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विश्व के महान चित्रकार नन्दलाल बोस का जीवन | Life Story of Nandalal Bose in Hindi

By rakesh / About :-2 years ago

नन्दलाल बोस की जीवनी | All About Biography of Nandalal Bose in Hindi

  • नाम                - नन्दलाल बोस
  • माता               - क्षेत्रमणि देवी
  • पिता               - पूर्णचंद्र बोस
  • पत्नी               - सुधीरादेवी
  • जन्म              - दिसंबर 1882 में बिहार के हवेली खडगपुर, जिला मुंगेर
  • मृत्यु               -16 अप्रैल 1966, कोलकाता

नन्द लाल बोस का प्रारंभिक जीवन - 

विश्व के महान चित्रकार नन्द लाल बोस का जन्म बिहार के हवेली खडगपुर, जिला मुंगेर में दिसंबर 1882 को हुआ था। इनके पिताजी का नाम पूर्ण चंद्र बोस आर्किटेक्ट था, वह महाराजा दरभंगा रियासत के प्रबंधक थे। नन्दलाल की मृत्यु कोलकाता में 16 अप्रैल 1966 को हों गयी थी। नन्दलालजी की पढाई कराने के लिए उनको बहुत से पाठशालय में नाम लिखाया गया लेकिन उनका शिक्षा में बिलकुल भी ध्यान नहीं जाता था, और वह हमेशा शिक्षा में विफल हो जाते थे। बाद में वह अपनी पढाई 1905 से 1910 के बीच कलकत्ता में अवनीन्द्रनाथ ठाकुर के 'गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ आर्ट' से कला की पढाई ग्रहण की। नन्दलालजी ने अध्यापन 'इंडियन स्कूल ऑफ़ ओरियंटल' से किया था। वह शान्तिनिकेतन स्कूल के प्रधानाध्यापक 1922 से 1951 तक रहे थे। नन्दलालजी का शौक बचपन से ही चित्रकला में था। उनको इसमें रूचि अपनी माता क्षेत्रमणि देवी को खिलौने बनाते देख कर आया था। बाद में नन्दलालजी को कला स्कूल में दाखिला कराया गया। इसी दौरान नन्दलालजी ने चित्रकला की विद्या नियमानुसार 5 सालों तक ग्रहण की। 

प्रथम गुरु कुम्भकार -

नन्दलालजी ने बिहार से प्राथमिक पढाई प्राप्त करने के पश्चात नन्दलालजी 15 वर्ष की उम्र में ही उच्चस्तर की पढाई करने के लिए वह बंगाल चले गए। जिस वक़्त वह बंगाल गए थे उस वक़्त बंगाल और बिहार भिन्न नहीं था। नन्दलालजी का पहला गुरु वहां के कुम्भकार थे। उसके पश्चात वह बंगाल के शिष्य बने और बाद में कला भवन के शांतिनिकेतन में अध्यक्ष बने। नन्दलालजी ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी बहुत भाग लिया । जवाहरलाल नेहरू के सबसे ज्यादा खास सुभाष चंद्र बोस व महात्मा गांधीजी थे। बिहार की मिट्टी से उनको काफी लगाव था। कला के संसार में नन्दलालजी को बहुत ज्यादा कामयाबी और अपने जीवन काल में इतने व्यस्त रहने के बाद भी वह बहुत बार अपनी जन्मभूमि को देखने आते रहते थे।

नन्दलाल बोस का विवाह -

1902 में नन्दलालजी ने परीक्षा पास कर ली थी और इसके पश्चात उन्होंने अपनी आगे की शिक्षा भी उसी महाविद्यालय में चालू रखी तथा उसके 1 वर्ष पश्चात 1903 में एक फैमिली दोस्त की पुत्री सुधीरादेवी के साथ नन्दलालजी की शादी हों गयी।

कला के प्रति प्रेम और पढ़ाई -

नन्दलालजी के दिल में हर वक़्त ही कला की शिक्षा प्राप्त करने की रूचि थी। परन्तु उसके लिए नन्दलालजी की फैमिली ने इसके लिए इज़ाज़त नहीं दी जाती थी। नन्दलालजी को और किसी दूसरी पढाई में मन न लगने की वजह से बार - बार वह क्लास में फ़ैल हों जाते थे। और उन्होंने बार - बार फ़ैल होने की वजह से वह स्कूल बदलते रहते थे।

1905 में कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में नन्दलालजी ने वाणिज्य की शिक्षा के लिए भर्ती कराया। परन्तु वह फिर से नाकामयाब होने की वजह से बाद में उन्होंने अपनी फैमिली को कला की शिक्षा के लिए राजी कर ही लिया।

उसके पश्चात नन्दलालजी ने कलकत्ता के स्कूल ऑफ़ आर्ट्स में प्रवेश ले ही लिया, तथा कला के साथ मन लगाके पांच वर्षों तक चित्रकला की नियमानुसार पढाई ग्रहण कर ली, कला की पढाई उन्होंने 1905 से लेकर 1910 तक अबनीन्द्रनाथ टैगोर से कलकत्ता गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ आर्ट में कर ली।

नन्दलाल बोस का करियर -

नन्दलालजी ने तत्कालीन आंदोलनों के विभिन्न स्वरूपों, सीमाओं और शैलियों को अपनी चित्रकारी के माध्यम से उकेरा। नन्दलालजी की चित्रकारी में एक आकर्षक कला थी। जो सभी कला के चाहने वालो को अपनी और खींच लेता था। नन्दलालजी की चित्रकारी को एशिया के साथ-साथ पश्चिम में भी बहुत प्रशंसा मिली हैं। 

नंदलालजी ने राष्ट्रिय पुरस्कारों जैसे भारत रत्न और पद्म श्री के चिह्न भी बनाये।

एक युवा कलाकार के तौर पर नंदलालजी अजंता के भित्ति चित्रों से बहुत आकर्षक हुए थे। वह कलाकारों और लेखकों के उस अंतर्राष्ट्रीय समूह का भाग बन गए जो "पारंपरिक भारतीय संस्कृति" को दुबारा से जीवत करना चाहते थे। इस संग्रह में शामिल थे योकोयामा तैकान, विलियम रोथेन्स्तीं, लौरेंस बिन्यों, ओकाकुरा ककुजो, अबनीन्द्रनाथ टैगोर, क्रिषतीअना हेर्रिन्ग्हम, जैकब एपस्टीन और एरिक गिल।

नन्दलालजी की प्रतिभा और मौलिक शैली को ओ.सी. गांगुली, गगनेन्द्रनाथ टैगोर, और आनंद कुमारस्वामी जैसे प्रसिद्ध कलाकारों और कला समीक्षकों ने माना।


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