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जाने वैश्वीकरण की कुछ ख़ास बातें एवं कारण | All About Globalization and Its Facts In Hindi

जाने वैश्वीकरण की कुछ ख़ास बातें एवं कारण | All About Globalization and Its Facts In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-10 months ago
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वैश्वीकरण क्या है? जाने कुछ ख़ास बातें | All About Globalization In Hindi 

वैश्वीकरण, विभिन्न देशों के लोगों, वहां की कंपनियों और सरकारों के बीच अंतर्क्रिया और एकीकरण (Integration) की एक ऐसी प्रक्रिया है जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश द्वारा संचालित की जा रही है। Information Technology इसमें काफ़ी सहायता प्रदान कर रही है। वैश्वीकरण के कारण पर्यावरण (Environment), संस्कृति, राजनैतिक व्यवस्थाओं, आर्थिक विकास और दुनिया भर के समाजों में रह रहे मानवों के भौतिक जीवन पर ख़ासा प्रभाव (Effect) पड़ रहा है।

वैश्वीकरण

What is globalization?

via : cdninstagram.com 

हालांकि वैश्वीकरण (Globalization) कोई नई चीज़ नहीं है। पिछले हज़ारों सालों से दुनिया के कोने-कोने में बसे लोग एक दूसरे से चीज़े खरीद और बेच रहे है जैसे कि मध्य युग में रेशम मार्ग (Silk Road) द्वारा चीन, युरोप और भारत के लोगों के बीच होता था। पहले विश्व युद्ध के शुरू होने के साथ ही वैश्वीकरण की प्रक्रिया को काफ़ी धक्का लगा था लेकिन वर्तमान समय में वैश्वीकरण (Globalization)  की गाड़ी फिर पटरी पर आ चुकी है।

पिछले कुछ दशकों (Decades) से नीति और तकनीकी (Technical) विकास के कारण सीमा पार के व्यापार, निवेश और प्रवास में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है जिसकी वजह से कई जानकारों का मानना है कि संसार एक नए और अच्छे आर्थिक चरण में प्रवेश कर रहा है। साल 1950 से अब तक विश्व व्यापार में 20 गुणा की बढ़ोतरी हुई है और वर्तमान समय में यह बढ़ोतरी काफ़ी तेज़ी (Speed) से आगे जा रही है।

वैश्वीकरण की वर्तमान लहर (Wave) उन नीतियों द्वारा चल रही है जिन की वजह से कई अंतर्राष्ट्रीय (International) और घरेलू अर्थव्यवस्थाओं का जन्म हुआ है। दूसरे विश्व युद्ध के कुछ सालों के बाद में और ख़ासकर पिछले 2 दशकों के दौरान विभिन्न देशों की सरकारों ने अपना उत्पादन (production) बढ़ाने के लिए निवेश और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को काफ़ी बढ़ावा दिया है। चीन इस लिस्ट में सबसे आगे रहा है। आज चीन में बने उत्पाद (Product) पूरे दुनिया में ख्रीदे जाते हैं।

विभिन्न देशों की सरकारों (Governments) ने वस्तुओं, सेवाओं और निवेश में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय समझौंते भी किए हैं। दूसरे देशों के बाज़ारों में नए अवसरों का लाभ उठाकार Corporations ने उन देशों में कई कारखानों का निर्माण कर उत्पादन किया है। यह वैश्वीकरण की सबसे बड़ी विशेषता है।

Technology ने वैश्वीकरण के विकास में काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Information Technology के विकास ने आर्थिक जीवन को बदल कर रख दिया है। Information Technology ने Globalization की प्रक्रिया को आसान और तेज़ बनाने में काफ़ी सहायता (help) की है।

वैश्वीकरण को लेकर कई तरह के विवाद भी जुड़े हुए हैं। वैश्वीकरण के समर्थकों का मानना है कि इसकी वजह से गरीब देशों के नागरिकों को आर्थिक रूप से मज़बूत होने और अपना जीवन स्तर (Life Status) उँचा उठाने का मौका मिला है जबकि इसके विरोधी यह तर्क देते है कि इसकी वजह से केवल पश्चिमी देशों और उनकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को ही फायदा हुआ है जबकि स्थानीय (Local) लोगों को इस वजह से शोषण का शिकार होना पड़ा है।

अगर वैश्वीकरण के भारत पर प्रभाव की बात करें तो यहां भी इसके पक्ष और विपक्ष (Opposition) में कई लोग खड़े हैं। लेकिन एक बात जरूर है कि वैश्वीकरण के कारण भारत के बहुत से लोगों को जरूर फायदा हुआ है। जैसे कि अगर आप इस लेख तक गूगल के जरिए सर्च करके आए हैं तो यह भी वैश्वीकरण का ही नतीजा है। गूगल अमेरिका की एक कंपनी है जिसने भारत में हज़ारो करोड़ो का निवेश करके अपने और भारत के कई लोगों को रोज़गार दिया है। लेकिन भारत की ऐसी कोई कंपनी (company) नहीं है जो गूगल को टक्कर दे सके। फेसबुक (Facebook) और वाट्सएप के बारे में भी हम यहीं कह सकते हैं।

अगर भारत ने वैश्वीकरण के माहौल को अपने पक्ष में करना है तो हमें जरूरत है कि हम चीन और हमारे बीच होने वाले व्यापारिक अंतर को कम करें। साल 2012 में चीन और भारत के बीच आपसी व्यापार 66 अरब डॉलर का था। चीन ने भारत को लगभग 48 अरब डॉलर का सामान बेचा तो वहीं भारत ने चीन को केवल 18 अरब डॉलर (Billion) का सामान निर्यात किया।

वैश्वीकरण के कारण-

खर्च कम करने की आवश्यकता: (requirement) मान लीजिए कि किसी कंपनी को कोई काम करवाना है। उसके लिये पहला विकल्प होगा कि अपने देश में ही काम करवाया जाये जहाँ इसकी लागत अधिक आयेगी। अगला विकल्प होगा कि उस काम को किसी ऐसे देश में करवाया जाये जहाँ इसकी लागत (Cost) कम आयेगी। यह साफ है कि कोई भी कम्पनी दूसरे विकल्प को चुनेगी। भारत, मलेशिया, चीन और ताइवान में कच्चे माल कम कीमत पर उपलब्ध हैं और इन देशों में मजदूर भी सस्ते में मिल जाते हैं। इससे उत्पादन की लगत कम हो जाती है और कम्पनी को बेहतर मुनाफा होता है। इसलिये जब आप कोई कम्प्यूटर खरीदते हैं तो उसके कुछ पार्ट मलेशिया या ताइवान में बने होते हैं, प्रोसेसर भारत में बना होता है और सॉफ्टवेयर (Software) अमेरिका से आता है। अंतिम उत्पाद उस देश में बनता है जहाँ इसे बेचा जाना है।

नये बाजार की तलाश-

यदि घरेलू बाजार के ज्यादातर ग्राहकों ने किसी उत्पाद (Product) को खरीद लिया है और वहाँ अब न के बराबर खपत होने की संभावना हो तो कम्पनी को अपना बिजनेस बढ़ाने के लिये कोई न कोई योजना बनानी पड़ेगी। किसी नये बाजार में नये ग्राहकों को तैयार करके बिक्री बढ़ाई जा सकती है। आज के दौर में विश्व की कुल आबादी का एक चौथाई हिस्सा चीन और भारत में रहता है। ऐसे में जो भी कम्पनी अधिक बिक्री चाहती है वह इन दो महत्वपूर्ण बाजारों को नजरअंदाज नहीं कर सकती। इसे समझने के लिये किसी गाँव का उदाहरण लेते हैं। यदि किसी गाँव में पैदा हुई सारी सब्जियों को केवल उसी गाँव में बेचना संभव हो तो बहुत ज्यादा ग्राहक नहीं मिलेंगे। ऐसे में सब्जियाँ बहुत सस्ते दर पर बिकेंगी और बरबाद भी होंगीं। अच्छी कीमत के लिये उस गाँव के सब्जी वालों को अधिक ग्राहक की तलाश (search) में शहर की ओर जाने की जरूरत पड़ेगी।

वैश्वीकरण के कारक-

कुछ वर्षों पहले तक ज्यादातर देश स्थानीय उद्योग (Industry) धंधे को बढ़ावा देने के लिये भारी आयात शुल्क लगाते थे ताकि बाहर का सामान कम से कम आ पाये। वैसी नीतियाँ ट्रेड बैरियर (Trade Barrier) का उदाहरण थीं जिन्हें जानबूझ कर लगाया जाता था। लेकिन वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन ने सभी सदस्य देशों को ट्रेड बैरियर घटाने के लिये सहमत कर लिया। डब्ल्यू टी ओ का मानना है कि पूरी दुनिया में बेरोकटोक आर्थिक अवसर मिलने चाहिये। भारत में 1991 में उदारवादी नीतियों की शुरुआत होने से कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने भारत में अपना काम शुरु किया। उसके परिणाम (result) आज सबके सामने हैं। पहले एक कार खरीदने का मतलब होता था एंबेसडर या प्रीमियर पद्मिनी और एक दोपहिया वाहन का मतलब होता था बजाज स्कूटर या राजदूत मोटरसाइकिल (Motorcycle)। आज लोगों के पास कार या बाइक खरीदने के लिये कई विकल्प हैं।

 वैश्वीकरण के परिणाम

रोजगार के बेहतर अवसर: आज भारत बीपीओ सेक्टर में एक अग्रणी देश है। बीपीओ से कई एमएनसी को बैकऑफिस सपोर्ट मिलता है। अमेरिका में बैठा कोई ग्राहक जब अपनी समस्या के समाधान (Solution) के लिये फोन कॉल करता है तो शायद वह गुड़गाँव में बैठे किसी व्यक्ति (person) से बात करता है। आर्थिक क्रियाओं के बढ़ने के कारण भारत में कई नये आर्थिक केंद्रों (Economic Centers) का विकास हुआ है। उदाहरण: गुड़गाँव, चंडीगढ़, बंगलोर, हैदराबाद और मेरठ।

जीवनशैली में बदलाव: लोगों के खान पान का ढ़ंग तेजी से बदला है। आप आज नाश्ते में केल्लॉग के कॉर्न फ्लेक्स खाते होंगे और लंच में आलू टिक्की बर्गर। हो सकता है कि आप लेवाइस की जींस पहनते होंगे। यदि आपके पड़ोस में कोई बीपीओ में काम करने वाला रहता होगा तो आप उसकी अमेरिकन स्टाइल की अंग्रेजी सुनते होंगे। विकास के असमान लाभ: किसी एमएनसी में काम करने वाले हर एक प्रोफेशनल के मुकाबले सैंकड़ों ऐसे लोग हैं जो रिक्शा चलाते हैं या दिहाड़ी पर काम करते हैं। करोड़ों लोग ऐसे हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी (Bread) नसीब नहीं होती है। हम आज भी महाराष्ट्र या कर्नाटक में किसी किसान की आत्महत्या की खबर सुनते हैं।

विकसित देशों द्वारा गलत तरीकों का इस्तेमाल: विकसित (Developed) देश आज भी अपने किसानों को भारी अनुदान देते हैं और ट्रेड बैरियर लगाते हैं। बदले में विकासशील देशों को डब्ल्यू टी ओ (WTO) से बहुत कुछ नहीं मिल पाता है।

सारांश-

वैश्वीकरण एक ऐसी वास्तविकता है जिसे हम नकार नहीं सकते। वैश्वीकरण से नुकसान की तुलना में फायदे अधिक हुए हैं। विश्व के अर्थशास्त्रियों और नीतिनिर्धारकों को अपनी नीतियों में सुधार करने की जरूरत है ताकि वैश्वीकरण के लाभ जनमानस तक पहुँच सकें। जब वैश्वीकरण से विकास के हर पैमाने की प्राप्ति हो जायेगी तभी वैश्वीकरण को सफल माना जायेगा। ये पैमाने न केवल धन कमाने को लेकर हैं, बल्कि सबके लिये अच्छी स्वास्थ्य सेवा (Health Care), शिक्षा, सुरक्षा और जीवन स्तर के बारे में भी हैं।
आपके घर में जितना भी इलेक्ट्रिकल और डिजिटल सामान होगा शायद वो चीन में ही बना होगा। हमें जरूरत है कि हम Make in India के तहत ऐसे सामानों का उत्पादन खुद शुरू करें और वैश्वीकरण की प्रक्रिया में उपभोगता (Consumer) नहीं बल्कि उत्पादक बनकर उभरें।