x

इतिहास जब मुगलों से नागा साधुओं ने बचाया जोधपुर को | Naga Sadhus War History In Hindi

By N.j / About :-2 years ago

नागा साधुओं जो अपनी एक अलग ही दुनिया में मस्त होते है । भगवान शंकर के सबसे बड़े भक्त को हम कुंभ के मेले में सबसे ज्यादा देखते है। नागा साधुओं के बारें में कई लोग मानते है की यह बस समाधी में लीन व नशों के आदी होते है इन्हें दुनिया में क्या हो रहा है इससे कोई मतलब नही होता है। लेकिन दोस्तो नागा साधुओं के प्रति यह विचार उनके  इतिहास से मेल नही खाते है शरीर पर भष्म और मालाओं से भरे नागा साधुओं का इतिहास योद्धाओं यानी कि युद्ध के मैदान से भी रहा है।

अगर दोस्तो आप भी ऐसा सोचते है कि नागा साधु बस नशे में चूर रहते है इनका कोई बड़ा इतिहास नही है। इन्होंने देश की आजादी के लिए कोई युद्ध नही लड़ा। तो बता दे कि “ नागा साधुओं के युद्ध ” में करीब 2000 नागा साधुओं ने भारत माता की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी। नागा साधुओं ने अपने बल से भारत मां के दुश्मनों को 4 कदम भी आगे नही बढ़ने दिया था।

नागा साधुओं के बारें में इतिहासकारों के अनुसार नागा साधुओं के एक हाथ में भक्ति की माला व दुसरे हाथ में दुश्मनों के सिर उड़ाने के लिए तलवार थी। नागा साधुओं को तब अपने धर्म व अपनी भारत मां की रक्षा करनी थी । यदि तब नागा साधु अपनी तलवार नही उठाता तो अफगानी शासक देश में  कत्लेआम मचा देते हिंदू मंदिरो को तोड़ दिया जाता। तब नागा साधुओं ने अपने धर्म व देश की रक्षा के लिए अफगानों के सामने कूद पड़े और अपनी एक जान के साथ कई अफगानियों के सिर धड़ से अलग कर दिए।

जब नागा साधुओं की जोधपुर रियासत की रक्षा

इतिहास के अनुसार जब काबुल और बलोचिस्तान से भारत की और आएं मुगलों ने जोधपुर में कदम रखा तब हर तरफ नंरसहार हो रहा था । हिंदू मंदिर थोड़े जा रहे थे । हिंदूओं पर अफगानो के अत्याचार बढ़ गए भारी कर वसूल कर उन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा। तब वो नागा साधु ही थें जिन्होंने अफगानो के इस कुशासन को खत्म करने की ठानी और उन्हें जोधपुर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।

अफगानी क्रूर शासक अहमदशाह अब्दाली का भारत पर हमला

अफगान के दुर्रानी साम्राज्य के सबसे क्रूर शासक अहमदशाह को लेकर कहा जाता है कि भारत पर अपना साम्राज्य विस्तार करने के लिए वो दिल्ली से मथुरा पर हमला करते हुए गोकुल की और कूच करने लगा। अहमदशाह ने ने गोकुल में प्रवेश करते ही कत्लेआम करना शुरु कर दिया महिलाओं को कैद कर उनके साथ बलात्कार होने लगे बच्चों को उठाकर बेचा जाने लगा। गोकुल में लगातार अहमदशाह की तानाशाही व अत्याचारों को देख गोकुल के नागों साधुओं ने अहमदशाह को गोकुल से भगाने की ठानी।

तब गोकुल की रक्षा के लिए 5000 नागा साधु अफगान शासक अहमदशाह के हजारे सैनिकों के बीच कूद गए। अफगानी सेना ने 5 हजार साधुओं को विशाल सेना के सामने छोटा समझने की भूल कर दी। लेकिन जब नागा साधुओं ने प्रहार किया तब अहमदशाह हिल गया। अहमदशाह को इस बात का अहसास हो गया था कि नागा साधु अपनी धरती व लोगो की रक्षा के लिए अब अपनी जान भी न्यौछावर कर सकते है। बता दे कि इस युद्ध में करीब 2000 नागा साधुओं ने अपनी जान का बलिदान दिया मगर इस दौरान खास बात यह रही की अफगानी सेना नागा साधुओं के पराक्रम के चलते गोकुल की तरफ 1 कदम भी आगे नही बढ़ पाई और महज 5 हजार नागा साधुओं ने बलशाली अफगानी सेना को वहां से भागने के लिए मजबूर कर दिया।

वो नागा साधुओं का ही बल था जिस वजह से अफगान शासक अहमदशाह अब्दाली के भारी सेना बल को गोकुल से पीछें हटना पड़ा था।

नागा साधुओं के पराक्रम का ही कारण है की गोकुल के युद्ध के बाद जब भी मुगल शासको को पता चलता की सामने नागा साधुओं से लड़ना तब वो अपनी सेना को पहले ही पीछें हटा लेते थें। जोधपुर व गोकुल के अलावा भी नागा साधुओं का देश भक्ति के लिए जान न्यौछावर करने का इतिहास है।

इतिहास जब मुगलों से नागा साधुओं ने बचाया जोधपुर को | Naga Sadhus War History In Hindi