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हौसले की कहानी एक पैर से चढ़ गए हजारो फिट ऊंची चोटी | Neeraj George Baby Story In Hindi

By N.j / About :-7 years ago

“ किस्मत मौका देती है पर मेहनत चौंका देती है”

इस पक्ति को किसी ने सच व सही साबित कर दिखाया है तो उस शख्सियत का नाम है नीरज जॉर्ज बेबी । नीरज वो शख्सियत है जिनके हौंसले इतने मजबूत थे की उसके आगे अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी की ऊंचाई भी छोटी पड़ गई। महज 9 साल की छोटी सी उम्र में ट्यूमर होने के चलते एक पैर न होते हुए भी नीरज ने हिम्मत नही हारी और बैसाखियो के सहारे तंजानिया के माउंट किलिमंजारो पर फतह हासिल कर ली। बता दे की दोस्तो यह  पहाड़ी समुद्र तल से 19,341 फीट की उंचाई पर है। जब सोशल मीडिया पर लोगो ने वादियों से घिरी इस पहाड़ी पर अपने दोनो हाथों में बैसाखिया लेकर फैलाते हुए इस तस्वीर को देखा तब सभी नीरज के इस हौसले की दाद देने लगे। तो चलिए दोस्तो अपनी विकलांगता को मात दे कर हजारो फीट की पहाड़ी का सफर तय करने वाले नीरज के इस सफर को शुरुआत से जानते है।

5 साल पहले का ख्याब किया पूरा

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नीरज ने बीते गुरुवार के अपने फेसबुक अकाउंट से अपनी एक तस्वीर शेयर की। फोटो में नीरज अफ्रीका की “माउंट किलिमंजारो ” पहाड़ी की चोटी पर अपनी दोनो बैसाखियों को हवा में लहराते हुए अपने एक पैर पर खड़े थें साथ ही फोटो के निचे लिखा की यह मेरा जीवन का सबसे यादगार पल है जिसे पुरा आज पुरे 5 साल बाद दर्द के साथ मेने हासिल किया। नीरज ने आगे लिखते हुए बताया की यह दर्द उन्होंने इस लिए सहा की वो इस बात को साबित कर सकें कि कोई व्यक्ति प्रोस्थेटिक लिम्बस ( कृत्रिम अंग) के बिना सहायता के भी किसी भी मंजिल को हासिल कर सकता है।

हर हालातों से लड़ पाई मंजिल

नीरज ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पहाड़ी पर अपनी दोनो हाथ फैलाते हुए तस्वीर के अलावा इस सफर से जुड़े कुछ स्केच भी 8 अक्टूबर को शेयर किए जो बताते है की इस सफर में नीरज ने इस मजिंल को हासिल करने के लिए किन-किन मुश्किलों का सामना किया। फोटो के साथ नीरज ने लिखा की बारिश शुरु हो चुकी है लग नही रहा की यह बारिश 2 दिनों तक रुकेगी। लेकिन हम इस बारिश के आगे हार नही मानने वाले है हम आगे बढ़गे।

9 साल की उम्र में गंवाया पैर

आज हजारो फीट पहाड़ की ऊंचाई के सफर को तय कर लोगे के बीच प्रेरणा बने नीरज जब 9 साल के थे तब ट्यूमर के चलते उनको अपना एक पैर गंवाना पड़ा था। नीरज ने अपनी इस कमजोरी को कभी खुद पर हावी नही होने दिया और खेल कूद में भाग लेने लगे। उन्होंने बैडमिंटन खेलने की शुरुआत की। बता दे की नीरज की वो लगन ही थी जिस वजह से वो पैरा-बैडमिंटन नेशनल व इंटरनेशनल लेवल तक खेले। इन प्रतियोगिता वो मेडल विनर भी रहे। ।

दोस्तो नीरज जॉर्ज बेबी की कहानी हम सभी को इस बात की प्रेरणा मिलती है की जीवन में आई मुश्किलों से जीवन में निराश न होकर उनसे मुकाबला करें सफलता एक दिन आपके कदमां में होगी।

हौसले की कहानी एक पैर से चढ़ गए हजारो फिट ऊंची चोटी | Neeraj George Baby Story In Hindi