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मराठा सरदार तानाजी मालुसरे का सम्पूर्ण जीवन परिचय | Tanaji Malusare Biography In Hindi

मराठा सरदार तानाजी मालुसरे का सम्पूर्ण जीवन परिचय | Tanaji Malusare Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-9 months ago
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  • पुरा नाम - तानाजी मालुसरे
  • जन्म स्थान - 1600 
  • जन्म स्थान - गोदोली गांव - महाराष्ट्र
  • पिता का नाम - सरदार कलोजी
  • माता का नाम - पार्वती बाई
  • प्रसिद्धि की मुख्य वजह - सिंहगढ़ का युद्ध
  • मृत्यु - 1670 

भारत का इतिहास जो इस धरती पर जन्मे शूरवीर योद्धाओं के लिए जाना जाता है। भारत के इतिहास में महाराण प्रताप से लेकर क्षत्रपति शिवाजी समेत कई योद्धा हुए जो अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी अंतिम सांस तक लड़े आज हम इतिहास के उन वीरो की शहादत भूल रहें है। इन्हीं योद्धाओं में एक योद्धा जन्में थे तानाजी मालुसरे। तानाजी मालुसरे मराठा साम्राज्य में एक सेनापति थें। आज जब भी मराठा साम्राज्य का उल्लेख होता है तो सब के सामने शिवाजी महाराज का ही नाम आता है। लेकिन दोस्तो वो तानाजी मालुसरे ही थें जिनके सहयोग से शिवाजी ने मुगलों के समय के सबसे मजबूत सिंहगढ़ पर विजय हासिल की थी।

हम तानाजी के जीवन का संक्षिप्त परिचय निकाले तो वो एक सच्चें मराठा कोली सरदार थें। तानाजी को शिवाजी के बचपन की दोस्ती व अपने कार्य के प्रति कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाना जाता है। मराठा सम्राज्य में तानाजी शिवाजी की विदेशी गुलामी मुक्त भारत बनाने में सूबेदार की भूमिका में थें।

तानाजी मालुसरे का जन्म व परिवार - Tanaji Malusare Birth and Family

Tanaji Malusare Biography In HindiSource myfreedo.in

महाराजा शिवजी के बचपन के दोस्त व मराठा सम्राज्य के सबसे विश्वसनीय योद्धा तानाजी मालुसरे का जन्म 1600 ईसवी में महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक छोटे से गांव गोदोली ( जवाली तालुका ) में हुआ था। तानाजी का जन्म एक हिंदू कोली परिवार में हुआ था। तानाजी के पिता का नाम सरदार कलोजी व माता का नाम पार्वतीबाई था। तानाजी को बचपन से ही तलवारबाजी का अत्याधिक शौक था। यही वजह रही की उनकी मित्रता शाहजी पुत्र शिवाजी से हो गई। शिवाजी ने आगे चलकर अपने साम्राज्य में तानाजी की कुशलता को देखकर अपनी सेना का सेनापती व मराठा साम्राज्य का मुख्य सुबेदार नियुक्त कर दिया।

सिंहगढ़ का युद्ध - War of Sinhagad Tanaji Malusare In Hindi

तानाजी के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण युद्धों में एक युद्ध था सिंहगढ़ का युद्ध ( कोढ़ाणा ) यह युद्ध 1670 में मराठा साम्राज्य व मुगलो के बीच लड़ा गया। जब इस युद्ध की शुरुआत होने वाली तब तानाजी अपनी पुत्री के विवाह में व्यस्त थें। विवाह के बीच ही जब उनके पास मराठा साम्राज्य से इस युद्ध की जानकारी मिली तब वो उसी क्षण अपने मामा शेलार मामा के साथ इस युद्ध में मराठा सेना को मजबूती देने निकल जाते है।  वहीं मराठा सम्राठ शिवाजी हर हालात में इस किले को एक बार पुनः हासिल करना चाहते थें। युद्ध की शुरुआत से पहले शिवाजी महाराज तानाजी को को कहते है की “ कोढाणा किले को मुगलो की कैद से मुक्त कराना अब उनकी इज्जत बन गया है। यदि हम इस किले को हासिल नही कर पाएं तो आने वाली पीढ़ियां उन पर हंसेगी की हम हिंदू अपना घर भी मुगलो से मुक्त नही करा पाएं। जब यह बात तानाजी ने सुनी ने सुनी तभी उन्होंने कसम खाई की अब उनके जीवन का उदेश्य केवल कोढाणा किले को हासिल करना ही है।

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कोढ़ाना किले की बनावट कुछ इस तरह से थी की इस पर हमला करने वाली सेना को सबसे ज्यादा विपरीत परिस्थियों का सामना करना पड़ता था। वही शिवाजी इस किले को हर परिस्थिती भुलाकर इसे जितना चाहतें थें। तब किले पर करीब 5000 हजार मुगल सैनिको का पहरा था व किलें सुरक्षा का जिम्मा उदयभान राठौर के हाथों में था। उदयभान थे तो एक हिंदू शासक लेकिन सत्ता की लालसा के कारण मुस्लिम बन गए। इस परिस्थितियों में कोढणा किले का एक ही भाग ऐसा था जहां से मराठा सेना आसानी से किले में प्रवेश कर सकें और वो भाग था किले की ऊंची पहांडीयों का पश्चिमी भाग।

तानाजी की रणनीती के अनुसार उन्होंने यह तय किया की वो पश्चिमी भाग की चट्टानों पर गोहपड की सहायता से चढ़कर किले की सुरक्षा को भेदेगें। बता दे की गोहपड़ लकड़ी व रस्सी की सहायता से बनाई जाती है। जो गोह नामक चिपकली की तरह होती है यह एक बार में मुश्किल से मुश्किल चट्टान के चिपक मजबूती से चिपक जाती है। तानाजी के कोढणा किले में प्रवेश करने के बाद मराठा सेना एक के बाद एक किले में प्रवेश कर जाते है। तानाजी की इस गोहपड़ का नाम यशंवंती था।

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मुगल से कोढणा किले को मुक्त कराने के लिए करीब 342 सैनिको के साथ तानाजी किले में प्रवेश कर जाते है। तब किले में सुरक्षा के लिए तैनात मुगल सेनापती उदयभान को इस बात की भनक लग जाती है और कोढणा किले में मुगल व मराठा सैनिको के बीच भंयकर युद्ध छिड़ जाता है। तानाजी जब सैनिको का सामना कर रहें होते है तब अचानक युदयभान झल से उन पर हमला कर उनकी की हत्या कर देता है। तानाजी की मौत का बदला उनके शेलार मामा ने उदयभान को मौत की घाट उतार कर लिया। अतः में जंग समाप्त होती है और एक बार फिर कोढ़णा किले पर मराठा साम्राज्य का अधिकार होता है।
कोढणा किले को जीतने के बाद मराठा सम्राट शिवाजी किले की जीत के बाद भी दुखी हो गए और बोले “ गढ़ आला पण सिंह गेला ” यानी गढ़ तो जीत लिया लेकिन मेरा सिंह तानाजी मुझे छोड़ कर चला गया ”

वीर तानाजी की याद में स्मारक - Tanaji Monuments In Hindi

मुगलों के अधिन से कोढ़ना किले से मुक्त कराने के बाद शिवाजी महाराज ने कोढ़ना किले का नाम बदलकर अपने मित्र की याद में सिंहगढ़ रख दिया साथ ही पुणे नगर के “ वाकडेवाडी ” का नाम “ नरबीर तानाजी वाडी ” रख दिया। तानाजी की वीरता को देखते हुए शिवाजी ने उनकी याद में महाराष्ट्र में उनकी याद में कई स्मारक स्थापित किए।
भारत सरकार ने भी तानाजी का सम्मान करते हुए सिंहगढ़ किले की तस्वीर के साथ 150 रुपये की डाक टिकट जारी की।

तानाजी के जीवन पर बनने वाली फिल्म - Tanaji Upcoming Move In Hindi Cinema / Tanaji  Film

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तानाजी के जीवन को पर्दे पर दिखाने के लिए उनकी बॉलीवूड बन रही है। फिल्म में तानाजी मालुसरे की भुमिका में बॉलिवूड एक्टर अजय देवगन होगें। हाल ही में अपने ट्विटर अकाउंट से फिल्म का पोस्टर जारी करते हुए अजय देवगन ने फिल्म के बारें में बताया फिल्म 10 जनवरी 2020 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म का डायरेक्शन ओम राउत कर रहे है। ओम राउत अपने डायरेक्शन में पहले लोकमान्य तिलक के जीवन पर मराठी फिल्म लोकमान्य एक युग पुरुष बना चुकें है जो 2 जनवरी 2015 को रिलीज की कई थी।

तानाजी बालुसरे के जीवन पर आधारीत कविता - Tanaji Malusare Poem In Hindi

तानाजी मालुसरे की वीरता व दृढ़ निश्चय की विरता का उल्लेख मध्यकाल युग के कवि तुलसीदास ने “ पोवाडा ” कविता की रचना की थी।

देश के समाजसेवी बनकर देश के लिए महत्वपुर्ण कार्य को आगे बढ़ाने वाले विनायक दामोदर सावरकर ने भी तानाजी के जीवन पर “ बाजीप्रभु” नामक गीत की रचना की। सावरकर की इस रचना पर ब्रिटिश सरकार ने रोक लगा दी लेकिन 24 मई 1946 को प्रतिबंध हटा दिया गया।

तानाजी मालुसरे की जीवन वीरता पर कविता - Veer Savarkar Poem Tanaji Malusare In Hindi

वीर सावरकर ने तानाजी की सिंहगढ़ की वीरता को अपनी कविता में इस तरह उल्लेख किया

" जयोऽस्तु ते श्रीमहन्‌मंगले शिवास्पदे शुभदे ।
स्वतंत्रते भगवति त्वामहम् यशोयुतां वंदे ॥१॥
स्वतंत्रते भगवती या तुम्ही प्रथम सभेमाजीं ।
आम्ही गातसों श्रीबाजीचा पोवाडा आजी ॥२॥
चितूरगडिंच्या बुरुजानो त्या जोहारासह या ।
प्रतापसिंहा प्रथितविक्रमा या हो या समया ॥३॥
तानाजीच्या पराक्रमासह सिंहगडा येई ।
निगा रखो महाराज रायगड की दौलत आयी ॥४॥
जरिपटका तोलीत धनाजी संताजी या या ।
दिल्लीच्या तक्ताचीं छकलें उधळित भाऊ या ॥५॥
स्वतंत्रतेच्या रणांत मरुनी चिरंजीव झाले ।
या ते तुम्ही राष्ट्रवीरवर या हो या सारे ॥६॥ " -  वीर सावरकर

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