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भारत की पहली फीचर फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' से जुडी कुछ रोचक बातें | India's First Feature Film

By Tanishka / About :-2 years ago

भारत की पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र': जानें इसके पीछे की कहानी | India's First Feature Film in Hindi

हमारे देश में बॉलीवुड फिल्म की बात की बात ही अलग है। इसकी तारीफ में क्या ही कहा जाये। हमारा देश फ़िल्म-सिनेमा में काफी आगे है पर क्या आप जानते है की इस फिल्म-सिनेमा की शुरुआत कहाँ से हुई। हमारे देश की पहली फिल्म का नाम क्या है तो आइये जानते  है की भारत की पहली फिल्म कौनसी है।

भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' से जुडी कुछ रोचक बातें | India's First Feature Film in Hindi

यह बात है 28 दिसंबर 1895 की जब लुमियर ब्रदर्स के द्वारा बनाई गई दुनिया की पहली फिल्म (जो 45 मिनट की थी) की पेरिस में पब्लिक स्क्रीनिंग हुई। एक साल बाद यह फिल्म भारत में भी दिखाई गयी। यह फिल्मों की शुरुआत थी और 1911 में बॉम्बे शहर में स्थित अमेरिका-इंडिया पिक्चर पैलेस में एक फिल्म दिखाई गयी थी, जिसका नाम द लाइफ ऑफ क्राइस्ट था तब इस फिल्म को देखने एक धुंडीराज नाम का एक व्यक्ति देखने गये तब उनके मन में कई कल्पनाएँ आ रही थी तब वहाँ  बैठे लोगो को क्या पता था की ये व्यक्ति भारत के सिनेमा जगत का इतिहास रचने जा रहा है।

इस फिल्म के दो साल बाद 3 मई 1913 को भारत की पहली मूक फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ रिलीज हुई। यह फिल्म उसी (धुंडीराज) व्यक्ति द्वारा बनाई गयी थी जो बोम्बे शहर में फिल्म देख तालियाँ बजा रहे थे उनका पूरा नाम धुंडिराज गोविंद फाल्के था इन्ही के द्वारा भारत में पहली बार फिल्म बनाई गयी थी जिन्हें वर्तमान में भारतीय फिल्मों के पितामह दादा साहेब फाल्के के नाम से जाना जाता है।

राजा हरिश्चंद्र फिल्म भारत में बनी पहली फूल-लेंथ फीचर फिल्म है. इसका प्रीमियर 3 मई, 1913 को मुंबई के कोरोनेशन सिनेमा में हुआ था। इस फिल्म का निर्देशन और निर्माण दादा साहेब फाल्के के द्वारा किया गया था यह एक प्रकार की साइलेंट फिल्म थी। इस फिल्म में राजा हरिश्चन्द्र की कहानी का जिक्र किया गया था राजा हरिश्चन्द्र अपनी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे. यह फिल्म कठिन विकल्पों और व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना करने पर भी, अपने मूल्यों को बनाए रखने के लिए उनके संघर्षों और बलिदानों को चित्रित करती है.

कैसे फिल्म ने भारतीय सिनेमा को बदल दिया | 

हरीशचन्द्र फिल्म को बने वेसे तो 110 साल पुरे हो चुके है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिये एतिहासिक थी तो आइये जानते है की यह फिल्म कैसे बनी और इसने भारतीय सिनेमा को कैसे बदल दिया?

फिल्म बनाने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा

दादा साहेब फाल्के को फिल्म बनाना है यह तो तय हो गया था लेकिन इस फिल्म को कैसे बनाये इसकी सबसे बड़ी समस्या हो गयी थी क्योकि फिल्म बनाने की तकनीक अभी भारत में नही आई थी उनके पास इतने पैसे नही थे की लंदन जाकर नई तकनीक को सीख सके तब उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी तब जाकर वह लन्दन गये और लन्दन में उनकी मुलाकात मशहूर ब्रिटिश डायरेक्टर और प्रोड्यूसर सेसिल हेपवर्थ से हुई जिन्होंने दादा साहेब को फिल्में बनाने से जुड़े कई गुण सिखाए.अब दादा साहेब को फिल्म बनाने के तकनीको का ज्ञान हो चूका था। वे फिल्म के लिये उनकी स्क्रिप्ट तैयार कर ली और बहुत मुश्किलों के बावजूद उनकी फिल्म तैयार हो गयी.फिल्म बनाने में उनकी पत्नी ने अपने सारे जेवर बेच दिए और उनके इस कठिन समय में उनकी पत्नी ने उनका हर कदम पर साथ दिया। इस तरह उन्होंने कड़ी- मेहनत से इस फिल्म का निर्माण किया और उन्हें काफी सफलता मिली।

फिल्म रिलीज होने के बाद 

1. भारतीय सिनेमा पर आया लोगों का भरोसा:  इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा पर लोगो के भरोसे को कायम किया. राजा हरिश्चंद्र फिल्म एक व्यावसायिक सफलता थी और इसने भारतीय फिल्म उद्योग की नीव को स्थापित किया था। उन्हें यह विश्वास हुआ की भारतीय सिनेमा की आवश्यकता लोगो को है और वे इस पर पैसे खर्च कर सकते है।

2. नई तकनीकों की शुरुआत की: इस फिल्म में दादा साहेब फाल्के ने नई तकनीकों और टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया, जैसे कि डबल एक्सपोजर और स्पेशल इफेक्ट. उनके इस प्रयत्न से यह इस फिल्म को प्रसिद्धी मिली.उनके द्वारा ही इस फिल्म में म्यूजिक के कॉन्सेप्ट को पहली बार पेश किया, जो बाद में भारतीय सिनेमा की पहचान बन गया।

सार में कहें तो राजा हरिश्चंद्र की फिल्म ने यह प्रूफ कर दिया कि सिनेमा में नई-नई तकनीकों और टेक्नोलॉजी को लाकर हाई-क्वालिटी और इंगेजिंग कॉन्टेंट बनाया जा सकता है.और साथ ही नए फिल्म निर्माताओं को प्रेरित करके भारत में अच्छी क्वालिटी वाली आकर्षक फिल्में बनाना संभव है। उनके इसी संघर्ष के कारण आज भारत में बहुत सारी फिल्मो का निर्माण किया जा चूका है और साल भर इनकी तकनीको में और भी ज्यादा विकास हो रहा है।

दादा साहेब ने फ़िल्मी जगत का निर्माण किया था इसलिए उन्हें फ़िल्मी जगत का पितामह कहा जाता है और इन्ही के नाम से फाल्के पुरस्कार उन लोगो को दिया जाता है जो फ़िल्मी जगत में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को निभाते है।

भारत की पहली फीचर फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' से जुडी कुछ रोचक बातें | India's First Feature Film