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जाने मेवाड़ का गौरवमयी इतिहास | Mewar History in hindi

जाने मेवाड़ का गौरवमयी इतिहास | Mewar History in hindi

In : Viral Stories By storytimes About :-1 year ago
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मेवाड़ के राजाओ की कहानी

राजस्थान के दक्षिण - पश्चिम (west) भाग पर गुहिलों का शासन था। "नैणसी री ख्यात" में गुहिलों की 24 शाखाओं का वर्णन मिलता है जिनमें मेवाड़, बागड़ और प्रताप शाखा ज्यादा प्रसिद्ध हुई। इन तीनो शाखाओं में मेवाड़ शाखा (branch) अधिक महत्वपूर्ण थी। मेवाड़ के प्राचीन नाम शिवि,प्राग्वाट व मेदपाट रहे हैं । एक ही स्थान पर सबसे अधिक समय तक राज करने का श्रेय सिर्फ मेवाड़ (mewar) राजवंश को है ।

गुहिल - 566 ई०

History Of Mewar in hindi via : patrika.com

गुहिल राजवंश की स्थापना गुहिल ने 566 ई० में की। गुहिल के वंशज नागादित्य को 727 ई० में भीलों ने मार डाला था।

रावल बप्पा (काल भोज) - 734 ई०    

History Of Mewar in hindi via : udaipurpost.com

रावल राजवंश का संस्थापक नागादित्य के पुत्र कालभोज ने 727 ई० में गुहिल राजवंश की कमान संभाली। बप्पा रावल उसकी उपाधि थी। इसकी तीन उपाधि और है हिन्दू सूर्य, राज गुरु, चकवे |

सामंत सिंह  1172 – 1179 ई०

History Of Mewar in hindi via : blogspot.com

क्षेम सिंह के दो पुत्र (son) सामंत और कुमार सिंह थे। ज्येष्ठ पुत्र सामंत मेवाड (mewar) की गद्दी पर सात वर्ष रहे क्योंकि जालौर के कीतू चौहान ने मेवाड पर अधिकार कर लिया था।  

समर सिंह 1273 – 1301 ई०

History Of Mewar in hindi via : blogspot.com

समर सिंह का एक पुत्र रतन सिंह मेवाड राज्य का उत्तराधिकारी हुआ और दूसरा पुत्र कुम्भकरण नेपाल चला गया। नेपाल के राज वंश के शासक कुम्भकरण के ही वंशज हैं।

रतन सिंह   1301-1303 ई०

History Of Mewar in hindi via : ytimg.com

इनके कार्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौडगढ पर अधिकार कर लिया। प्रथम जौहर पदमिनी रानी ने सैकडों महिलाओं के साथ किया। गोरा – बादल का प्रतिरोध और युद्ध भी प्रसिद्ध रहा।

महाराणा लाखासिंह 1382 – 1421 ई०

History Of Mewar in hindi via : wikimedia.org

महाराणा लाखासिंह योग्य शासक थे तथा राज्य के विस्तार में अपना अहम योगदान दिया। इनके पक्ष में ज्येष्ठ पुत्र चुडा ने विवाह न करने की भीष्म प्रतिज्ञा की और पिता से हुई संतान मोकल को राज्य का उत्तराधिकारी मानकर जीवन भर उसकी रक्षा की।

महाराणा कुम्भा  1433 – 1469 ई०

History Of Mewar in hindi via : blogspot.com

इन्होने न केवल अपने राज्य (state) का विस्तार किया बल्कि योग्य प्रशासक, सहिष्णु, किलों और मन्दिरों (temples) के निर्माण के रूप में ही जाने जाते हैं। कुम्भलगढ़ इन्ही की देन है.

महाराणा प्रताप 

  • महाराणा प्रताप उपनाम- प्रताप सिंह
  • प्रताप शासन काल- 1568-1597
  • जन्म-  9 मई 1540
  • प्रताप  जन्मस्थान- कुम्भलगढ़ दुर्ग राजस्थान, भारत

महाराणा प्रताप सिंह जिनका पूरा नाम महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया था भारत माता के ऐसे सपूत थे जिनके नाम का लोहासमकालीन मुग़ल शासकों के अलावा पूरी दुनिया आज भी मानती है भारत माता के इस महान सपूत का जन्म ज्येष्ठ शुक्ल तृतीयरविवार विक्रम सम्वत 1597 अर्थात 9 मई 1540 को तत्कालीन उत्तर पश्चिमी राज्य (वर्तमान के राजस्थान ) के मेवाड़ प्रान्त स्तिथकुम्भल गढ़ के किले में हुआ था| इनके पिता उदय सिंह और माता राणी जयवंत कवर थीं| महाराणा प्रताप सिंह उदयपुर, मेवाड़ मेंसिसोदिया राजवंश के राजा थे| इतिहास की गाथाएँ महाराणा प्रताप सिंह के नाम को असीम वीरता, उनके अदम्य साहस, उनकेशौर्य, उनके बलिदान और उनके दृढ़ प्रणों की रोचक व अविस्मरणीय कथाओं से भरी पड़ी है|