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22 ऑस्कर विजेता वाल्ट डिज्नी का जीवन परिचय | Walt disney Biography In Hindi

22 ऑस्कर विजेता वाल्ट डिज्नी का जीवन परिचय | Walt disney Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-3 months ago
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"आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत, असफलता नामक बिमारी को मारने के लिए सबसे बढ़िया दवाई है। ये आपको एक सफल व्यक्ति बनाती है"

नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने वाले है एक ऐसी शख्सियत और कलाकार की जिनसे अपनी बेहतरीन सोच से पूरी दुनिया के बच्चों के बचपन में वो खुशिया दी जिस वजह से आज भी उन्हें याद किया जाता है दोस्तों हम बात कर रहे है महान शख्सियत वाल्ट डिज्नी की जिन्होंने मिक्की माउस जैसे कई फैमस कार्टून को जन्म दिया दोस्तों वाल्ट डिज़्नी को उनके ऐनिमेशन फिल्मो के योगदान के लिए 22 बार ऑस्कर का अवार्ड देकर सम्मानित किया गया जो अपने आप में किसी विश्व रिकॉर्ड से कम नहीं है साथ ही आज वाल्ट डिज़्नी द्वारा बनाई की कंपनी दुनिया की टॉप मीडिया कंपनियों में शामिल है जिसका आज अरबो रूपये में टर्नओवर है लेकिन दोस्तों डिज़्नी के लिए उतना सफर आसान नहीं था जैसा हम सोच रहे दोस्तों जो मुकाम डिज़्नी ने कठिन परिस्थियों में इस मुकाम को हासिल किया वो हर किसी के करने के बस में नहीं था तो चलिए दोस्तों जानते है वाल्ट डिज़्नी की इस सफलता की कहानी.

दोस्तों वाल्ट डिज़्नी का जन्म अमेरिका के शहर इगनोइस के हरमोसा नाम के गांव में 5 दिसंबर 1901 को हुआ था इनके पिता का नाम एलियस डिज़्नी था जो एक किसान थे और अपने परिवार का गुजारा चलाने के लिए कारपेंटर का भी काम करते थे लेकिन इन सब से घर का खर्च नहीं चल पाने से उनके पिता ने मार्केट में सब्जी बेचने का भी कार्य किया उनके पिता द्वारा इतना कुछ करने के बाद वो इतने पैसे जमा नहीं कर पाते थे की उनका परिवार आसानी से चल सकें और अपने बच्चो को स्कूल में भेज सकें और तब इन परिस्थितियों को देख एलियस ने अपना घर बेच दिया और साल 1906 में मार्सेलिया मिस्सोरी नामक गांव में बस गए उस गांव में उनके परिवार में अन्य सदस्य भी रहते थे वोल्ट के परिवार में उनके तीन भाई और एक बहन थी और जिस चीज में वो सफल हुए वो थी ड्राइंग जिसमे उन्हें बचपन से काफी लगाव था वो अपने घर के फर्श और दीवारों में हमेशा कुछ न कुछ ड्राइंग बनाते रहते थे एक दिन तो उन्होंने अपनी घर की दीवार पर तारकोल से पेंटिंग बना दी और इस वजह उनके पिता ने उन्हें खूब डाटा वाल्ट डिज़्नी ने अपने घर के पड़ोसी के घोड़ो की पेंटिंग बनाई जो उनके पड़ोसियों को काफी पसंद आई और उन्होंने इस पैसे देकर खरीद लिया दोस्तों आपको बता दे ये वोल्ट डिज़्नी की अपनी लाइफ पहली कमाई थी दोस्तों वाल्ट डिज़्नी के जीवन में उनके सबसे करीबी दोस्त थे उनके भाई रॉय डिज़्नी साल 1909 में उनको अपने गांव की ही स्कूल में पढ़ाई के लिए एडमिशन करवा दिया गया

Source sarahdiamondswirlsph.files.wordpress.com

लेकिन दोस्तों उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उनको उस गांव को छोड़ना पड़ा और तब आर्थिक तंगी के चलते उनका परिवार साल 1911  में कंसास सिटी में आकर बस गया तब उनके पिता को वहां पर न्यूज़ पेपर और मैगजीन को मार्केट में बांटने का काम मिल गया अपने इस कार्य से कुछ पैसे जमा होने के बाद उनके पिता ने उनका दाखिला बेंटन ग्रामर  स्कूल में करवा दिया उनके पिता का काम ज्यादा बढ़ने के कारण उनके इस कार्य में कई बार वाल्ट डिज़्नी और रॉय डिज़्नी को भी हाथ बटाना पड़ता था और इस कार्य के लिए उन्हें हर रोज सुबह तेज ठंड 4 बजे उठकर पेपर और मैगजीन बांटने जाना पड़ता था उनका यह कार्य पूर्ण होने के बाद वो स्कूल चले जाते थे और जब शाम को स्कूल से छुट्टी फिर मैगजीन बेचने चले जाते दोनों भाई पिता के इस कार्य से इतने थक जाते थे की कई बार उन्हें स्कूल में जाते ही नींद आ जाती थी और इसी वजह से उन दोनों स्कूल के सबसे कमजोर स्टूडेंट माना जाता था अपने जीवन के इन मुश्किल दिनों में भी वाल्ट डिज़्नी ने अपने ड्राइंग के शौक नहीं भूलने दिया और उन्हें जब भी खाली समय मिलता वो ड्राइंग करने लग जाते वोल्ट ज्यादातर फ्री समय में अपनी ड्राइंग अपने घर के पास ही सेलून में बनाते थे सेलून के मालिक को उनकी ड्राइंग इतनी पसंद आती थी की वो उनकी फ्री में सेलून कर देते थे और कई बार इसके बदले उन्हें पैसे भी देता था

दोस्तों वाल्ट डिज़्नी का जीवन काफी संघर्षो के बीच गुजरा उनेक जीवन में वो दिन भी आये जब उन्होंने बस ट्रेन आदि में पॉपकॉन पानी की बोतल और कोल्ड ड्रिंक भी बेचीं अपनी मेहनत से उन्होंने पैसे जमा कर कंसास सिटी आर्ट इंस्ट्रूमेंट में वीकेंड की शिक्षा लेनी शुरू कर दी इसी तरह आगे भी इसी तरह उनका जीवन चलता रहा और साल 1918 दुनिया में हुए प्रथम विश्व युद्ध के बाद उन्होंने सेना में भर्ती होने के लिए अप्लाई किया लेकिन उस समय उन्हें उम्र में कम होने की वजह से सेना में शामिल नहीं किया गया तब उन्होंने अपनी डेट ऑफ़ बर्थ में बदलाव करते हुए रेड क्रॉस में एंबुलेंस की पोस्ट के लिए आवेदन किया और इसमें इन्हे चयनित कर लिया गया और इन्हे फ़्रांस भेज दिया गया 

Source d23.com

वाल्ट डिज़्नी अब तक अपने जीवन में कई कार्य कर चूके थे लेकिन उनके जहन से ड्राइंग का सपना कभी नहीं गया वो रेड क्रॉस में जिस एंबुलेंस को चलाते थे उसे अपनी आर्ट कला से सजा कर रखते थे साल 1919 में वाल्ट ने रेडक्रॉस कंपनी को छोड़ दिया और फिर वापस अमेरिका चले गए क्योकि दोस्तों वहां पर उनकी जॉब पैमेन कमर्शियल आर्ट इंस्ट्रूमेंट में एक आर्टिस्ट के तौर पर लग गई थी लेकिन दोस्तों वाल्ट को जीवन में सबसे बड़ा दुःख तब हुआ जब उन्हें वहां से ये बात कहकर निकाल दिया गया की उनकी आर्ट में क्रिएटिविटी नहीं है और वो किसी चीज की खुद कल्पना कर के नहीं बना सकते

तब उन्होंने अपने इसी अपमान से का बदला लेने के लिए अपनी एक छोटी सी कंपनी खोली जिसका नाम था laugh o Gram studio उनकी ये कंपनी पैसो की कमी के चलते ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई और उन्हें इसे बंद करना पड़ा तब वाल्ट डिज़्नी के पास खोने को कुछ नहीं बस उनके पास 20 डॉलर और एक बैग में कुछ कागज और उनकी ड्राइंग बनाने के टूल्स थे इतनी खराब परिस्थितियों के बाद भी वाल्ट ने अपने प्रयास कभी कम नहीं किये तब उन्होंने अपने भी रॉय की मदद से की और कंपनी बनाई जिसका नाम रखा डिज़्नी ब्रदर्स स्टूडियो रखा और बाद में इसी के नाम में बदलाव करते हुए उन्होंने इसका नाम The Walt Disney Compny रख दिया किसी ने सही कहा हार मानो मत कोशिस करते रहो क्योकि कोशिस करने वाली की कभी हार नहीं होती डिज़्नी ब्रदर्स की ये कंपनी मार्केट में काफी तेजी से आगे बढ़ने लगी और आगे चलकर उन्होंने अपने काम के लिए कई लोगो को जॉब पर रखा

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लेकिन दोस्तों वाल्ट डिज़्नी के जीवन में सबसे सफल समय तब आया जब साल 1928 न्यूयार्क से कैलिफोर्निया जाते समय वॉल्ट ने ट्रैन में बैठे बैठे कागज पर कुछ अजीब ड्राइंग बनाना शुरू कर दी और अंत में उन्होंने एक चूहे के आकर का ड्राइंग तैयार किया और इसे नाम दिया मिक्की और तब उन्होंने इस मिक्की का एनिमेशन तैयार कर उसे अपनी आवाज दी और 18 नवंबर 1928 में वाल्ट डिज़्नी अपने उस एनिमेशन का पहला शो मेन हेटन में प्रदर्शित किया जिसे देखकर लोगो ने काफी पसंद किया और इसके बाद उन्होंने जीवन में कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एक के बाद एक बेहतरीन एनिमेशन फिल्मे दुनिया के सामने प्रदर्शित करने लगे दोस्तों उनके इस कार्य के लिए उन्होंने पूरी दुनिया से करीब 950 अवार्ड जीते और फिल्म इडस्ट्री के सबसे बड़े अवार्ड को उन्होंने 22 बार अपने नाम किया दुनिया को एनिमेशन फिल्मो में कुछ अलग देने के बाद आखिर में 15 दिसंबर 1966 को उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया

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