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टाइम ट्रेवल के द्वारा हम अपने भविष्य को कर सकते है ठीक

By Sumer / About :-8 years ago

Time Travel

क्या होता है टाइम ट्रेवल

समय यात्रा का संबंध गति से है। इंसान समय की सीमाओं को लांघकर अतीत और भविष्य में जाने की कल्पना तो करता रहा है किन्तु भारत में ऐसे कई साधु-संत हुए हैं, जो आंख बंद कर अतीत और भविष्य में झांक लेते थे। पौराणिक कथाओं अनुसार देवी-देवता एक ग्रह से दूसरे ग्रह और एक समय से दूसरे समय में चले जाते थे , और ऐसी Machine कैसे ये कार्य कर सकती है ?

इंग्लैंड के मशहूर लेखक ( हर्बट जार्ज वेल्स ) ने 1895 में ( 'द टाइम मशीन' ) नामक एक उपन्यास प्रकाशित किया, तो समूचे यूरोप में हाहाकार मच गया। इस में वेल्स ने 'टाइम मशीन' की अद्वितीय कल्पना की , यह उनकी कल्पना का ही आविष्कार था की विश्व के वैज्ञानिक और लेखक आज तक इसका उपयोग कर रहे हैं। उपन्यास से प्रभावित इस विषय पर अनेक लेख लिखे गए। इस पर हॉलीवुड में एक फिल्म भी बानी है , हालांकि वेल्स के उपन्यास में व्यावहारिक रूप से कई विसंगतियां को प्रदर्शित किया है ।

टाइम मशीन अभी केवल एक कल्पना है , इस उपकरण के माध्यम से यक्ति बैठकर भूतकाल या भविष्य के किसी भी समय में शरीर और अपनी पूरी मानसिक तथा शारीरिक शक्तियों के साथ जा सकता है। ज़्यदातर वैज्ञानिक ये मानते हैं कि यह कल्पना ही रहेगी कभी हकीकत बनेगी यदि ऐसा हो जाये तो कोई भी अतीत में या भविष्य में जाकर अतीत या भविष्य के सच को जान कर बदल सकता है । जैसे कोई भविस्य से आकर अपने आप को आप का पोता या भूतकाल में जाकर कहे की वो आपके  दादा है ।

वैज्ञानिक के अनुसार , जो घटना घट चुकी है उस दृश्य और अंश , ब्रह्मांड में मौजूद जरूर रहेगा। जैसे आप फिल्म देखते है  , ठीक उसी तरह वह टाइम मशीन के द्वारा आपको दखाई दे लेकिन आप उसमे कोई चेंज नहीं कर सकते, यदि ऐसा हो जाये तो वह ( पार्ट बिखरकर और धुंधले हो जाएंगे ) ,  दूसरा यह कि आप समय यात्रा से जो घटना नहीं घटी है, लेकिन जो घटने वाली है उसे भी देख सकते हैं, क्योंकि सभी कार्य और कारण एक श्रंखला से बंधे होते है , विद्वानो का मानना है की  भविष्य को जानकर वर्तमान को सुधारा जा सकता है , लेकिन बीते हुए कल को नहीं।

प्राचीनकाल में सनतकुमार, नारद, अश्‍विन कुमार आदि कई हिन्दू देवता टाइम ट्रैवल करते थे। टाइम मशीन की कल्पना भी भारतीय धर्मग्रंथों से प्रेरित है। आप सोचेंगे कैसे? वेद और पुराणों में ऐसी कई घटनाओं का जिक्र है। उदाहरणार्थ रेवत नाम का एक राजा ब्रह्मा के पास मिलने ब्रह्मलोक गया और जब वह धरती पर पुन: लौटा तो यहां एक चार युग बीत चुके थे। रेवती के पिता रेवत अपनी पुत्री को लेकर ब्रह्मा के पास योग्य वर की तलाश में गए थे। ब्रह्मा के लोक में उस समय हाहा, हूहू नामक दो गंधर्व गान प्रस्तुत कर रहे थे। गान समाप्त होने के उपरांत रेवत ने ब्रह्मा से पूछा अपनी पुत्री के वरों के बारे में। ब्रह्मा ने कहा, 'यह गान जो तुम्हें अल्पकालिक लगा, वह चतुर्युग तक चला। जिन वरों की तुम चर्चा कर रहे हो, उनके पुत्र-पौत्र भी अब जीवित नहीं हैं। अब तुम धरती पर जाओ और शेषनाग के साथ इसका पाणिग्रहण कर दो जो वह बलराम के रूप में अवतरित हैं।' अब सवाल यह उठता है कि कोई व्यक्ति चार युग तक कैसे जी सकता है? कुछ ऋषि और मुनि सतयुग में भी थे, त्रेता में भी थे और द्वापर में भी। इसका यह मतलब कि क्या वे टाइम ट्रैवल करके पुन: धरती पर समय समय पर लौट आते थे?

टाइम Machine के जरिये इंसान भूत और भविष्य में जा सकता है

इसका जवाब है कि हमारी समय की अवधारणा धरती के मान से है लेकिन जैसे ही हम अंतरिक्ष में जाते हैं, समय बदल जाता है। जो व्यक्ति ब्रह्मलोक होकर लौटा उसके लिए तो उसके मान से 1 वर्ष ही लगा। लेकिन अंतरिक्ष के उक्त 1 वर्ष में धरती पर एक युग बीत गया, बुध ग्रह पर तो 4 युग बीत गए होंगे, क्योंकि बुध ग्रह का 1 वर्ष तो 88 दिनों का ही होता है। अब हम टाइम मशीन की थ्योरी को समझें...

पहले यह माना जाता था कि समय निरपेक्ष और सार्वभौम है अर्थात सभी के लिए समान है यानी यदि धरती पर 10 बज रहे हैं तो क्या यह मानना होगा की ( मंगल ग्रह ) पर भी दस ही बज रहे होंगे ? किन्तु आइंस्टीन के " सापेक्षता सिद्धांत " के द्वारा ऐसा नहीं होता है ।

आइंस्टीन ने कहा कि दो घटनाओं के बीच का मापा गया समय इस पर निर्भर करता है , जो उनको देख रहा है वह किस गति से जा रहा है। मान लीजिये दो जुड़वां भाई हैं- ए और बी ,  एक बहुत तीव्र गति के ( अंतरिक्ष ) यान से किसी ग्रह पर जाता है और कुछ समय बाद पृथ्वी पर लौट आता है जबकि B घर पर ही रहता है। A के लिए यह सफर हो सकता है 1 वर्ष का रहा हो, लेकिन जब वह पृथ्वी पर लौटता है तो 10 साल बीत चुके होते हैं। उसका भाई B अब 9 वर्ष बड़ा हो चुका है, जबकि दोनों का जन्म एक ही दिन हुआ था। यानी A 10 साल future  में पहुंच गया है। अब वहां पहुंचकर वह वहीं से धरती पर चल रही घटना को देखता है तो वह अपने जाने वाले कल को देखता है ।

जिस प्रकार गोली बन्दुक निकलने के बाद आप उसे देखना चाहते हो तो उस से भी तेज जानकर उसे पास करना होगा , तब जाकर पलटकर उसको देख सकते है , तभी वह तुम्हें दिखाई देगी। इसी तरह ब्रह्मांड में कई आवाजें, चित्र और घटनाएं जो घटित हो चुकी हैं वे फैलती जा रही हैं। वे जहां तक पहुंच गई हैं वहां पहुंचकर उनको पकड़कर सुना होगा।

यदि ऐसा हुआ तो...? कुछ ब्रह्मांडीय किरणें प्रकाश की गति से चलती हैं। उन्हें एक आकाशगंगा पार करने में कुछ क्षण लगते हैं लेकिन पृथ्वी के समय के हिसाब से ये दसियों हजार वर्ष हुए।
 
भौतिकशास्त्र की दृष्टि से यह सत्य है लेकिन अभी तक ऐसी कोई टाइम मशीन नहीं बनी जिससे हम अतीत या भविष्य में पहुंच सकें। यदि ऐसे हो गया तो बहुत घमासान युद्ध हो जायेगा , इंसान जहां खुद की उम्र बढ़ा सकेगा , वही भविष्य को बदल भी लेगा , इतिहास  फिर से लएक और उदाहारण के जरिये समझते है , आप कर चला रहे हो और आपको पता न हो की 10 कि.मी आगे जाने पर रास्ता बंद है और वह एक बड़ा गड्डा है , जो अचानक से दिखाई नहीं देता,  आपकी कार तेज गति से चल रही है। अब आप सोचिए कि आपके साथ क्या होने वाला है? लेकिन एक व्यक्ति हेलीकॉप्टर में बैठा है और उसे यह सब कुछ दिखाई दे रहा है अर्थात यह कि वह आपका भविष्य देख रहा है। यदि आपको किसी तकनीक से पता चल जाए कि आगे एक गड्‍ढा है तो आप बच जाएंगे। भारत का ज्योतिष भी यही करता है कि वह आपको गड्ढे की जानकारी दे देता है।

लेकिन एक अतार्किक उदाहरण भी दिया जा सकता है, जैसे कि एक व्यक्ति विवाह करने से पहले अपने पुत्र को देखने जाता है टाइम मशीन से। वहां जाकर उसे पता चलता है कि उनका पुत्र तो जेल के अंदर देशद्रोह के मामले में सजा काट रहा है तो... तब वह दो काम कर सकता है या तो वह किसी अन्य महिला से शादी करे या शादी करने से माना कर दे ।

टाइम ट्रेवल के द्वारा हम अपने भविष्य को कर सकते है ठीक