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जयगढ़ खजाने का रहस्य क्या हुआ था इंदिरा गांधी राज में ? | Jaigarh Treasure Mystery in Hindi

जयगढ़ खजाने का रहस्य क्या हुआ था इंदिरा गांधी राज में ? | Jaigarh Treasure Mystery in Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-9 months ago
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भारत के प्राचीन इतिहास पर नजर डाले तो इस इतिहास में ऐसे कई राजा थें जिन्होंने बाहरी देशों को लूट कर खजाना जमा कर लिया था। उदारण के लिए हम बात करते है नाना साहेब पेशवा का खजाना व बिहार की सोन गुफाएं। आज हम सुनते है की उस महाराजा के पास इतना धन था उस साम्राज्य के पास इतना धन था। आज जब इतिहास के खजानो का जिक्र हुआ है तो हम इतिहास के एक खजाने के पीछे जुड़ी दिलचस्प कहानी को आपके साथ साझा करने वाले है। यह कहानी दिलचस्प इसलिए भी है की इस खजाने को पाने के लिए देश में राज कर चुके अग्रेंज ही नही भारत सरकार भी इसके लिए रात-दिन एक कर चुकी है।

आज भी खजाने को लेकर है सस्पेंस

Jaigarh Treasure Mystery in Hindiimage source

दोस्तो आज भी जिस खजाने कि बात कर रहें है वो खजाना है राजस्थान जयपुर के राजा मान सिंह के किले जयगढ़ के खजाने की। मानसिंह को मुगल राजा अकबर का खास माना जाता था। साथ मान सिंह ने अकबर खास मंत्री रहें बीरबल की मौत का बदला भी लिया था। राजा मानसिंह के जीवन से जुड़े कई रोचक किस्से भी लोकप्रिय है। लेकिन मानसिंह के जीवन में सबसे ज्यादा कुछ लोकप्रिय हुआ तो उनके किले जयगढ़ में दबा हुआ खजाना।
जयगढ़ का खजाना क्या था और इस खजाने को लेकर इतिहास में इतनी चर्चाएँ क्यो हुई तो चलिए इस खजाने से जुड़े सस्पेंस भरें किस्सों के बारे में जानते है। कैटेगरी

कहा से आया मानसिंह के पास इतना खजाना

Jaigarh Treasure Mystery in HindiSource collectionimages.npg.org.uk

अकबर से मानसिंह के रिश्ते इतिहास में मशहुर है । जयपुर के राजा मानसिंह अकबर के नौ रत्नों में एक रत्न थें। मानसिंह की युद्ध कुशलता व उनकी बुद्धिमत्ता के कारण वो अकबर के और भी खास हो गए थें। यही कारण हैं की उन्हें “ राजा मिर्जा ” नाम से भी पुकारा जाता था। अकबर के सेनापति के रुप में मानसिंह ने अपने बल व बुद्धि से मुगलों को कई ऐतिहासिक युद्ध में विजय दिलाई थी। मुगल जिस भी साम्राज्य पर आक्रमण करते उस साम्राज्य को जीतने के बाद मुगल पूरी तरह से उस साम्राज्य की सम्पति लूट लेते थें। मानसिंह का सेनापति के रुप में युद्ध में अहम योगदान होता था इसके चलते लूटी हुई सम्पति पर उनको भी अधिकार दिया जाता था। मानसिंह से पहले उनके पिता राजा भगवानदास से संबंध थें उनके पिता ने गुजरात युद्ध में मुगल सेना के लिए अहम भूमिका निभाई थी।

राजा मानसिंह का जन्म 1540 एक राजपरिवार में हुआ था । मुगल राजा अकबर से दोस्ती के बाद भारत की हर रियासत में मानसिंह का रुतबा काफी बढ़ गया था। अकबर व महाराणा प्रताप के बीच लड़े गए हल्दीघाटी युद्ध में भी उनका अहम योगदान रहा था।
अकबर के साथ कई रियासतो पर कब्जा करने के बाद अकबर ने मानसिंह को भारत के बिहार, बंगाल व उड़ीसा का की सत्ता दे दी। मानसिंह ने इस दौरान भारत कई रियासतो पर हमला कर लूटा ।

अफगानिस्तान से लूटा खजाना

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मुगल सेना के सबसे बुद्धिमान व बलशाली सेनापती होने के चलते अकबर ने मानसिंह को काबुल भेजा। काबुल में मानसिंह को वहां पर लगातार सरदार लुटेरे का वहां की आवाम पर बढ़ रहें अत्याचारो से रक्षा करने के लिए भेजा गया। मानसिंह ने काबुल में लूटरो को खदेड़ते हुए उन्हें घुटने टेकने को मजबूर कर दिया। इस दौरान उन्होंने अकबर के 9 रत्नों में एक बीरबल के हत्यारें युसुफजई को मार गिराया। ऐसा कहा जाता है की अफगानिस्तान के पास मानसिंह को कई टन सोना मिला जिसे वो अकबर से छुपाकर जयगढ़ किले के गुप्त स्थान पर छिपा दिया।

जब सरकार की नजर में आया यह खजाना

अफगानिस्तान के सरदारों व भारत की अलग-अलग रियासतों से लुटे खजाने के बारें में एक अरबी भाषा में लिखी गई पुस्तक “ हफ्त तिलिस्मत-ए-अंमेरी ( आमेर में छुपे सात खजाने ) में जिक्र किया गया है। इसमें मानसिंह के खजाने के बारें में लिखते हुए बताया गया की जयपुर में स्थित आमेर किले में मानसिंह का इतना खजाना छिपा है कि जिससे कई रियासतें हजारो सालो तक पूरा नही कर सकती।

इस किताब में मानसिंह के द्वारा लूटा हुआ पूरा खजाना जयगढ़ किले के नीचें बनी 7 विशालकाय पानी कि टंकियों के नीचें यह खजाना छुपाया हुआ बताया गया था। जयगढ़ किले में खजाना छुपे होने की कई बार खबरे फैली मगर इस खजानें की चर्चा सबसे ज्यादा साल 1976 में हुई। तब जयपुर के राजघराने की रानी गायत्री देवी थी। जो उस वक्त भारत की प्रधानमंत्री इंदिया गांधी के बिलकुल खिलाफत में थी। गायत्री देवी ने कई बार अलग-अलग दलों से टिकट हासिल करते हुए कांग्रेस पार्टी के नेताओं का हराया था।

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इंदिरा गांधी व महारानी गायत्री देवी के इस झगड़े में इंदिरा गांधी ने साल 1975 में लगी इंमरजेसी में गायत्री देवी को जेल में डलवा दिया। तब केंद्र सरकार ने महारानी गायत्री देवी पर विदेशी मुद्रा कानून उल्लंघन के साथ कई अन्य आरोप दायर कर इंदिरा गांधी ने जयपुर में जयगढ़ किले में छुपी संम्पती को खोजने के लिए आयकर अधिकारियों की टीम जयगढ़ किले में भेजी।

जयगढ़ में लगातार 3 महीनों तक आयकर अधिकारियों ने सेना व पुलिस की मदद से इस किले खोज करती रही। इस बीच महारानी गायत्री देवी ने कहा की जयगढ़ में किसी तरह का खजाना नही छुपा हुआ सरकार बेवजह किले को ध्वस्त करने में लगी हुई।
लगातार कई महीनों की रिसर्च के बाद सरकार ने इस बात का दावा किया की जयगढ़ में किसी प्रकार का खजाना नही मिला।

सरकार ने नही बताया सच ?

3 महीने से सरकारी विभाग की जयगढ़ किले पर लगातार खोज के बाद अंत में सरकार की तरफ से बयान आया की किले में किसी प्रकार का खजाना नही मिला। लेकिन सरकार की इस बात पर लोगो को बिलकुल विश्वास नही हुआ। ऐसा माना जाता है कि जब आयकर विभाग ने जयगढ़ किले में खुदाई बंद की व इसकी आधारिक तौर पर घोषणा की तब इसके एक दिन पहले जयपुर-दिल्ली हाईवे को अचानक बिना किसी सुचना के आम वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई।

इस प्रतिक्रिया के बारे में कहां जाता है की सरकार ने इन 3 महीनों में जयगढ़ की खुदाई में मिले खजाने को ट्रकां में भरकर दिल्ली ले जाने का प्लान तैयार हुआ। चुकी सरकार पहले ही इस बात की घोषण कर चुकी थी की जयगढ में किसी प्रकार का खजाना नही मिली इसके लिए किसी को इस बात की खबर न लगे इसके लिए बिना बताएं कुछ समय के लिए जयपुर - दिल्ली हाइवे का आम लागो के लिए बंद कर दिया गया। तब से इस मामले को लेकर आज तक कांग्रेस इस मामले पर कुछ नही बोली है।

इस के बाद यह बातें भी सामने आई की जब 1977 में जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई तब जयगढ़ में मिले खजाने की कुछ राशी जयपुर राजघरानें को दी गई। मगर इस मामले पर खुले तौर पर बात सामने आती है की जयगढ़ में मिला पूरा खजाना देश में लगे आपातकाल में लग गया। लेकिन जयगढ़ में खजाना मिला या नही और मिला तो गया कहा आज तक इस बात से पर्दा नही उठ पाया है।

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