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10 साम्प्रदायिक दंगे जो दहला गए देश को | India Top 10 Communal Riots In Hindi

By N.j / About :-6 years ago

दुनिया में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां हर धर्म व जाति वर्ग के लोग रहते है। आजादी के बाद भारत ने सभी धर्मां के लोगो को शरण दी व सब को समान अधिकार दिए। लेकिन भारत देश में भाईचारे व इसकी अखंडता पर कई बार ऐसे मौके आये जब में सांप्रदायिक दंगो ने भारत की इस छवि पर दाग लगाए। दोस्तो हम सांप्रदायिक दंगो की बात करे तो  सबसे बड़े सांप्रदायिक दंगे 1899 में हुए कज्हुहुमालाई व सिवाकासी दंगे माने जाते है। तो चलिए दोस्तो आज जानते है कब-कब सांप्रदायिक दंगो के चलते भारत की शांति भंग हुई और कौन-कौन से सांप्रदायिक दगें भारत में हुए।

1. कलकत्ता दंगा - 1946

कलकत्ता दंगा के समय भारत देश बिट्रिश शासन के अधिन था। तब यह दंगा हिंदू व मुस्लिम समुदाय के बीच हुए । इन दंगो में करीब 4000 लोगो की मौत हुई व करीब 10,000 हजार लोग घायल हो गए। कलकत्ता में हुए इन दंगो को “ डायरेक्ट एक्शन दिवस ” का नाम दिया गया।

2. सिख-विरोधी दंगे - 1984

सिख- विरोधी दंगो को लेकर आज भी भारतीय राजनीतिक दल में इस को लेकर बहस होती है। दरअसल इन दंगो की शुरुआत भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दिन यानी 31 अक्टूबर 1984 को ही शुरु हो गए थें। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही सिंख अंगरक्षकों ने कर दी थी। इसके चलते देश के कई हिस्सों सिख-विरोधी दंगे छिड़ गए हर तरफ सिखों को मारा जाने लगा। सिख दंगो का सबसे ज्यादा असर भारत की राजधानी दिल्ली में हुआ । सिख दंगो में करीब 800 सिखों की निर्मम हत्या कर दी गई थी।

3. कश्मीर दंगा - 1986

कश्मीर में दंगे की शुरुआत तब हुई जब कश्मीर के अनंताग जो की कश्मीर का मुस्लिम आबादी वाला इलाका है। यहां रहने वाले कई हिंदूओं का यहां से मार कर भगाया जाने लगा। तब इस घटना ने एक सांप्रदायिक हिंसा के रुप में जन्म लिया और करीब 1000 लोगो मौत हो गई। इस हिंसा के चलते कई हिंदू परिवार अंनताग छोड़ने को मजबूर हो गए।

4. वाराणसी दंगे - 1989

पूरे भारतवर्ष के हिंदूओ के लिए प्रमुख तीर्थ स्थलों में एक वाराणसी शहर भी सांप्रदायिक हिंसाओं का शिकार हो चुका है। वाराणसी में साल 1989,1990, व 1992 में हिंसा हुई। यह तीनों दंगे हिंदू व मुसलमान समुदाय के बीच छिड़े। इस हिंसा में कई हजार लोगो को अपनी जान गवानी पड़ी।

5. भागलपुर दंगा - 1989

भारत देश की आजादी के बाद बिहार के भागलपुर में हुए दंगे भारतीय इतिहास के सबसे भयानक हिंसा में आता है। साल 1989 में यह दंगा हिंदू व मुस्लिम समुदाय के साथ छिड़ा जो करीब 2 महिनो तक भागलपुर को जलाता रहा। इस हिंसा में करीब 1000 हजार लोगो को अपनी जान गवानी पड़ी।

6. मुंबई दंगे - 1992

मुंबई में दंगो की शुरुआत बाबरी मस्जिद के तोड़ने के बाद हुई। हिंदू-मुस्लिम समुदाय में हुए इस दंगे में करीब 1 साल तक मुंबई जलता रहा। इन दंगो में करीब 1000 लोगो की जान गई। इन दंगो के बीच साल 1993 में मुंबई को सीरियल बम धमाको का सामना करना पड़ा जिनमें हजारो लोगो की इन धमाको में जान गई।

7. गुजरात दंगे - 2002

भारत में वैसे तो हिंदु मुस्लिम समुदाय में कई बार दंगे छिड़े लेकिन जब बात होती है गुजरात दंगो की तो रुह कांप जाती है। गुजरात दंगो की शुरुआत साल 2002 में हुई, जब कारसेवक अयोध्या से साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से गुजरात लोट रहे थें। इस दौरान जब साबरमती एक्सप्रेस गोधरा स्टेशन पर पहुंची तब कुछ दंगा फड़काने के मकसद से दंगाईयों ने कारसेवकों की बोगी को आग के हवाले कर दिया। इस घटना में करीब 59 सेवको की जल कर मौत हो गई। इस घटना के बाद हिंदु-मुस्लिम समुदाय में दंगे भड़क गए और इन दंगो में करीब 2000 लोगो जान गई। वही लाखों लोगो अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

8.  अलीगढ़ दंगा - 2006

अलीगढ़ उत्तर प्रदेश जिसका सांप्रदायिक हिंसाओं के साथ एक अलग ही रिश्ता रहा है। साल 2006 में रामनवमी के मौके पर हिंदू मुस्लिम के बीच सांप्रदायिक हिंसा छिड़ी। इसमें 6-7 लोगो को निर्मम हत्या हुई। अलीगढ़ में में हिंदू मुस्लिम समुदाय के बीच दंगे छिड़ना आम बात है।

9. देगंगा दंगा - 2010

देगंगा दंगे जो 6 सितम्बर 2010 को छिड़े। मुस्लिम समुदाय के भारी भीड़ दल ने हिंसा भड़काते हुए पहले हिंदू लोगो पर हमला किया और फिर हिंदू मंदिरो को तौड़ कर उन्हें लूट लिया। इस सामप्रदायिक हिंसा में कई जाने गई।

10. मुजफ्फरनगर दंगा - 2013

उत्तर-प्रदेश का मुजफ्फरनगर जिला जो एक मुस्लिम समुदाय बहुल क्षेत्र है। देश में सांमप्रदायिक हिंसाओं में मुजफ्फरनगर भी पीछें नही रहा है। साल 2013 में यहां हिंदु - मुस्लिम समुदाय के बीच दगें हुए इन दंगो में 48 लोगो की जान गई व कई लोग बुरी तरह घायल हुए।

भारत देश के कई महान लोगो के कथनों के अनुसार हिंसा से किसी समस्या का समाधान नही निकलता। देश को आजादी दिलाने के लिए महात्मा गांधी ने मजबूत अग्रेंजी शासन को अंहिसा के मार्ग पर चलते हुए ही भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया था।

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