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भारत के राष्ट्र संत तुकडोजी का जीवन परिचय | Tukdoji Maharaj Biography In Hindi

भारत के राष्ट्र संत तुकडोजी का जीवन परिचय | Tukdoji Maharaj Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-2 months ago
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देश की धरती पर समय समय पर ऐसे कई महान संत हुए जिन्होंने समाज को नया मार्ग दिखाया है उन्ही में से एक संत हुए संत तुकडोजी महाराज जो महाराष्ट्र राज्य एक महान आध्यात्मिक संत थे संत तुकडोजी अपने सम्पूर्ण जीवन में एक आध्यात्मिक संत के रूप में रहकर समाज की सेवा की और भक्ति के एक नये मार्ग की रचना की इन्हें राष्ट्रसंत का सम्मान भी दिया गया था

संत तुकडोजी का जन्म व परिवार | Tukdoji Maharaj Birth And Family

Tukdoji Maharaj Biography In Hindi

Source www.hindujagruti.org

संत तुकडोजी का दूसरा नाम माणिक बान्डोजी इंगळे था संत तुकडोजी का जन्म महराष्ट्र के अमरावती जिले के एक छोटे से गांव यावली साल 1909 के मध्यम परिवार में हुआ संत तुकडोजी बचपन काफी संघर्ष के बीच बिता उन्होंने बचपन का ज्यादातर समय रामटेक, सालबर्डी, रामदिघी और गोंदोडाके के जंगलो में बिताया यह उन्होंने आडकोजी महाराज से शिक्षा ली

तुकडोजी ने गांवो के विकास समाज विकास के जुड़े थे संत तुकडोजी के द्वारा लिखी पुस्तक "ग्रामगीता" में इस बात का  पूर्ण वर्णन है दोस्तों आज भी उनके माध्यम से शुरू की गई योजनाएं कार्यक्रम विकास के लिए कुशलता से प्रयोग में लिए जाते है

उनके सम्मान में भारत सरकार ने डाक विभाग उनके नाम का डाक टिकट जारी किया और उन्हें एक बड़ा सम्मान दिया उनके सम्मान में नागपुर विश्वविद्यालय ने नाम बदलकर राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय किया

महान संत तुकडोजी ने समाज हितो के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किये साल 1941 में उन्होंने खुद एक आंदोलन छेड़ा भारत में उन्होंने "छेड़ो भारत " के आंदोलन को एक नई दिशा दी उन्होंने बिट्रिश शासन की नीतियों का पुरजोर विरोध किया तब उनको साल 1942 में बिट्रिश हुकूमत ने गिरफ्तार कर नगर की केंद्रीय जेल में कैद कर दिया था

Tukdoji Maharaj Biography In Hindi

Source static.bhaskarhindi.com

संत संत तुकडोजी ने नागपुर से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर मोझरी गांव में गुरूकुंज आश्रम स्थापित किया यह आश्रम उनके साथी अनुयायी चलते थे माझरी गांव में स्थित इस आश्रम के मुख्य द्वार पर उनके कुछ सिद्धांत लिखे गए है जो इस तरह है -  " इस मंदिर के द्वार सबके लिए खुले है " इस मंदिर में हर धर्म और हर पथ के व्यक्ति का स्वागत है " व्यक्ति देश का हो या विदेश का सभी का यहां स्वागत है "

देश जब स्वतंत्रता के जीवन में कदम रख चूका था तब संत तुकडोजी अपना ध्यान एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों की और केंद्रित किया और तब उन्होंने एक संस्था अखिल भारत श्री गुरुदेव सेवा मंडल की नींव राखी और सभी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़े कार्यक्रमों की सूचि तैयार की गई दोस्तों उनकी इन देश हिट के प्रति तैयार की गई गतिविधियों में इतनी क्षमता थी की उन्हें भारत के  राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश का राष्ट्र संत घोषित किया था

संत तुकडोजी महाराज अपने जीवन में विश्व हिन्दू परिषद के संस्थापक के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत रहे उन्होंने देश में विकास में शुरू हुए कई विकास के मोर्चो में भाग लिया इनके उन्होंने बंगाल में साल पड़े अकाल (1945) भारत चीन युद्ध - 1962 और 1965 में भारत और पाक एव कोयना में आये भयंकर भूकंप 1962 राष्ट्र संत यहां पर एक प्रभावित तरीके से रचना करने के लिए गए

संत  तुकडोजी ने साल 1955 में  आचार्य विनोबा भावे के द्वारा देश में किये गए भूदान आंदोलन में भी हिस्सा लिया था साथ ही साल 1955 में जापान में आयोजित हुए विश्व शांति सम्मलेन में भी शामिल हुए जब संत  तुकडोजी इस यात्रा पर थे तब उन्होंने "मेरियन जापान"  नामक पुस्तक की रचना की थी

Tukdoji Maharaj Biography In Hindi

Source upload.wikimedia.org

जीवन के अंतिम समय संत तुकडोजी महाराज एक गभीर बीमारी कैंसर से ग्रषित हो गए उनके जीवन को बचने के लिए का प्रयास किये गए परतुं  उनके शरीर ने इस बीमारी के आगे हार मान ली और 11 अक्टूबर 1968  को उन्होंने अपना शरीर छोड़ दिया देश के राष्ट्र संत के सम्मान में पूरा देश हर साल 30 अप्रेल को इनकी जयंती के रूप में मनाता है

राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज के द्वारा रचित ग्रन्थ | Book written by Tukdoji Maharaj

  • ग्राम गीता
  • सार्था आनंदमृत
  • सार्थ आत्मप्रभव
  •  गीता प्रसाद
  • बोधामृत
  • लाहर्की बरखा भाग 1, 2 और 3 
  • अनुभव प्रकाश भाग 1 और 2 यह इनके प्रमुख रचित ग्रन्थ है

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