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सीकर की संतोष देवी जैविक खेती से कमा रही है 15 लाख माह | Santosh Devi khedar Success story in Hindi

By N.j / About :-7 years ago

राजस्थान की भूमि जिसमें खेती करने को लेकर कहा जाता है की यह बहुत ही कम उपजाऊ होती है और बात हो बंजर भूमि की तो वहां खेती करना पहाड़ पर चढ़ने के समान होता है. इन सब के बीच दोस्तो यदि आपको कहा जाएं की आपको इस मिट्टी पर सेब और अनार की खेती करनी है तो इस में चौंकते हुए आपका एक ही जबाब होगा की यह नही हो सकता और जो करने की सोचेगा वो इसमें असफल ही होगा. लेकिन दोस्तो आज हम एक ऐसी महिला की बात करने वाले है जिन्होंने इन सब बातों को गलत साबित कर दिया हम बात कर रहे है राजस्थान के सीकर जिलें में रहने वाली संतोष देवी खदेड़ की. जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर अपनी बंजर जमीन को उपजाऊ बना कर सब कुछ बदल दिया और आज अपनी पुरखों की 1.25 जमीन पर सेब और अनार की जैविक खेती  कर हर महीने 25 लाख रुपयों तक का मुनाफा कमा रही है तो चलिए दोस्तो जानते सीकर की रहने वाली संतोष देवी ने कैसे एक बंजर भूमि को सोना बना दिया.

बंजर जमीन को बनाया उपजाऊ | Santosh Devi khedar Sikar In Hindi

सीकर जिले की रहने वाली संतोष देवी अपने गांव बेरी में 1.25 एकड़ जमीन में अपना फार्म चला रही है. अपनी बंजर जमीन में सबसे पहले संतोष देवी ने अनार की खेती की शुरुआत की और आज वो इससे पुरे 25 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रही है. लेकिन दोस्तो संतोष देवी का यह सफर इतना आसान नही था. सालो से बंजर पड़ी इस भूमि को अपने पति राम करण खदेड़ के साथ रात-दिन मेहनत कर बंजर समझी जाने वाली इस भूमि को उपजाऊ बना दिया. आज इसी बंजर भूमि से संतोष देवी कई लोगो क पेट भर रही है. दोस्तो संतोष देवी की इस कहानी की शुरुआत हुई थी जिद और आत्मसम्मान की रक्षा के चलते क्योंकी संतोष देवी को लोग इस बात का ताना देते थे की इसका परिवार तो देवर के पैसों से चलता है. बस यही से शुरु हुई संतोष देवी की कहानी की शुरुआत. 

बचपन से था कृषि कार्य से लगाव | Santosh Devi khedar Full Story In Hindi

बंजर भूमि को अपनी मेहनत और लगन से उपजाऊ बनाने वाली संतोष देवी का जन्म झुंझुनू जिले मे हुआ था. संतोष देवी के पिता दिल्ली पुलिस में नौकरी करते थे. संतोष देवी ने कक्षा 5 वीं तक अपने पिता के साथ दिल्ली  में रहते हुए पढ़ाई की. 5 वीं कक्षा के बाद वो अपने गांव आ गई और गांव में ही रहते हुए उन्होंने खेती से जुड़े कार्य को सीखने की शुरुआत कर दी. जब संतोष देवी महज 12 साल की थी तभी उन्होंने खेती से जुड़े कई कार्य को करने में महारथ हासिल कर ली. संतोष देवी जब 15 साल की थी तब उनकी शादी सीकर निवासी रामकरण खदेड़ से हो गई. बचपन से संतोष देवी की पढ़ाई के प्रति इतना लगाव नही था लेकिन आज उन्हें कृषि से जुड़ी उपलब्धियों के चलते कृषि विभाग "कृषि वैज्ञानिक" की उपाधि से भी सम्मानित कर चुका है.

खेती से सब बदलने की तेयारी | How to Start Organic Farming Santosh Devi khedar

संतोष देवी की जिस परिवार में शादी हुई थी उसी घर में संतोष देवी की छोटी बहन की शादी उनके पति रामकरण के छोटे भाई से हुई . ससुराल में बड़ा व खेतीहर वाला परिवार होने कारण संतोष देवी खेती करने लगी. कई सालो से जमीन में रसायन को प्रयोग में लेने के कारण खेत की मिट्टी खराब हो गई थी. खेती के लिए न खेत में ट्यूबवेल थी न कोई सिंचाई का और शाधन. रामकरण के परिवार की आर्थिक परिस्थिति काफी खराब थी कोई नौकरी भी नही थी और खेती भी अच्छी नही हो पाती थी. साल 2003 में रामकरण को होमगार्ड की नौकरी मिली जिसमें उन्हें 3000 रुपयें सैलरी मिलती थी लेकिन साल 2008 में दोनो भाइयों के बीच बंटवारा होने के कारण रामकरण पर परिवार की जिम्मेदारियों का  बोझ और बढ़ गया. इस बटवारें में पिता की जमीन में रामकरण को 1.25 एकड़ जमीन मिली.

संतोष देवी का शुरुआती संघर्ष | Struggle Santosh Devi khedar

जब रामकरण होमगार्ड की नौकरी कर रहे थे उस दौरान उनके एक साथी मित्र ने उन्हें अनार की खेती करने के बारें में सुझाव दिया. इस बारें में रामकरण ने संतोष देवी को बताया लेकिन दोनो मजबूर थे क्योंकि अनार की खेती के लिए कई तरह के जैविक खाद की आवश्यकता होती है लेकिन संतोष देवी ने अपनी पारिवारिक हालातों से हार नही मानी और खुद की खाद बनाना शुरु कर दिया खेत में सिंचाई के पानी की व्यवस्था करने के लिए उन्होंने अपनी भेंस को बेच कर खेत में ट्यूबवेल करवाई और जो पैसे बचे उनसे उन्होंने मार्केट से अनार के पौधे खरीद कर खेत में बो दिए. संतोष देवी ने खेती में ड्रिप टेक्नोलोजी को प्रयोग में लेते हुए अनार के पौधो की सिंचाई करना शुरु किया.

2011 में मिली पहली सफलता

संतोष देवी ने बताया की उन्होंने बचपन से अपने गांव में की जाने वाली जैविक खेती से बहुत कुछ सीखा था जो उन्होंने अपने गांव से जैविक खेती के बारें में सीखा वो अब यहां प्रयोग में लेने लगी. वही रामकरण अपनी होमगार्ड की ड्यूटी पुर्ण होने के बाद संतोष देवी का खेती के काम में सहयोग करते थे. साल 2008 में संतोष देवी द्वारा शुरु की गई जैविक खेती में पहली सफलता पुरे 3 साल बाद 2011 में मिली इस साल उन्हें जैविक खेती से पुरे 3 लाख का फायदा हुआ.

सेब की खेती कर सबको चौका दिया

अनार की खेती से शुरुआत करने वाली संतोष देवी ने अपने फार्म में सेब के पेड़ लगा कर सभी को चौका दिया. सेब जैसे फल जिनकी खेती के लिए ठंडे तापमान की आवश्कता होती है राजस्थान में ऐसा करना बिलकुल विपरीत था. संतोष देवी की सेब की खेती की शुरुआत उन्हें किसी उपहार में दिए गए पौधे से हुई . संतोष देवी ने इस पौधे को खेत में लगा दिया संतोष देवी को यह पौधा हिमाचल से आए कृषि वैज्ञानिक हरमनजीत कौर ने सेब का पोधा उपहार के रुप में दिया था.

बेटी की शादी में दिए 551 पौधे

संतोष देवी के परिवार में उनके पति के साथ उनकी दो बेटिया और एक बेटा है. यह तीनो बीएससी में एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रहें है. अपनी पढ़ाई के साथ यह तीनो फ्री समय में खेती के काम मे भी सहयोग करते है. साल 2017 में जब संतोष देवी की बड़ी बेटी निशा की शादी की गई तब पिता रामकरण और संतोष देवी ने शादी में शामिल हुए सभी रिश्तेदारों को उपहार के तौर पर 551 अनार के पौधे भेंट किए.

साल 2016 में नवीन तकनिक के लिए मिला “कृषि मंत्र पुरस्कार” | Krishi Mantra Award  Santosh Devi

अपनी मेहनत और लगन से जैविक खेती को एक नया आयाम देने के विचारो के कारण राजस्थान सरकार ने साल 2016 में संतोष देवी को “कृषि मंत्र पुरस्कार” और साथ में 1 लाख रुपये की राशि दी. आज जैविक खेती को लेकर संतोष देवी जिले के कई लोगो को प्रेरित कर रही है. आज उनके फार्म पर हर रोज 20-25 किसान जेविक खेती के बारे में सीखने आते है. यहां आने वाले लोगो की सुविधा के लिए संतोष देवी ने रहने की व्यवस्था भी कर रखी है.

2019 मेंं बेचे 15000 पौधे

हर समय खेत के कार्य में लगे रहने के बावजूद संतोष देवी घर के सम्पूर्ण कार्य की जिम्मेदारी खुद उठाती है. संतोष देवी के घर में हर रोज 15 से 20 लोगो का खाना बनता है जो वो खुद बनाती है. जैविक खेती के बारे में बात करते हुए संतोष देवी ने बताया की “ वो जिस कीटनाशक का छिड़काव खेतो में करती है उसमें थोड़ी गुड़ की मात्रा भी मिला देती है इससे मधुमक्खियां फूलों की और अधिक आकर्षित होती है यहीं कारण है की फूलों में पोलिनेशन की मात्रा बढ जाती है एवं फूल आसानी से पौधे से नही झड़ते. संतोष देवी ने बताया की इस वर्ष उन्होंने करीब 15000 से अधिक पौधो को मार्केट में बेचा और इस बार उन्हें जैविक खेती से करीब 15 लाख का फायदा हुआ.


सीकर की संतोष देवी जैविक खेती से कमा रही है 15 लाख माह | Santosh Devi khedar Success story in Hindi