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भारत की पहली लोको पायलट महिला - सुरेखा यादव | First Loco Pilot Woman Story In Hindi

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“ तुम नही कर पाओगी ”
“ यह तुम्हारें बस का नही है ”
“ यह मर्दो का काम है ”
यह ताने हर उस महिला को दिए जाते है जब वो अपनी एक अलग सोच के साथ मंजिल की और निकलती है। दोस्तो आज वो दौर बदल गया है जब महिलाएं केवल घर की चारदीवारी तक ही सीमित रहती थी। आज देश के अलग-अलग सरकारी विभाग के बड़े पदो पर महिला अफसर आसित है। महिलाएं किसी से पीछे नही इस बात सबूत भी दिया है सुरेखा यादव ने जो आज देश की पहली महिला लोको पायलट है।
कौन है सुरेखा यादव ? | First Loco Pilot Woman In Hindi
सुरेखा यादव देश कि वो बेटी जो आज भारत देश की पहली महिला लोगो पायलट है। सुरेखा का जन्म 2 सिंतबर 1965 को महाराष्ट्र सतार जिलें में रहने वाले एक किसान रामचन्द्र भोसले के परिवार में हुआ। सुरेखा की माता नाम सोनाबाई है । सतारा में ही रहते हुए सुरेखा ने सैंट पॉल कॉन्वेंट हाई स्कूल से अपनी शुरुआती शिक्षा ग्रहण की। सुरेखा शिक्षा के साथ खेल-कूद में भी काफी आगे थी। अपनी 12 वीं की शिक्षा के बाद सुरेखा ने इलेक्ट्रिकल में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
सुरेखा जो एक शिक्षक बनना चाहती थी मगर किस्मत में कुछ और तय कर रखा था।
सुरेखा का रेलवे तक सफर | Surekha Yadav
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सुरेखा के रेलवे तक के बारे में बात करे तो सुरेखा ने साल 1987 में यूं ही रेलवे का एग्जाम दे दिया था। लेकिन किस्मत कुछ और चाहती थी। सुरेखा को तब इस बात पर यकीन नही हुआ जब रेलवे की तरफ से उनके घर जोइनिंग लेटर आया।
“ मुझे एक बार भी नही लगा की में रेलवे में शामिल हो जाऊगी। पहली बार नौकरी के लिए आवेदन किया था। मेरा रेलवे में बतौर असिस्टेंट पाइलट से रेलवे में करियर शुरु हुआ बस तब से कभी पीछें मुड़ कर नही देखा ” - सुरेखा यादव
जब रेलवे के लिखित व मौखिक परीक्षा तय हुई तब सुरेखा एकमात्र महिला थी जो इसमें शामिल हुई थी। वो अब तक इस बात से अनजान थी की कोई भी भारतीय महिला रेलवे में एक ड्राइवर के रुप में नौकरी नही की है। सुरेखा ने यह पहला कदम उठाया और अपने देश के लिए कुछ करने की मंशा से आगे बढ़ी।
पहली महिला लोगो पायलट सुरेखा | First Loco Pilot Woman
भारत की पहली महिला लोगो पाइलट बनने वाली सुरेखा यादव की रेलवे में शुरुआत बतौर मालगाड़ी के असिस्टेंट के तौर पर हुई , बाद में यह सफर आगे बढ़ता गया और वो पैसेंजर ट्रेन की भी पायलट बनी। रेलवे में पहली महिला पायलट के रुप में कार्यरत हुई सुरेखा ने पहली बार वाड़ी बंदर से कल्याण तक जाने वाली एल-50 लोकल गुड्स ट्रेन को चलाया। रेलवे ने सुरेखा को शुरुआत में ट्रेन इंजन , सिंग्नल की जांच जैसे काम किए। साल 1988 में पहली बार सुरेखा मालगाड़ी की पायलट बनी।
साल 2010 में सुरेखा ने वेस्टर्न घाट में ट्रेन चलाई, इस ट्रेन को चलाने के लिए सुरेखा की अलग से ट्रेनिंग हुई। इसके बाद साल 2011 मे उन्हें एक्सप्रेस मेल ड्राइवर के रुप में चयनित किया गया और वो कल्याण के ड्राइवर्स सेन्टर में ट्रेंनिग देने का काम करने लगी।
दोस्तो सुरेखा यादव ने अपने हौंसले के साथ इस बात को साबित कर दिया की आज महिलाएं किसी भी क्षेंत्र में पीछें नही है। सुरेखा यादव के इस हौंसले से हर महिला को आगे बढ़ने मदद मिलेगी।
भारत की पहली लोको पायलट महिला - सुरेखा यादव | First Loco Pilot Woman Story In Hindi




