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मुहम्मद बिन तुगलक की जीवनी | Muhammad Bin Tughluq Biography In Hindi

मुहम्मद बिन तुगलक की जीवनी | Muhammad Bin Tughluq Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-1 year ago
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मोहम्मद बिन तुगलक की जीवनी एवं शासन नीतियां | Muhammad Tughluq Biography In Hindi

  • पूरा नाम- मुहम्मद बिन तुगलक
  • जन्म-  1300, मुल्तान, पाकिस्तान
  • पिता का नाम-  गियाथ अल-दीन तुघलक
  • साशन - दिल्ली के सुल्तान  1325–20 मार्च  1351 
  • मृत्यु-  20 मार्च 1351, थट्टा, पाकिस्तान
  • धर्म- इस्लाम 

मुहम्मद बिन तुगलक 1325 से 1351 तक दिल्ली पर राज करने वाला सुल्तान था ।  तुगलक वंश का मशहूर शासक मुहम्मद बिनतुगलक गयासुद्दीन तुगलक का सबसे बड़ा पुत्र था,जिसका असली नाम उलुगखान था। दिल्ली सल्तनत के मध्य काल मे शासन करने वाले सभी सुल्तानों में मुहम्मद बिन तुग़लक ही सबसे अधिक शिक्षित और विद्यावान था। किंतु अपने आकस्मिक , अघोषित और सनकी योजनाओ के कारण तथा सामान्य जनता के सुख के प्रति ध्यान न देने के कारण इसे पागल एवं स्वप्नशील कहा जाता था।

मुहम्मद बिन तुगलक की शासन नीति

 

Muhammad Tughluq Biography

कुछ ऐतिहासिक विवरणों में इसे रक्तपिपासु भी कहा गया है।मुहम्मद तुगलक के काल मे भारतीय और अफगान अमीरो के दरबार में प्रवेश के अतिरिक्त अमीर वर्ग में बहुत विषमता आ गयी। इस कारण इसमें काफी संख्या में विदेशी तत्व , विशेषकर खुरासानी, सम्मिल्लित किये गए जिन्हें सुल्तान “प्रिय” कहा जाता था। मुहम्मद तुगलक ने बहुत से अमीरो को सदह  ( एक सौ के नायक ) के रूप में नियुक्त किया किन्तु कुछ इतिहासकरो, जैसे कि बर्नीने सुल्तान के द्वारा निम्न कुल में जन्मे व्यक्तियों को दरबार में उच्च पद पर नियुक्त करने के लिए खेद व्यक्त किया है। उदाहरणके लिए पीरा जो किए कमालि था उसे दीवाने विजारत का पद दिया गया। इतिहासकरो जैसे फरिश्ता, बर्नी, सर हिंदी एवं बदायुनी ने सुल्तान मुहम्मद बिनतुगलक को अधर्मी माना है। यह मुहम्मद तुगलक ही था जिसने दिल्ली से हटाकर अपनी राजधानी देवगीरी में बनाई। देवगिरि का यह नाम सुल्तान मुहम्मद बिनतुगलक ने बदल कर दौलत बादर खदिया था। सुल्तान के इस कार्य की बाह्य आलोचना की गयी किन्तु राजधानी परिवर्तन करने की यह योजनापूर्णतःअसफलसिद्ध हुई। इस असफलता के कारण 1335 ई० में दौलतबाद से वापस दिल्ली की ओर कूच किया गया। यह मुहम्मद बिनतुगलक का दक्षिण में किये गए राजधानी परिवर्तन का ही असर था जिसने दक्षिण में मुस्लिम संस्कृति को फैलाने का कार्य किया।

जीवन वृत्त एवं उपलब्धियां

Muhammad Tughluq Biography

मुहम्मद बिन तुगलक को प्राशासन और कृषि के क्षेत्र में  किए गए व्यापक परिवर्तनों एवं प्रयोगों के लिए माना  जाता है। वह अत्यधिक शिक्षित तथा अरबी और फारसी भाषा में निपुण था । इसके साथ साथ धर्म, दर्शन, गणित, तर्क, ज्योतिष और चिकित्सा जैसे विषयों में भी उसे उच्च ज्ञान प्राप्त था । वह इस बात का पूरा ध्यान देता था की जनता में नैतिक मूल्यों का पतन  न होने पाये । इसके लिए वह कभी भी सामाजीक जीवन में मदिरा का उपयोग नहीं करता था। उच्च शिक्षा और ज्ञान होने के बावजूद सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक अपने जल्दबाज़ी और कभी कभी  सनक में लिए गए निर्णयों के कारण बदनाम था। मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने पिता गियासुद्दीन तुगलक की मृत्यु के तीन दिनों बाद राज्यपाद ग्रहण कर लिया था। किन्तु उसके पिता की मृत्यु के पीछे मुहम्मद बिन तुगलक के ही हाथ होने का अंदेशा जताया जाता है।

कृषि विकास के लिए मोहम्मद बिन तुगलक ने कई निर्णय लिए।  उसने एक अलग से कृषि विभाग की स्थापना की जिसे दीवान-ए-कोही के नाम से जान जाता है। इस विभाग का प्रमुख कार्य उन  भूमियों की पहचान करना था जिस पर कृषि कार्य नहीं होता था । इसके पश्चात उसे कृषि योग्य भूमि में परिवर्तित करने का कार्य किया जाता था। किसानों को सभी प्रकार के बीज और कृषि उपकरणों को मुहैया कराया जाता था। मुहम्मद बिन तुगलक के द्वारा लागू की गयी प्रतिकात्मक मुद्रा का एक परिणाम यह हुआ की शीघ्र ही बाजार में नकली मुद्रा का प्रचलन हो गया।  सरकारी खजाने में प्रतिकात्मक मुद्रा जो की तांबे और कांसे की थी, काफी मात्र में आने लगी। लोगों ने सोना और चाँदी जमा करके गुप्त रूप से अपने घरों मे रख लिया था। इस कारण नयी मुद्रा का अवमूल्यन होने लगा। यदि मोहम्मद बिन तुगलक ने राज्य में बनने वाली नकली मुद्रा पर रोक लगा दी होती तो वह प्रतीक मुद्रा के प्रचालन में सफल हो गया होता। इस असफलता के बाद सुल्तान ने उस प्रतिकात्मक मुद्रा को वापस ले लिया था। उसकी असफलताओं में खुरासान का उल्लेख करना आवश्यक है।  एक महान विजेता बनने के स्वप्न में मुहम्मद बिन तुगलक ने खुरासान को जीतने की योजना बनाई।  खुरासान उस वक़्त इराक के शासक के नियंत्रण में था। अपनी योजना को पूरा करने के लिए मोहम्मद बिन तुगलक ने एक लाख सैनिकों की नियुक्ति की। इन सैनिकों को एक वर्ष का अग्रिम वेतन भी दे दिया गया था। इस योजना को पूरा करने के लिया सुल्तान ने लगभग तीन लाख रुपए खर्च किए , किन्तु खुरासान को जीतने की इच्छा को मुहम्मद बिन तुगलक को छोडना पड़ा। फारस के शासक ने  मुहम्मद बिन तुगलक को इस अभियान में सहायता देने से मना कर दिया था। परिणाम स्वरूप न केवल भारी आर्थिक हानि हुई बल्कि एक योद्धा के रूप में उसकी प्रतिष्ठा भी खत्म हो गयी।

मुहम्मद बिन तुगलक का अंतिम समय  

Muhammad Tughluq Biography

मुहम्मद बिन तुगलक को न केवल खुरासान योजना में बल्कि कराजल , जो की भारत और चाइना के बीच में एक हिन्दू साम्राज्य था, को विजित करने के प्रयास में भी असफलता मिली। इस अभियान में उसकी सेना का पूर्ण नाश हो गया था। मुहम्मद बिन तुगलक के द्वारा किए गए असफल प्रयोगों के कारण उसके प्रति जनता में काफी असंतोष हो गया था। उसके खिलाफ विद्रोह की भावना भी बढ्ने लगी थी। यही कारण था की एक के बाद एक क्षेत्रीय शासक अपने आप को दिल्ली सुल्तान से स्वतंत्र घोषित करने लगे। मुहम्मद बिन तुगलक काफी संख्या में होने वाले विद्रोहों को रोकने में असफल रहा। इसी अनिश्चितता के बीच 1351 ई0 में मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु हो गयी । सुल्तान का कोई भी उत्तराधिकारी पुत्र नहीं था, जिसके कारण फिरोज शाह तुगलक जो उसका चचेरा भाई था , दिल्ली का सुल्तान बना।

मुहम्मद बिन तुगलक के बारे में इतिहासकारों बरनी और इब्न बतुता ने एक दूसरे से विरोधी विचार प्रकट किए हैं। किन्तु एक बात पर सभी इतिहासकार सहमत हैं कि सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक उच्च कोटी का विद्वान और अत्यधिक शिक्षित व्यक्ति था। किन्तु एक शासक के रूप में वह असफल रहा। दोआब के क्षेत्र में बढ़ाए गए कर के कारण भी उसकी काफी आलोचना हुई। राजधानी के स्थानांतरण में भी मुहम्मद बिन तुगलक यदि केवल अपने दरबार और अधिकारियों के साथ दौलताबाद गया होता तो शायद उसका यह कार्य असफल नहीं होता। किन्तु दिल्ली की पूरी जनता के साथ कूच करना उसकी गलती थी।