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जगुआर कंपनी की कार कैसे बन गई दुनिया की नंबर -1 कार | Jaguar Success Story In Hindi

By N.j / About :-7 years ago

2008 में भारत की टाटा मोटर्स कंपनी से जुड़ने वाली जगुआर का पूरा सफर | Jaguar Full Success History In Hindi

नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने वाले है उस कार की जो एक बार रोड पर आ जाये तो सभी को अपनी और आकर्षित कर लेती है दोस्तों हम बात कर रहे है जगुआर कार की जिसे खरीदना सबका सपना होता है आज जगुआर दुनिया के शाही लोगो की पहली पसंद भी है साथ ही इंग्लैंड की महारानी की भी पहली पसंद जगुआर कार ही है दोस्तों आज मार्केट में कई तरह की कारे है लेकिन जब जगुआर की बात आती है तब लोग बाकि कारो के नाम भूल जाते है आज जगुआर लोगो की पहली पसंद कैसे बनी और इस कार की शुरुआत कैसे हुई और इसको मार्केट में सफलता कैसे प्राप्त हुई इस बारे में विस्तार से जानेगे साथ इस बात के बारे में भी जानेगे की साल 2008 में कैसे जगुआर भारत की मोटर्स कंपनी TATA के साथ जुडी.

दोस्तों जगुआर कार की कहानी की शुरुआत हुई थी आज से करीब 96 साल पहले जब दो मोटर्स बाइक के दीवानो ने मिल कार एक कंपनी की स्थापना की और उन्होंने इस कंपनी को नाम दिया Swallow Sidecar Company दोस्तों ये कंपनी अपनी शुरुआत में मोटर साइकिल का बनाने का काम करती थी दोस्तों जिन दो लोगो ने इस कंपनी की शुरुआत की थी उनका नाम था विलियम लीयोंस और विलियम वॉल्स्ले लेकिन समय बीतने के साथ इस कंपनी के विलियम वॉल्स्ले कंपनी में से अपनी हिस्सेदारी लेने की सोची और तब कंपनी ने उनके सभी शेयर मार्केट में बेच दिए गए तब कंपनी को दोबारा से मार्केट में पुनर्गठित किया गया और और कंपनी को एक नया नाम दिया गया S.S कार्स लिमिटेड और S.S कार्स ने स्टैण्डर्ड मोटर कंपनी से हाथ मिला लिया  और तब दोनों ने मिल कार बनाने का कार्य शुरू कर दिया और जो S.S कार्स गाड़ियों का निर्माण करती थी

उसे वो मार्केट में जगुआर नाम से लॉन्च करने लगी साल 1935 में जगुआर का पहला मोडल 2 एंड हाफ लीटर इंजिन्स के साथ S.S - 90 स्पोर्ट्स सलून और इस मोडल से मेल खाता हुआ एक और मॉडल लॉन्च हुआ 3 एंड हाफ लीटर इंजिन्स S.S -100 को लॉन्च किया गया दोस्तों अब तक निर्माण किये गए सभी मॉडल्स में जगुआर में S.S कार सिर्फ एक मॉडल था लेकिन साल 1945 में कंपनी के सभी शेयर होल्डर के साथ एक मीटिंग की गई तब सभी की सहमति पर इस कंपनी का नाम जगुआर रखा गया

दोस्तों कंपनी के नाम में बदलाव करने के पीछे कारण था की S.S कार नाम बोलने में कम आकर्षित लगता था और जब दुनिया में दूसरा वर्ल्ड वॉर हुआ तब से इस नाम को नकारात्मक माना जाने लगा समय के साथ जगुआर ने अपने मॉडल्स में बदलाव किये और साल 1950 में अपने मॉडल की शानदार और लक्जरी मॉडल मार्केट में उतारे तब जगुआर की पहली सबसे सफल कार XK - 20 को मार्केट में 1948 में लॉन्च किया गया था दोस्तों तब जगुआर कार का स्लोगन था ग्रेस स्पेस पेस जिसमे दोस्तों ग्रेस का मतलब था इसकी शानदार बनावट और स्पेस का मतलब था कार के मौजूद शानदार स्पेस और दोस्तों पेस यानी इस कार की शानदार स्पीड थी आगे चलकर जगुआर अपने इन्ही फॉर्मूलों का प्रयोग करते हुए मार्केट में अपनी कार लॉन्च करती रही कंपनी का यही फार्मूला उनके लिए सफलता का सबसे बड़ा मंत्र बना अपनी XK- 120 के बाद XK- 140 , XK- 150 कार मार्केट में लॉन्च की गई

जो स्पोर्ट्स कार की दुनिया की पहली पसंद बन गई अपनी कार के शानदार लुक्स के कारण सभी के लोगो की पहली पसंद बन गई दोस्तों जगुआरके लिए सबसे बड़ी सफलता तब हाथ लगी जब उनकी कार ने 24 फॉर हॉर्स ले मेन की रेस में जीत हासिल की मार्केट में X सीरीज को शानदार सफलता मिलने के बाद जगुआर ने मार्केट में E टाइप की कार्स को भी लॉन्च किया जो लोगो को काफी पसंद आयी दोस्तों शुरुआत से अब तक जगुआर के लिए सभी कार्य आसान थे लेकिन उनके सामने मुश्किलों की शुरुआत तब हुई जब जगुआर कार के लिए जो स्टील कंपनी उनकी बॉडी तैयार करती थी उसे किसी दूसरी कंपनी ने खरीद लिया अब लॉयंस के सामने जगुआर को चलाने की सबसे बड़ी चुनौती बन गई और साथ में उनकी चिंता का कारण ये भी था की उनके कोई संतान नहीं थी और उम्र काफी बढ़ गई थी की आगे कौन उनके इस बिजनेस को सभालेगा और इन सब मुश्किलों के बाद विलियम लीयोंस जगुआर कंपनी को साल 1966 को BMC ( ब्रिटिश मोटर कार कंपनी) को बेच दिया

साल 1984 में जगुआर को लंदन के स्टॉक मार्केट में शामिल किया गया यहां पर कंपनी ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाई और साल 1990 में लंदन स्टॉक मार्केट ने इसे लिस्ट से हटा दिया और तब मार्केट में चल रही फोर्ड कंपनी ने जगुआर कंपनी को खरीदने की इच्छा जाहिर की लेकिन किसी कारणवश इन दोनों मोटर्स कंपनियों के बीच डील पूर्ण नहीं हो पाई साल 1999 में जगुर और ऑस्ट्रान मल्टिन और वॉल्वो कार की तरह फोर्ड कार कंपनी का एक हिस्सा बन गई लेकिन दोस्तों फोर्ड के द्वारा जगुआर को अपने में सम्मलित करने से उन्हें काफी नुकसान हुआ तब साल 2008 में फोर्ड ने जगुआर को लेंड रोवर के साथ भारतीय कंपनी टाटा मोटर्स को बेच दिया और तरह जगुआर कार भारत की टाटा मोटर्स का हिस्सा बन गई तब साल 2011 में टाटा मोटर्स ने जगुआर के लिए पुणे में एक प्लांट की स्थापना की गई साथ ही ये भारत का पहला प्लांट बना जहां पर जगुआर कार की तैयार की जाती थी

जब साल 2017 में टेक फेस्टिवल का आयोजन हुआ तब जगुआर ने अपनी नई तकनीक की सेल्फ ड्राविंग कार लोगो को दिखाई दोस्तों अपनी नई तकनीक के साथ जगुआर का मानना है की आने वाले समय में मार्केट में सेल्फ ड्राविंग कार और इलेक्ट्रिक कारो की सबसे ज्यादा डिमांड होगी और इसके लिए जगुआर मार्केट में पूरी तरह तैयार है दोस्तों जगुआर की शुरुआत से वो कई मालिकों के हाथ में रही लेकिन दोस्तों इस कार की क़्वालिटी में कभी कोई बदलाव नहीं किया गया और यही कारण है की आज मार्केट में जगुआर की कार्स सबसे बेस्ट कार्स मानी जाती है.

जगुआर कंपनी की कार कैसे बन गई दुनिया की नंबर -1 कार | Jaguar Success Story In Hindi