x

क्या है जमानत जब्त चुनावों में क्यों होती है जमानत जब्त | Security Deposit Election In Hindi

By N.j / About :-6 years ago

चुनाव जो हर 5 साल बाद हर राज्य की सत्ता का फैसला करता है। तब जनता का जनमत यह फैसला करता है की कौन सा उम्मीदवार उनके क्षेत्र के लिए उपयोगी है। अपने क्षेत्र में हुए चुनाव में हम सभी अपने जनमत का प्रयोग करते है। चुनाव से पहले सभी उम्मीदवार जोरो शोरों से चुनाव प्रचार करते है व जनता से अपने पक्ष में वोट की अपील करते है। चुनाव के परिणाम में प्रत्याक्षियों की हार-जीत के बाद एक शब्द जो हम हर चुनाव के बाद जरुर सुनते है “ जमानत जब्त ” । आखिर जमानत जब्त क्या है और इसका चुनाव में क्या मतलब होता है ?

क्या मतलब है जमानत जब्त का ?

चुनाव के समय चुनाव आयोग हर उम्मीदवार से चुनाव में भाग लेने के लिए एक राशी जमा करवाती है। इस राशी को जमानत राशी कहा जाता है। चुनाव के बाद कुछ शर्तों के बाद यह राशी उम्मीदवार को वापस कर दी जाती है अन्यथा इस राशी को चुनाव आयोग जब्त कर लेता है।

विधानसभा चुनाव में क्या होती है यह राशी

यदि कोई उम्मीदवार विधानसभा चुनाव में पर्चा दाखिल करता है तो उसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम - 1951 34(ख) के तहत विधानसभा चुनाव में प्रत्याक्षी के आवेदन के लिए 10,000 की जमानत राशी चुनाव आयोग को जमा करानी होती है, साथ ही अनुसूचित जाती/अनुसूचित जनजाति को 5000 की जमानत राशी जमा करानी होती है।

कैसे होती है जमानत राशी जब्त ?

चुनाव में भाग लेने वाले प्रत्याक्षी द्वारा जमा की गई जमानता राशी को लेकर चुनाव आयोग की नियम शर्तें होती है उस आधार पर इस राशी का फैसला होता है। इस राशी को पाने के लिए प्रत्याक्षी को कुल मतो में छठा हिस्सा प्राप्त करना होता है। तब नामांकन के दौरान प्रत्याक्षी द्वारा जमा की गई जमानत राशी उसे लोटा दी जाती है। जैसे एक विधानसभा क्षेत्र में कुल 1 लाख वोट पड़े इसमें उस उम्मीदवार को 16000 वोट हासिल हुए। अगर कोई प्रत्याक्षी यह आंकड़ा नही छु पाता तो उसकी जमानत राशी जब्त हो जाती है।

इन शर्तों पर दी जाती है उम्मीदवार को जमानत राशी

चुनाव के दौरान प्रत्याक्षी द्वारा जमानत के तौर पर जमा की गई राशी को चुनाव आयोग चुनाव की शर्तों के आधार पर इसे प्रत्याक्षी को वापस करता है। 

यह रही वो शर्तें

1. यदि कोई उम्मीदवार अपना नांमाकन दाखिल करता है और चुनाव आयोग द्वारा उसका नांमाकन किसी वजह से रद्द कर देता है तब उसे जमानत राशी वापस कर दी जाती है।
2. यदि किसी प्रत्याक्षी की वोटिंग शुरु होने से पहले ही मुत्यु हो जाती है तब चुनाव आयोग उसकी जमानत राशी परिजनों के सुपुर्द कर देता है।
3.  कुल मतों में छटवा हिस्सा हासिल करने पर
4. यदि कोई प्रत्याक्षी कुल मतो में छटवा हिस्सा न प्राप्त करते हुए भी चुनाव जीत जाता है तो उसकी जमानत राशी वापिस कर दी जाती है।

चुनाव आयोग चुनाव खत्म होने के बाद जमानत जब्त राशी को इलेक्शन अकांउट में डिपोजिट कर देता है। जिसे आगे होने वाले चुनावो की तैयारी में काम में ले लिया जाता है।

क्या है जमानत जब्त चुनावों में क्यों होती है जमानत जब्त | Security Deposit Election In Hindi