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महाभारत के ये 5 हथियार जो परमाणु बम पर भी पड़ते है भारी |Mahabharata Top 5 Dangerous Weapons In Hindi

महाभारत के ये 5 हथियार जो परमाणु बम पर भी पड़ते है भारी |Mahabharata Top 5 Dangerous Weapons In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-1 month ago
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नमस्कार दोस्तों महाभारत के उस महान युद्ध के बारे में आप सब जानते है इस युद्ध में कई वीरों ने अपने वचनों पर कायम रहते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे दोस्तों आपने अब तक कई तकनीकी हथियारों के बारे में जाना होगा जो कुछ क्षण में एक बड़े क्षेत्र में तबाही मचा देते है लेकिन दोस्तों महाभारत के युद्ध में इनसे भी घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था जिन्हें आज भी हमारे कई महान साइंटिस्ट बनाने में असफल रहे है और ऐसा भी हो सकता है की हम इन हथियारों को बनाने में कामयाब भी ना हो महाभारत के युद्ध में ऐसे हथियार  थे जो एक बार तीर से चलने के बाद दुश्मन को चित कर देते थे और वापस भी लोट आते थे दोस्तों महाभारत के युद्ध को आज भी कई लोगो को विश्वास नहीं है लेकिन दोस्तों इस युद्ध के होने के ऐसे पुख्ता सबूत मिले जिसे ये साबित होता है की महाभारत का युद्ध लड़ा गया था तो चलिए दोस्तों आज हम इस लेख में जानते महाभारत के उस भयंकर युद्ध में इस्तेमाल किये गए उन खतरनाक हथियारों के बारे में

1. सुदर्शन चक्र - Sudarshan Chakra

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सुदर्शन चक्र महाभारत के युद्ध में सबसे घातक हथियार था जो एक बार चलने के बाद विपक्षी योद्धा के प्राण ही लेता था इसके बाद वापस छोड़े गए स्थान पर लोट आता था दोस्तों महाभारत युद्ध में उपयोग में लिए गए इस हथियार को ब्रह्मांड का सबसे घातक हथियार माना जाता है जो हिन्दू धर्म के भगवान विष्णु के हाथ की तर्जनी अंगुली में स्थित होता है शास्त्रों के अनुसार बताया जाता है की सुदर्शन चक्र का निर्माण भगवान विष्णु ने खुद किया था और सुदर्शन चक्र को हासिल करने के लिए हजारो सालो तक भगवान विष्णु ने कठोर तपस्या की थी और उनकी इस भक्ति से खुश होकर भगवान शिव ने उन्हें भक्ति के बदले कुछ मांगने को कहा तब उन्होंने शिव को कहा की उन्हें एक ऐसा शस्त्र चाहिए जो ब्रमांड के किसी भी राक्षस को मार सकें तब भगवान शिव ने उन्हें सुदर्शन चक्र चक्र दिया एक अन्य शास्त्र के अनुसार भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र परशुराम से मिला था

2. ब्रह्मास्त्र - Brahmastra

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ब्रह्मास्त्र ये महाभारत में काल में प्रयोग लिए जाने वाला वो हथियार है जिसे शास्त्रों और पुराणों में सबसे खतरनाक हथियार माना गया है  इस हथियार की रचना खुद भगवान ब्रह्मा जी ने की थी दोस्तों ब्रह्मास्त्र एक तरह का परमाणु हथियार था इसे देवी हथियार का नाम भी दिया गया था दोस्तों इस हथियार की खास बात थी की ये एक अचूक हथियार था जो एक बार चलने के बाद दुश्मन का विनाश ही करता था जो भी योद्धा इस हथियार को चलाता था वो इसे वापस भी लाने की की विधि जानते थे लेकिन दोस्तों अश्वथामा जिन्हें इस शस्त्र को वापस लेना का तरीका नहीं पता था इस वजह से महाभारत के युद्ध में इस शस्त्र चारो तरह विनाश कर दिया ब्रह्मास्त्र महाभारत और रामायण काल के कुछ गिने चुने योद्धाओं के पास ही था इस शस्त्र के बारे में महर्षि वेदव्यास ने बताया की जिस जगह इस शस्त्र को छोड़ा जाता है उस क्षेत्र में 12 साल तक कोई जीव जंतु पैदा नहीं होता प्राचीन भारत में इस शस्त्र के प्रयोग में लेने के प्रमाण मिले है रामायण में जब मेघनाथ से लड़ते समय लक्षमण ने ब्रह्मास्त्र चलाने के लिए बाहर निकला था लेकिन भगवान श्री राम ने उन्हें ऐसा करने से रोका और कहा की इसके चलने से सम्पूर्ण लंका नष्ट हो जाएगी

3. त्रिशूल - Trident

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दोस्तों त्रिशूल जिसकी हिन्दू धर्म में एक अलग मान्यता है हिन्दू धर्म में त्रिशूल एक आस्था का प्रतीक है जिसे भगवान शिव का माना जाता है धर्म के सभी शास्त्रों में बताया गया है की भगवान शिव हमेशा त्रिशूल को अपने साथ रखते है और इस हथियार का इस्तेमाल महाभारत और रामायण दोनों की कालो में किया गया था दोस्तों इसी हथियार से एक बार भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया था त्रिशूल दिखने में भाले जैसा है लेकिन दोनों और इसके साथ नकुले चाकू जुड़े होते है आपने देखा भी होगा जहां भी भगवान शिव का मंदिर होता है वहां त्रिशूल जरूर होता है

4. वज्र - Vajra

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दोस्तों हम सभी इस बात से वाकिफ है की महाभारत के युद्ध में पांडव और कौरव दोनों काफी शक्तिशाली थे महाभारत के युद्ध में करण अर्जुन को मारने के लिए वज्र का इस्तेमाल करना चाहते थे इसमें सफल होने के लिए करण ने एक चक्रव्यू की रचना की जिसमें अर्जुन को फसा कर मार सकें लेकिन करण के उस चक्र में अर्जुन के बजाय उनका पुत्र अभिमन्यु फस जाता है और इस चक्र में उनके प्राण चले जाते है जब अभिमन्यु का पांडव अंतिम संस्कार कर रहे थे तब भगवान श्री कृष्ण को पता चला की कौरव रात के समय पांडवो पर हमला कर उन्हें मारने का प्लान बना रहे है तब भगवान श्री कृष्ण तुरंत भीम से मिलते है और उन्हें अपने बेटे घटोत्कच को बुलाने के लिए कहते है क्योकि रात के समय राक्षसों की ताकत और अधिक हो जाती है जब कौरव रात के समय पांडवो पर हमला करने लिए आते है तब घटोत्कच  उन पर टूट पड़ता है और उन्हें वहां से पछाड़ देता है और जब दुर्योधन को यह बात पता लगती है तब वो  घटोत्कच  पर वज्र हथियार का इस्तेमाल करता है

5. नारायण अस्त्र - Narayan weapon

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दोस्तों नारायण अस्त्र भी भगवान विष्णु का एक अस्त्र था यह अस्त्र भी  ब्रह्मास्त्र की तरह काफी खतरनाक था और एक बार इसके चलने के बाद दुनिया का दूसरा कोई सा भी शस्त्र इसके सामने नहीं टिक पाता था और शत्रु के लिए इससे बचने का एक ही तरीका था अपने हथियार छोड़ कर उसके सामने नम्रता से प्राथना करे और इसके सामने अपना सिर झुका ले तब इस शस्त्र से बचा जा सकता था महाभारत काल में अश्वथामा ने भीम पर अत्याधिक क्रोधित होने के करण उन्होंने भीम पर नारायण अस्त्र चला दिया था नारायण अस्त्र काफी शक्तिशाली था एक बार तरकस से छूटने के बाद ये चारो और आग के गोले बरसाने शुरू कर देता था इस वजह से अश्वथामा के द्वारा छोड़े गए इस शस्त्र में में काफी सेनिको को आग की चपेट में ले लिया साथ ही आगे अपने केंद्र भीम की और आगे बढ़ने लगा लेकिन दोस्तों भीम भी एक बलशाली योद्धा थे उन्होंने भी हार नहीं मानी और इस शस्त्र का मुकाबला करने के लिए आगे बढ़ गए जब ये सब भगवान कृष्ण ने देखा की भीम इस अस्त्र का मुकाबला नहीं कर पाएंगे तब कृष्ण तुरंत अर्जुन का रथ छोड़ भीम के पास गए और उनके सभी हथियार उनसे छिन लिए और जब भीम बिना हथियार के थे तब नारायण अस्त्र रुक गया दोस्तों नारायण अस्त्र की खास बात ये थी की इसे केवल एक बार ही उपयोग में लिया जा सकता था

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