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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का जीवन | All About Life History of Rani Laxmi Bai

By rakesh / About :-7 years ago

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का जीवन परिचय | All About Life History of Rani Laxmi Bai

लक्ष्मीबाई उर्फ़ झाँसी की रानी मराठा शासित राज्य झाँसी की रानी थी। जो उत्तर-मध्य(North Central) भारत में स्थित है। रानी लक्ष्मीबाई 1857 के पहली भारतीय स्वतंत्रता राज-तंत्र की योद्धा थी जिन्होंने कम उम्र में ही ब्रिटिश राज-तंत्र पर युद्ध किया था।

लक्ष्मीबाई का जीवन परिचय

पूरा नाम  – राणी लक्ष्मीबाई गंगाधरराव

जन्म       – 19 नवम्बर, 1828

जन्मस्थान – वाराणसी

पिता      – श्री. मोरोपन्त

माता      – भागीरथी

शिक्षा     – मल्लविद्या, घुसडवारी और शत्रविद्याए सीखी

विवाह    – राजा गंगाधरराव के साथ

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लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी जिले के भदैनी नामक शहर में हुआ था l लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम 'Manikarnika' था l लेकिन बाद में प्यार से लक्ष्मीबाई को मनु कहा जाता था l मनु की माता का नाम भागीरथीबाई था और पिता का नाम मोरोपंत तांबे था l लक्ष्मीबाई जब सिर्फ चार साल की थी तब लक्ष्मीबाई माता की मौत(death) हो गयी थी l

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मोरोपंत एक मराठी थे और मराठा बाजीराव की सेवा में थे l मनु के माता की मौत(death) के बाद घर में लक्ष्मीबाई की देखरेख के लिये कोई भी नही था l इसलिये लक्ष्मीबाई के पिता उसे अपने साथ पेशवा के दरबार में ले गये l जहा पर चंचल एवं सुन्दर लक्ष्मीबाई ने सभी का दिल जीत लिया था l लक्ष्मीबाई ने बचपन में ही अपनी प्राथमिक(Primary) शिक्षा घर से ही पूरी की थी और साथ ही लक्ष्मीबाई ने बचपन में शस्त्रों की शिक्षा भी प्राप्त की थी l

8 साल की उम्र में मनु का विवाह झाँसी के मराठा शासित महाराजा गंगाधर राव नेवालकर के साथ हुआ और वह झाँसी की रानी बनी l विवाह के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई रखा गया l

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1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम दामोदर राव रखा गया था लेकिन चार महीने की आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी। बाद में महाराजा ने एक पुत्र को गोद ले लिया। जो महाराजा गंगाधर राव के ही भाई का बेटा था। पुत्र गोद लेने के बाद 21 नवम्बर 1853 को राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो गयी। बाद में उस गोद लिए हुए बेटे का नाम बदलकर (महाराजा की मृत्यु से पहले) दामोदर राव रखा गया था।

परन्तु ब्रिटिश राज को यह मंजूर नही था इसलिए उन्होंने दामोदर के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। उस मुक़दमे में दोनों ही तरफ से बहुत बहस हुई परन्तु बाद में इसे ख़ारिज कर दिया गया।

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कंपनी शासन उनका राज्य(state) हड़प लेना चाहता था l रानी लक्ष्मीबाई ने जितने दिन भी शासनसूत्र संभाला(Handled) वो अत्याधिक सुझबुझ के साथ प्रजा के लिए कल्याण कार्य करती रही l इसलिए वो अपनी प्रजा की स्नेहभाजन बन गई थी l तत्पश्चात ब्रिटिश अधिकारियो ने राज्य का खजाना(Treasure) हड़प लिया और उनके पति के क़र्ज़ को रानी के सालाना खर्च में से काटने का फरमान जारी कर दिया गया l इसके परिणामस्वरूप(resulting) रानी को झाँसी का किला छोड़ कर झाँसी के रानीमहल में जाना पड़ा l

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मार्च 1854 को रानी लक्ष्मीबाई को झाँसी का किला छोड़ते समय 60000 रुपये और सालाना 5000 रुपये दिए जाने का आदेश दिया l परन्तु रानी लक्ष्मीबाई ने हिम्मत नही हरी और उन्होंने हर हाल में झाँसी राज्य की रक्षा करने का निश्चय किया l ब्रिटिश अधिकारी(British officers) अधिकतर उन्हें झाँसी की रानी कहकर ही बुलाते थे l

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घुड़सवारी करने में रानी लक्ष्मीबाई बचपन से ही निपुण थी l उनके पास बहोत से जाबाज़ घोड़े भी थे जिनमे उनके पसंदीदा सारंगी, पवन और बादल भी शामिल है l जिसमे परम्पराओ और इतिहास के अनुसार 1858 के समय किले से भागते समय बादल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी l बाद में रानी महल, जिसमे रानी लक्ष्मीबाई रहती थी वह एक म्यूजियम में बदल गया था l जिसमे 9 से 12 वी शताब्दी की पुरानी पुरातात्विक चीजो का समावेश किया गया है l

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उनकी जीवनी के अनुसार ऐसा दावा किया गया था की 'Damodar Rao' उनकी सेना में से ही एक था l और उसीने ग्वालियर का युद्ध लड़ा था l ग्वालियर के युद्ध में वह अपने सभी सैनिको के साथ वीरता से लड़ा था l जिसमे तात्या टोपे और रानी की संयुक्त सेनाओ ने 'Gwalior' के विद्रोही सैनिको की मदद से ग्वालियर के एक किले पर कब्ज़ा कर लिया l

17 जुन 1858 को ग्वालियर के पास कोटा की सराय में ब्रिटिश सेना से लड़ते-लड़ते रानी लक्ष्मीबाई ने वीरगति प्राप्त की l

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भारतीय वसुंधरा को गौरवान्वित करने वाली झाँसी की रानी एक आदर्श साहसी थी l सच्चा वीर कभी आपत्तियों(Objections) से नही घबराता l उसका लक्ष्य हमेशा उदार और उच्च होता है l वह सदैव आत्मविश्वासी, स्वाभिमानी और धर्मनिष्ट होता है l और ऐसी ही साहसी(daring)झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई थी l

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का जीवन | All About Life History of Rani Laxmi Bai