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पहले राष्ट्रभक्त नरसिम्हा रेड्डी जिन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ छेड़ी जंग|Narasimha Reddy Story In Hindi

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दोस्तो देश की आजादी में कई वीर सपूतों का बलिदान जुड़ा हुआ है उन वीर सपूतो के सामने बस एक ही लक्ष्य था देश की आजादी उन वीरो का यही साहस व बलिदान था जिस वजह से अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। वो भगत सिंह सुखदेव जैसे वीर सपूत थे जिन्होंने आजादी की इस जंग में जवानी में फांसी के फंदे को खुशी-खुशी चुम लिया था। दोस्तो अब तक हम हमारे इन आजादी के वीर सपूतो पर बॉलीवूड की कई फिल्में देख चुके है, लेकिन बीते 2 अक्टूबर को एक वीर योद्धा की बॉलीवूड फिल्म रिलीज हुई जिसका नाम था नरसिम्हा रेड्डी फिल्म में नरसिम्हा रेड्डी की भूमिका निभा रहे है साउथ के सुपरस्टार एक्टर चिंरजीवी, फिल्म में बॉलीवूड के बिग-बी अभिताभ बच्चन भी मुख्य भूमिका में है। दोस्तो आपको बता दे की नरसिम्हा रेड्डी देश के ऐसे पहले राष्ट्रभक्त थे जिन्होंने पहली बार अंग्रेजों के अत्याचारो पर विद्रोह की शुरुआत की थी तो चलिए दोस्तो भारत के उस महान वीर नरसिम्हा रेड्डी के जीवन के बारे में जानते है जिन्होंने पहली बार अंग्रेजों के शक्तिशाली शासन के खिलाफ आवाज उठाकर देशभक्ति व आजादी की अलख जगाई।
नरसिम्हा रेड्डी का जन्म व परिवार | Birth and family of Narasimha Reddy
नरसिम्हा रेड्डी का उटियालावाड़ा गांव के एक तेलगू किसान परिवार में जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम मल्लारेड्डी व माता का नाम सीतम्मा था। बिट्रिश हुकूमत में जन्में नरसिम्हा रेड्डी ने बचपन से बिट्रिश सरकार के कुशासन को देखा वो वर्ष 1847 था जब नरसिम्हा रेड्डी ने पहली बार अंग्रेजों के अत्याचारो व देश के किसानो के हित की आवाज उठाई।
रैयतवाड़ी व्यवस्था का किया विरोध | Ryotwadi Movement Narasimha Reddy
मद्रास प्रेसीडेंसी जिसे बिट्रिश शासन काल में फोर्ट सेंट जॉर्ज की प्रेसीडेंसी के नाम से भी जाना जाता था। मद्रास प्रेसीडेंसी अग्रेजी हुकूमत की एक प्रशासनिक व्यवस्था थी। यह आज भारत के आंधप्रदेश में है। अंग्रेजों ने अपनी योजना के तहत किसानो पर रैयतवाड़ी व्यवस्था की शुरुआत की। बिट्रिश सरकार की इस व्यवस्था के चलते किसानो को बिट्रिश खजाने में अधिक कर देना पड़ रहा था। इस व्यवस्था से अधिक कर मिलने के चलते मद्राश प्रेसीडेंसी के गर्वनर थॉमस मुनरो ने वर्ष 1820 में इस व्यवस्था को पुरे मद्राश में लागू कर दिया। अग्रेजी शासन में पहली व्यवस्था थी जिसमें किसान को कर देने को सीधा सम्पर्क बिट्रिश सरकार से हुआ इसके तहत किसान का कर सीधा बिट्रिश खजाने में जमा होता था। रैयतवाड़ी व्यवस्था के अनुसार यदि कोई किसान कर नही दे पाता तो उसकी जमीन हड़प ली जाती थी। किसानो को दबाने व उनकी जमीन को अधीन करने वाली इस व्यवस्था के खिलाफ नरसिम्हा रेड्डी ने आवाज उठाई।
छेड़ दिया रेयतवाड़ी व्यवस्था पर आंदोलन
रैवातवाड़ी व्यवस्था के चलते बिट्रिश सरकार के किसानो पर लगातार अत्याचार बढ़ने लगे किसानो से अधिक कर वसूला जाने लगा किसानो की जमीने हड़पी जाने लगी तब उस समय शक्तिशाली बिट्रिश शासन के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत किसी मे नही थी। लेकिन किसानो पर हो रहे इन अत्याचारों के खिलाफ देशभक्त नरसिम्हा रेड्डी ने आवाज उठाई और सभी किसानो को इसके खिलाफ एकजुट कर अग्रेजो के इस कुशासन के खिलाफ आजादी की जंग छेड़ दी।
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जगा गए आजादी की क्रांति | Real Story Narasimha Reddy In Hindi
रैवतवाड़ी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले नरसिम्हा रेड्डी ने करीब 5000 किसानो को साथ लेकर अंग्रेजों की इस व्यवस्था के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। नरसिम्हा अपनी इस टोली के साथ मिलकर अंग्रेजों के खजानो में डकेती डाल उन्हें लुटने लग गए वो अंग्रेजों का खजाना लूट कर गरीब लोगो में बांट देते। नरसिंम्हा रेड्डी के इस साहस के चलते वो अंग्रेजों के खिलाफ और ज्याद मजबूत हो गए नरसिम्हा रेड्डी की यही मजबूती देख अग्रेजी हुकूमत के थॉमस गर्वनर समेत कई अधिकारी घबरा गए और उन्होंने नरसिम्हा राव को रोकने की योजना तैयार की। बिट्रिश हुकूमत ने नरसिम्हा रेड्डी को रोकने के लिए करीब 1000 लोगो का गिरफ्तारी वांरट जारी कर दिया साथ ही करीब 112 लोगो को गिरफ्तार कर फांसी की सजा का ऐलान किया दोस्तो आपको बता दे की इस लिस्ट में नरसिम्हां रेड्डी का भी नाम शामिल था। बिट्रिश हुकूमत के खिलाफ षड्यंत्र रचने व लोगो को उनके खिलाफ भय का माहौल पैदा करने के कारण 22 फरवरी 1847 को नरसिम्हां रेड्डी को सभी किसानो के बीच फांसी दे दी गई। अंग्रेजों ने नरसिम्हा रेड्डी को तो फांसी दे दी लेकिन उनके विचार लोगो के बीच क्रांति जगा गए।
पहले राष्ट्रभक्त नरसिम्हा रेड्डी जिन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ छेड़ी जंग|Narasimha Reddy Story In Hindi




