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सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परिचय | Life Story of Subhadra Kumari Chauhan in Hindi

सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परिचय | Life Story of Subhadra Kumari Chauhan in Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-11 months ago
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सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन | All About Life Story of Subhadra Kumari Chauhan in Hindi

  • जन्म                           - 16 अगस्त 1904, निहालपुर इलाहाबाद भारत
  • मृत्यु                           - 15 फरवरी 1948, जबलपुर भारत
  • कार्यक्षेत्र                       -  लेखक
  • राष्ट्रीयता                     -  भारतीय
  • भाषा                           -  हिन्दी
  • काल                            -  आधुनिक काल
  • विधा                           -  गद्य और पद्य
  • विषय                          -  कविता और कहानियाँ
  • साहित्यिक आन्दोलन     -  भारतीय स्वाधीनता आंदोलन से प्रेरित देशप्रेम

सुभद्रा कुमारी चौहान भारतीय साहित्य का एक ऐसा चेहरा जिसे भारत के पटल पर वीर रस के ओज से परिपूर्ण एक महान कवियत्री के रूप में पूरा साहित्य समाज अंगीकार करता है|

Introduction of Subhadra Kumari Chauhanvia : patrika.com

हिंदी जगत की इस महान कवियत्री का जन्म 16 अगस्त सन 1904 को नागपंचमी के दिन इलाहबाद (उत्तर प्रदेश) के निकट निहालपुर गांव में एक संपन्न परिवार में हुआ था| सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी रचना दोनों गद्य और पद्य दोनों में की थी| भारत की इस महान कवियत्री की कविताओं में हमेशा एक रस छलकता था जिससे प्रभावित हुए बिना भारत का स्वाधीनता आंदोलन भी न रह सका| सुभद्रा कुमारी चौहान नाम का ये तारा भारतीय पटल पर उस समय देदीप्यमान  हुआ जब भारत अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, ऐसे में वीर रस से परिपूरित इस कवियत्री की रचनाओं ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के मानस पटल को देशभक्ति के अविरल बहती धारा से सरोबार कर दिया था| 

भारत की इस सुप्रसिध्द कवियत्री और लेखिका के कुल 2 कविता संग्रह और 3 कथा संग्रह प्रकशित हुए पर जिस कविता ने उन्हें लोगों के मानस पटल पर स्थान दिया वो थीं प्रसिद्द  "झाँसी की रानी"  नामक शीर्षक से लिखी गई कविता जो कुछ इस प्रकार थी -
                " बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी
                  जो खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी"

सुभद्रा कुमारी चौहान को राष्ट्रीय चेतना की एक सजग कवियत्री होने का गौरव प्राप्त है| राष्ट्र के प्रति उनकी समर्पित सोच को उनके लेखन में भी दर्शित किया गया और इसी के चलते उन्हें भारतीय स्वाधीनता संग्राम के माहौल में कई बार जेल भी जाना पड़ा जहाँ जेल यातनायें सहने के अनुभव और अनुभूतियों दोनों को कहानियों में पिरोकर भारतीय  जनमानस के समक्ष प्रस्तुत किया| उनकी रचनाओं की सादगी ही उनको हृदयग्राही बनाती है| वातावरण चित्रण प्रधान शैली में प्रस्तुत लेखन की भाषायें सरल एवं काव्यात्मक है| सुभद्रा कुमारी चौहान को कालविभाजित हिंदी के इतिहास के आधार पर अगर आंकलित करें तो हम पाएंगे की सुभद्रा कुमारी चौहान आधुनिक काल की कवियत्री की परंपरा को आगे बढ़ाने की वाहक थी| 

Introduction of Subhadra Kumari Chauhanvia : gstatic.com

1904 में जन्मी इसी कवियत्री का विवाह 1919 में खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह के साथ हुआ और विवाह के बाद वे जबलपुर आ गई थीं| 1921 के आंदोलन में भाग लेने वाली वह प्रथम महिला थीं| वे दो बार जेल भी गई थीं| 

उनका जीवन हालाँकि काफी अल्पकालिक था (15 फरवरी 1948 को एक दुर्घटना में निधन)| परन्तु उनके कृत्य भारतीय इतिहास के पन्नो में युगों-युगों तक छायें रहेंगे| सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन पर प्रकाश डालती कई रचनायें भी साहित्यिक पटल पर अंकित की गई हैं जिनमे से हंस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उनकी ही पुत्री सुधा की रचना " तेज से तेज" नामक पुस्तक व डॉ मंगला अनुजा की पुस्तक इसके अलावा भारत सरकार ने भारत की इस अमूल्य निधि की याद में डाक टिकट भी जारी कर रखा है| उनकी रचनाओं पर अगर दृस्टि डालें "बिखरे मोती" उनका पहला कहानी संग्रह था| भग्नावशेष, मंझली रानी, दृष्टिकोण, परिवर्तन, कदम के फूल, किस्मत, अमराई, महुए की बेटी, एकादशी, आहुति, यति, अमराई, अनुरोध व ग्रामीण, पापिपेट, होली जैसे 15 कहानियों का पूर्ण संग्रह भी उनके अल्पकालिक जीवन की निशानी के रूप में हमारे सक्षम परिभूषित होता है| 

Introduction of Subhadra Kumari Chauhanvia : gstatic.com

और दूसरा कथासंग्रह 1934 में छपा, जो "उन्मादनी" नाम से था, इसमें असमंजस, अभियुक्त, सोने की कड़ी, नारी ह्रदय, पवित्र ईर्ष्या, अंगूठी की खोज, चढ़ा दिमाग व वैश्य की लड़की नाम से कुल नौ कहानियां है जो उस समय के समाज का आइना बनकर भारतीय साहित्यिक पटल पर प्रतिबिंबित होती हैं| "सीधे साथ चित्र" इनका अंतिम कथा संग्रह है, इसमें कुल 14 कहानियां हैं - रूपा, कैलाशी नानी, बी आल्हा, कल्याणी जैसी कहानियां समाहित हैं| इसके अलावा सुभद्रा कुमारी चौहान के तीन कविता संग्रह भी छापे, जो मुकुल, त्रिधारा, प्रसिद्द पंक्तियाँ नाम से साहित्य पटल पर प्रकशित हुए|

Introduction of Subhadra Kumari Chauhanvia : jagranhindi.in

अपनी इन कृतियों के रूप में सुभद्रा  कुमारी ने आधुनिक काल को अमूल्य हीरे दिए जो भारत के साहित्य पर सर्वदा देदीप्य मान रहेंगे| भारत की इस कवियत्री को उनकी रचनाओं के लिए आज भी लगातार सम्मानित किया जा रहा हैं| भारतीय तटरक्षक सेना ने 28 अप्रैल 2006 को राष्ट्र की एक तटरक्षक जहाज़ को ही सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम दे डाला|

Introduction of Subhadra Kumari Chauhanvia : amarujala.com

अमिट हैं इस महान कवियत्री की रचनायें जिन्हे उनके जाने के बाद भी दुनिया ने उनकी रचनाओं को अपने आचरण और व्यवहार में आत्मसात कर रखा है| तभी तो आज तक भारतीय जनमानस के बीच उनके द्वारा लिखी "झाँसी की रानी" कविता की पंक्तियाँ गुंजायमान हो रही हैं जो भारतीय संस्कृति को जीवित रखने का एक छोटा सा प्रयत्न है|