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पहले रॉ प्रमुख रामेश्वर नाथ काव शातिर दिमाग के लिए थे फेमस | Raw Agent Rameshwar Nath kao In Hindi

By N.j / About :-2 years ago

आज जब भी भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ की बात होती है तब रविद्र कौशिक समेत आज भारत के रक्षा विशेषज्ञ के पदभार को संभाल रहें अजित डोभाल से जुड़े किस्से हम सब ने पढ़े है। आज जब भी रॉ की बात होती है तब भारतीय रॉ एजेंसी का सबसे सफल एजेंट अजित डोभाल को माना जाता है। लेकिन दोस्तो आपकी इस अधुरी जानकारी के लिए बता दे कि एक नाम था “ रामेश्वर नाथ काव ” जिन्हें आधुनिक भारत का सबसे तेज व शातिर दिमाग वाला जासूस माना जाता था।

कौन थे रामेश्वर नाथ

रामेश्वर नाथ का जन्म 10 मई 1918 को उत्तर-प्रदेश के वाराणसी में एक कश्मीरी ब्राहाण परिवार में हुआ था। रामेश्वर नाथ काव का ने इलाहाबाद विश्वविधालय से अग्रेजी साहित्य एम.ए. की शिक्षा हासिल की। अपनी एम.ए. की शिक्षा पूरी होने के बाद रामेश्वर नाथ काव साल 1939 में पुलिस विभाग में शामिल हो गए। जब भारत देश 1947 में आजाद हुआ उससे पहले रामेश्वर नाथ काव ने “ डायरेक्टोरेट ऑफ इंटेलिजेंस ब्यूरो ” में शामिल हो गए। आगे चलकर वो काव भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के पहले चीफ बने। भारत से जासूसी का जन्म रामेश्वर नाथ काव से ही हुआ था। जासूसी के मामले शातिर दिमाग व अलग-अलग विचारो के कारण रामेश्वर नाथ काव को “ काव - बॉयज”  के नाम से भी जाना जाता था।

जब साल 1962 में भारत व चीन के मध्य जंग छिड़ी तब भारतीय सैन्य बलों काफी नुकसान उठाना पड़ा था।

इस नुकसान के पीछे मुख्य वजह रही भारत की उत्तरी सीमा पर चीनी सैन्य बलों की लगातार बढ़ रही गतिविधियों की खबर न लगना क्योंकि तब भारत के पास तेज दिमाग व दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखने के लिए कोई स्पेशल खुफियां टीम नही थी। हालांकि तब भारत के पास एक विदेशी विभाग था । जो केवल सूचनाओं को जमा करता था। जो किसी भी देश की सुरक्षा दृष्टी से काफी नही था।

1965 में बने प्रथम रॉ  प्रमुख

लेकिन जब साल 1965 में भारत व पाकिस्तान के बीच युद्ध के आसार बढ़ गए, तब भारत को इस युद्ध में खुद को मजबूत बनाने के लिए एक खूफिया विभाग जरुरत थी। तब साल 1968 में भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत की इंटेलिजेंस ब्यूरो को विभाजित करने पर निर्णय लिया।

इंटेलिजेंस ब्यूरो के विभाजन के बाद 21 सितंबर 1968 को भारत में “ रिसर्च एंड एनालिसिस विंग ” की स्थापना हुई। देश में सुरक्षा के लिहाज से बनी इस महत्वपुर्ण एजेंसी को अब एक ऐसे शातिर दिमाग व दुश्मनों के नाक के नीचे से खुफियां काम कर सकें सख्श की खोज थी। बस एनालिसिस विंग की इसी आवश्कता की पूर्ति करने के लिए इंदिरा गांधी ने खुद “ इंटलिजेंस ब्यूरो ” उपाअध्यक्ष रामेश्वर नाथ काव को भारतीय रॉ प्रमुख का कार्यभार सौंपा।

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के द्वारा रॉ प्रमुख का पदभार देने के बाद रामेश्वर नाथ ने दक्षिणी एशिया के उपहाद्वीपों पर स्थिति में बदलाव होने लगा। रामेश्वर नाथ में कार्य भूमिका को समझते हुए उन्होंने कई विश्लेषण कर रॉ को दुनिया की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी के प्रयास किए। रॉ की स्थापना के बाद वो खुद कई सालों तक अंडरग्राउंड हो गए और कई खुफिया मिशन को सफलापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया । तेज दिमाग व खुफिया मिशन को सफल बनाने के चलते उन्हें “ काव-बॉयज ” कहा गया।

उत्तरी पाकिस्तान के विभाजन में अहम भूमिका

भारत से आजादी के बाद अलग हुए पाकिस्तान जिसको साल 1971 में उत्तरी भाग को अलग कर एक अलग राष्ट्र बांग्लादेश का निर्माण करने में रामेश्वर नाथ काव का भी योगदान रहा। अपने इस मिशन के तहत कॉव ने बांग्लादेश के “ मुक्ति बल ” की मदद की। पाकिस्तान से उत्तरी पाकिस्तान को अलग करने की इस लड़ाई में करीब 17 दिन बाद भारत को विजय हासिल हुई व एक नये राष्ट्र बांग्लादेश का जन्म हुआ। साल 1968 में रॉ के चीफ बने रामेश्वर नाथ काव 1977 तक रॉ के चीफ रहें।

पहले रॉ प्रमुख रामेश्वर नाथ काव शातिर दिमाग के लिए थे फेमस | Raw Agent Rameshwar Nath kao In Hindi