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पहले कॉल सेंटर फिर बैंक में नौकरी की आज है IPS ऑफिसर | IPS Suraj Singh Story In Hindi

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“सिविल सेवा“ की परीक्षा में सफल होने के लिए हर साल लाखो छात्र इस परीक्षा में शामिल होते है। सभी छात्रो का सपना होता है की इस परीक्षा को पास कर वो भारत सरकार के “ आईएएस, आईपीएस, आईएफएस” अधिकारी बन देश की सेवा कर सके। लेकिन दोस्तो यह सफर इतना आसान नही है। “सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्रो के लिए यह जीवन का सबसे बड़ा सघर्ष होता है। कुछ ऐसा ही सफर था सूरज सिंह का। सूरज सिंह के जीवन में एक समय ऐसा भी था जब घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उन्हें कॉल सेंटर में जॉब करनी पड़ी, लेकिन दोस्तो आपको बता दे की सूरज सिंह आज एक आईपीएस ऑफिसर (IPS Officer Suraj Singh) है। सूरज सिंह के कहानी उन लोगो के लिए प्रेरणा बनने वाली है जो गरीबी व घर की विपरीत परिस्थितियों में अपनी मंजिल को पाने का सपना देखते है तो चलिए जानते आईपीएस सूरज सिंह की यह प्रेरणादायक कहानी। - IPS Officer Suraj Singh
दादा-दादी से मिली प्रेरणा | IPS Suraj Singh
सूरज सिंह के बारे में एक रिपोर्ट के अनुसार- सूरज सिंह ने अपना बपचन का जीवन दादा-दादी के साथ गुजारा। सूरज ने अपनी शुरुआती शिक्षा की पढ़ाई उत्तर प्रदेश की जौनपुर सिटी से की। बचपन में सूरज को दादा-दादी वीर महापुरुषों के जीवन से जुड़ी कहानियां सुनाते थे, बस यही से सूरज सिंह को लोगो की भलाई व उनकी सेवा करने की प्रेरणा मिली। , हालांकि दोस्तो अपनी 5वीं कक्षा की पढ़ाई पुरी होने के बाद सूरज सिंह अपने माता-पिता के साथ कानपुर के जाजमऊ उपनगर में रहने चले गए। जाजमऊ में सूरज सिंह ने अपनी आगे की पढ़ाई की शुरुआत हिंदी माध्यम से शुरु की । आपको बता दे की दोस्तो सूरज सिंह बचपन में पढ़ाई से ज्यादा खेल-कूद व क्रिएटिव राइटिंग में ज्यादा होशियार थे। यही कारण है की सूरज सिंह को साल 2000 में भारत देश के तत्कालीन रहे राष्ट्रपति के. आर नारायन के द्वारा उनकी क्रिएटिव राइटिंग व कविता के क्षेत्र में “ राष्ट्रीय बाल पुरस्कार” दे कर सम्मानित किया गया।
खोला खुद का कोचिंग सेंटर | IPS Suraj Singh In Hindi
सूरज सिंह ने साल 2011 में U.P Board से 12 कक्षा की शिक्षा लेते हुए 81 प्रतिशत प्राप्त किए। जब सूरज सिंह ने 12 कक्षा पास की तब उनके परिवार की आर्थिक परिस्थिति इतनी कमजोर थी की उन्हें अपनी आगे की शिक्षा घर पर रहकर ही प्राप्त करनी पड़ी । सूरज का परिवार एक सयुक्त परिवार था और घर में कमाने वाले केवल उनके पिता ही थे। सूरज पिता की मदद करना चाहते है। अपने इसी विचार के चलते सूरज सिंह ने अपनी पढ़ाई के साथ अपने एक मित्र के साथ मिलकर एक कमरा किराए पर लिया और वहां पर अंग्रेज़ी सिखाने का कोचिंग संस्थान खोल लिया, लेकिन थोडें समय बाद मकान मालिक से उनका विवाद होने के चलते उन्हें यह कोचिंग बंद करनी पड़ी। इस समय में सूरज ने अपनी अंग्रेज़ी की स्किल को भी बेहतर बना लिया।
नौकरी की शुरुआत | IPS Suraj Singh Story In Hindi
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सूरज सिंह ने अपनी अंग्रेज़ी की कोंचिग बंद होने के बाद नौकरी करने पर विचार किया और उन्होंने अपनी पहली नौकरी की शुरुआत करते हुए “हिन्दुस्तान यूनिलीवर” में मार्केटिंग के तौर अपनी पहली नौकरी की शुरुआत की। अपनी पहली नौकरी में सूरज सिंह सफल नही हो पाए और उन्होंने यह नौकरी छोड़ कर EXL कंपनी में कॉल एग्जीक्यूटिव की नौकरी करने लग गए। महज 19 साल की उम्र में सूरज सिंह कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ नोएडा चले गए। इस दौरान सूरज सिंह का नौकरी कर घर पैसा भेजने के साथ अपनी ग्रेजुएशन की शिक्षा व आईपीएस ऑफिसर - IPS Officer Suraj Singh बनने के लिए यूपीएससी की तैयारी भी उनके जीवन का एक लक्ष्य था। सूरज सिंह ने कुछ समय बाद नौकरी छोड़ दी और वो साल 2007-08 में दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी करने के लिए चले गए। दिल्ली में रहते हुए उनके नौकरी से कमाए पैसे भी महज 6 महीने में पुरे हो गए।
बैंक में नौकरी के लिए दी परीक्षा
कोचिंग के दौरान पैसे खत्म होने के बाद सूरज ने फिर से कोई नौकरी करने की ठानी और उन्होंने करीब 8 बैंको की पीओ की परीक्षा दी। सूरज ने बाद में बैंक ऑफ महाराष्ट्र” में नौकरी की शुरुआत की तब सूरज ने ठाणे में पुरे 4 माह तक इस बैंक में काम किया। यहां काम करते हुए सूरज का एसबीआई बैंक में चयन हो गया। एसबीआई बैंक में काम करते हुए उन्होंने देखा की उन्होंने आगरा, दिल्ली, और रुड़की में उनके साथ 1 साल तक काम किया था। उनका मैनेजर के रूप में प्रमोशन हो गया है तब यह देख सूरज सिंह ने बैंक की नौकरी त्याग दी और उत्पाद शुल्क विभाग में एक निरीक्षक के पद पर कार्य करने लग गए। शुल्क विभाग में नौकरी करते हुए सूरज सिंह ने एसएससी की परीक्षा भी क्वालीफाई कर ली। एसएससी की नौकरी मिलने के बाद उनके पास छुट्टियां थी । बस सूरज सिंह ने यही से खुद को पुरी तरह यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी में झोंक दिया।
चौथे प्रयास में मिली सफलता | Success Story IPS Suraj Singh
सूरज सिंह ने एसएससी की परीक्षा पास करने के बाद वो यूपीएससी की तैयारी में जुट गए साल 2011 में सूरज सिंह ने UPSC के लिए प्रथम परीक्षा दी पहली बार उन्हें निराशा हाथ लगी और वो असफल हो गए। अपने पहले यूपीएससी की परीक्षा के समय सूरज एसबीआई बैंक में कार्यरत थै। सूरज ने अपना प्रयास जारी रखा और साल 2012 में एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन इस बार वो मेन्स एग्जाम असफल हुए दो बार असफलता हाथ लगने के बाद भी सूरज सिंह बिना रुके यूपीएससी का तीसरी बार एक्जाम दिया इस बार वो एक्जाम में पास हो गए और उन्हें "भारतीय राजस्व सेवा" का पद मिला। लेकिन दोस्तो सूरज सिंह का तो सपना आईपीएस बनने का था उनके इस सपने को तब और मदद मिल गई जब सरकार ने इस परीक्षा को क्वालिफाई करने की समय सीमा 5 बार कर दी और आयु सीमा में 2 साल की बढ़ोतरी कर दी । अबतक सूरज यूपीएससी के लिए 3 प्रयास कर चुके थे और उनके पास 2 मौके और आ गए सूरज ने इस मौके जाने नही दिया और चौथी बार में अपने मुकाम को हासिल कर लिया। सूरज ने एआईआर में 189 प्राप्त किए। सूरज जब 30 साल के तब वो अपने चौथे प्रयास में आईपाएस ऑफिसर बनें।
पहले कॉल सेंटर फिर बैंक में नौकरी की आज है IPS ऑफिसर | IPS Suraj Singh Story In Hindi




