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स्वतंत्रता सेनानी सागरमल गोपा का जीवन परिचय | Sagarmal Gopa Biography In Hindi

स्वतंत्रता सेनानी सागरमल गोपा का जीवन परिचय | Sagarmal Gopa Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-4 months ago
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भारत की स्वतंत्रता के बारे में हम अब तक कई क्रांतिकारियों के साहसिक कार्यो के बारे में पढ़ चुकें है दोस्तों ये महान क्रांतिकारी किसी ट्रेनिंग से भारत माता की सेवा के लिए क्रांतिकारी नहीं बने है बल्कि इनके अंदर देश हित की लड़ाई लड़ने का एक जज्बा था जो इनको एक महान क्रांतिकारी बना गया ऐसे ही  आज हम ऐसे क्रांतिकारी की बात करने वाले जिन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था की वो देश की  आजादी के लिए लड़गे और एक महान क्रांतिकारी बनेंगे दोस्तों हम बात कर रहे है राजस्थान के जैसलमेर के धरती पुत्र सागरमल गोपा - Sagarmal Gopa की

दोस्तों जब उस समय देश के बदलते माहौल,और देश में विपरीत परिस्थितियां चल रही थी तब इन सब को को देख उन्हें एक देशभक्त और क्रांतिकारी बनने की प्रेरणा मिली उन्होंने जब बेकसूर लोगो पर जुल्म होते हुए देखा तो उन्होंने इन कृत्यों के खिलाफ आवाज उठाई और इस बीच कई कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा बस दोस्तों आज हमने सोचा आपको इस देश भक्त और महान क्रांतिकारी के बारे में बताया जाएं तो चलिए इसकी शुरुआत करते है

सागरमल गोपा का जन्म व परिवार - Sagarmal Gopa Birth And Family

महान स्वतंत्रता सेनानी और देशभक्त सागरमल गोपा का जन्म 3 नवम्बर 1900 को जैसलमेर के एक बड़े ब्राह्मण परिवार में हुआ था सागरमल गोपा के पूर्वज जैसलमेर में ही रहकर राजगुरु के पद पर कार्य करते थे इनके पिता का नाम अख्य खान था जो जैसलमेर के शासन में कार्य करते थे

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जब सागरमल अपने बचपन से युवावस्था में आये तब देश में आजादी को लेकर सभी राज्यों में अलग -अलग कहानिया चल रही थी और देश में चल रहे विपरीत हालतों को देख उन्हें बड़ा दुख हुआ और इसी दुख से उन्हें एक देश भक्त और देश की आजादी की लड़ाई लड़ने की प्रेरणा मिली और देश को आजाद कराने में अपनी अहम भूमिका निभाने के लिए जैसलमेर से नागपुर चले गए

देश भक्ति की ललक जगने के बाद उन्होंने पहली बार सन 1921 में असहकार आंदोलन में भाग लिया और अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और विरोध करते हुए इस आंदोलन को आगे बढ़ाया यहां का शासक स्थानीय बेकसूर जनता पर जुल्म करता था सागरमल गोपा ने रियासतों में अखिल भारतीय परिषद में भी भाग लिया था

तब उनके उग्र आंदोलन और देशभक्ति को देखते हुए उन पर जैसलमेर और हैदराबाद आने पर रोक लगा दी गई फिर भी उन्होंने आजादी की अंदरूनी संघर्ष जारी रखा वो अपने अख़बार और किताबो के माध्यम से लोगो को आजदी के लिए प्रेरित करते रहे और उन्होंने देश हित की लड़ाई लडते हुए "जैसलमेर राज्य का गुंडाशासन" और  "रघुनाथ सिंह का मुकदमा" जैसी पुस्तकें लिखी

उन्होंने आजादी इस लड़ाई को कभी रुकने नहीं दिया और हर परिस्थियों में संघर्ष करते रहे साल 1938 में उनके पिताजी का निधन हो गया और इस कारण उन्हें वापस घर आना पड़ा

लेकिन दोस्तों इस देशभक्त के साथ छल किया गया और जब ये जैसलमेर गए तब इन्हें 25 मई 1941 को बंधी बना कर कैद खाने में डाल दिया गया और इस कैद से उन्हें कभी रिहाई नहीं दी गई अंत में देश के महान क्रांतिकारी सागरमल गोपा को 4 अप्रैल 1946 को निधन हो गया

भारत सरकार ने सागरमल गोपा की देशभक्ति और स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने पर उनका सम्मान करते हुए 29 दिसंबर, 1986 उनके नाम का डाक टिकट जारी किया

Sagarmal Gopa Biography In Hindi

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दोस्तों महान क्रांतिकारी सागरमल गोपा के जीवन संघर्ष के बारे में पढ़ते हुए इस बात का अहसास हुआ की सगमल गोपा को बचपन से लोगो पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ लड़ना चाहते थे क्योकि वो एक विशिष्ट परिवार से थे इस वजह से वो कर भी सकते थे

जब उनके अंदर देशभक्ति का जुनून पैदा हुआ तब उन्होंने लोगो पर होने वाले अत्याचारों को जड़ से ख़त्म करने की ठान ली और देश को एक आजाद देश बनाने का सपना देखा और अपने इसी सपने के साथ वो अपने पुरे जीवनभर देश की आजादी की लड़ाई लड़ते रहे और अपने अंतिम समय तक हार नहीं मानी दोस्तों हमारी स्टोरी टाइम्स की पूरी टीम देश की इस महान क्रांतिकारी के देश हित के लिए दिए बलिदान को सलाम करता है - धन्यवाद

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