवं आज वो केरल के निरुवतंपुरम में आईपीएस पद को संभालने वाली पहली नेत्रहीन महिला ऑफिसर है।

प्रांजल ने साल 2016 में यूपीएससी की परीक्षा को फाईट करते हुए 773 वीं रैंक प्राप्त की थी। तब उन्हें भारतीय रेलवे में लेखा सेवा का पद दिया गया। कहा जाता है की  जब उनकी ट्रेनिंग चल रही थी तब रेलवे विभाग ने उनके नेत्रहीनता को लेकर उन्हें रेलवे विभाग ने इस पद उन्हें नौकरी देने से मना कर दिया।

First Blind IAS Officer Story In HindiSource nepalnews.com

प्रांजल के जीवन में यह पहला मौका था जब उन्हें अहसास हुआ की वो देख नही सकती लेकिन दोस्तो प्रांजल इस ना से डरी नही बल्कि आगे बढ़ी। प्रांजल ने साल 2017 में एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा इस बार प्रांजल ने 124 वीं रैंक हासिल की।  आँखों  की वजह से रैलवे की नौकरी से निकाली जाने वाली प्रांजल आज केरल के एरनाकलम के उप- क्लेक्टर के पद पर कार्यरत है। अपनी जीवन में संघर्ष से सफलता को पाने का पुरा श्रेय अपने माता-पिता व पति को देती है।

दोस्तो आपको बता दे की जब प्रांजल महज 6 साल की थी तब उन्हीं की एक साथी क्लोसमेट ने हंसी-मजाक में उनकी आंख में पेंसिल घोप दी थी। इस हादसे के बाद प्रांजल एक से बिलकुल नही देख पा रही थी। जब पं्राजल के माता-पिता ने उन्हें डांक्टर को दिखाया तो डांक्टर ने बताया की प्रांजल की इस चोट की वजह से कुछ समय बाद दुसरी आंख की रोशनी भी जा सकती है। दोस्तो बता दे की प्रांजल की कुछ समय बाद दुसरी आंख की रौशनी भी चली गई। प्रांजल के जीवन में इस मुश्किल दौर में उनके माता-पिता ने उनका हौसला नही कभी नही टूटने दिया एवं प्रांजल के हर मुश्किल समय में वो उसके साथ खड़े रहे।

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प्रांजल की आगे की शिक्षा को पुरी करवाने के लिए उन्होंने प्रांजल का एडमिशन मुंबई के दादर में स्थित नेत्रहीन स्कूल श्रीमति कमला मेहता स्कूल में करवा दिया। इस स्कूल में बेल लिपि में शिक्षा दी जाती थी। कमला मेहता स्कूल से 10 क्लास तक की पढ़ाई करने के बाद प्रांजल ने 12 कक्षा की शिक्षा मुंबई के ही चांदीबाई कॉलेज से पुरी की। 12 क्लास में 85 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रांजल ने साबित कर दिया की वो अपने सपनो की और बढ़ रही । कॉलेज की शिक्षा के लिए उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज में दाखिला ले लिया।

अपने जीवन की इस संघर्ष भरी कहानी के बारें में प्रांजल ने न्यूज-18 से बात करते हुए बताया की।

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जीवन मुश्किलों को देख हार नही माननी चाहिए. यदि हम इन मुश्किलों को सामना करते हुए आगे बढ़ते हुए सफलता को पाने के लिए प्रयास करते रहेगें तो हमें एक दिन सफलता जरुर मिलेगी। आज इस पद को संभाल कर में काफी खुश हूं।"

दोस्तो आज प्रांजल की कहानी उन इस बात लिए सभी के लिए प्रेरणा बन गई है की चाहें जीवन में मुश्किलें कितने भी बड़ी हो वो आपकी मेहनत के आगे एक दिन छोटी ही नजर आती है।

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