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महर्षि वेदव्यास का जीवन परिचय और अनमोल विचार | Maharishi Vedvyas Biography In Hindi

महर्षि वेदव्यास का जीवन परिचय और अनमोल विचार | Maharishi Vedvyas Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-10 months ago
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महाभारत के रचयिता वेदव्यास की जीवनी एवं जीवन प्रेरक विचार | Vedvyas Biography and Quotes in Hindi

  • पूरा नाम - कृष्णद्वैपायन, बादरायणि, पाराशर्य - Vyas
  • पिता का नाम -  ऋषि पराशर
  • माता का नाम - पिता:    सत्यवती (मत्स्यगंधा)
  • पत्नी का नाम - पिंजला
  • संतान का नाम -     शुकदेव, विधुर , धृतराष्ट्र
  • महर्षि व्यास उत्त्पति स्थल - यमुना तट हस्तिनापुर

बाल्य काल से बुद्धिमत्ता के धनी रहे महर्षि वेदव्यास हर विषय में इतने कुशल थे की वो किसी भी चीज को समझने में ज्यादा समय नहीं लेते थे अपने पिता के ज्ञान के अनुसार ही वेदव्यास जी भी उतने ही गुणी थे बचपन से अपने पिता के ज्ञान की छाया में रहे वेदव्यास जी अपने पिता को ही अपना गुरु मानते थे वेदों के ज्ञान से संग्रहित होने के बाद वेदव्यास जी पुराण के ज्ञान में निपुण हो गए

वेदव्यास के पुराण के ज्ञान के प्रति इतनी बाहुल्यता थी की मजह 16 साल की उम्र में ही उन्होंने आश्रमों में होने वाले धार्मिक कार्यो में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था वेदव्यास जी को अपने बाल्यकाल में ही सभी शास्त्रों वेद पुराण का ज्ञान हो गया था और उस समय उनके ज्ञान के आगे कोई नहीं टिक पाता था

वेदव्यास द्वारा वेदों का विस्तारण 

Maharishi Vedvyas Biography

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वेदों के अतुलनीय ज्ञान और इनके विस्तार के कारण इन वेदव्यास का नाम की उपाधि दी गई और साथ अपने जीवन को बदरीवन में व्यतीत करने के कारण इन्हें बादरायण नाम की उपाधि भी दी गई वेदों के ज्ञान कारण ही वेदव्यास जी चारो वेदों का विस्तार किया और इनके साथ 18 महपुरानो के रचयिता भी बनें

हिंदू धर्म में व्यास को माना जाता है भगवान विष्णु का रूप

Maharishi Vedvyas Biography

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सभी हिंदू पुराणों के अनुसार खुद भगवान विष्णु ने ही व्यास के के रूप में वेदों को विस्तार किया था जब वेदव्यास जी ने धर्म को संकट में आते  हुए देखा था तब वेदों को चार हिस्सों में बाँट दिया और इसी के चलते वो बाद में वेदव्यास कहलाये

वेदों का विभाजन करने के बाद वेदव्यास जी ने अपने चारो शिष्यो सुमन्तु, पैल, वैशम्पायन और जैमिनी और अपने पुत्र शुकदेव को वेदों की शिक्षा दी वेदों के ज्ञान के साथ वेदव्यास जी ने इन्हें महाभारत के ज्ञान का भी बोध करवाया अपने लौकिक ज्ञान और अतुलनीय ज्ञान शक्ति के कारण भगवान विष्णु का रूप भी माना जाता था 

आषाढ़ माह में गुरुपूर्णिमा के दिन मानते है व्यास जयंती

हिंदू धर्म में रचित महाभारत में कुल 18 महाकाव्य है हिंदू धर्म में श्रीमद्भागवत, ब्रह्मसूत्र, मीमांसा साहित्य में दर्शन के मुख्य प्रेणता हिंदू धर्म में वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ महीने के पूर्णिमा के दिन हुआ था और इसी दिन गुरु पूर्णिमा और व्यास जी की जयंती के रूप मनाया जाता है इन्हें सभी गुरुओं के भी गुरु उपाधि प्राप्त है

महर्षि वेदव्यास के जीवन प्रेरक विचार

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"महाभारत के रचियता और अपनी अतुल्य बुद्धिमत्तता के विचारो को भी वेदव्यास ने प्रकट किया था वेदव्यास ने मनुष्य जीवन से जुड़े अपने ऐसे विचार रखें जो यदि व्यक्ति अपने जीवन में उन पर अम्ल करें तो उसे हर रास्ते पर सफलता मिलती है" - वेदव्यास

"दुख को दूर करने की एक ही अमोघ औषधि है- मन से दुखों की चिंता न करना " - वेदव्यास

" जिस मनुष्य की बुद्धि दुर्भावना से युक्त है और जिसने अपनी इंद्रियों को वश में नहीं रखा है, वह धर्म और अर्थ की बातों को सुनने की इच्छा होने पर भी उन्हें पूरी तरह समझ नहीं सकता " - वेदव्यास

" सत्पुरुष दूसरों के उपकारों को ही याद रखते हैं, उनके द्वारा किए हुए बैर को नहीं " - वेदव्यास

" निरोगी रहना, ऋणी न होना, अच्छे लोगों से मेल रखना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना और निर्भय होकर रहना- ये मनुष्य के सुख हैं " - वेदव्यास

" शूरवीरता, विद्या, बल, दक्षता, और धैर्य, ये पांच मनुष्य के स्वाभाविक मित्र हैं। यह हर बुद्धिमान और महापुरुष में देखने को मिलते हैं " - वेदव्यास

" सत्य ही धर्म, तप और योग है। सत्य ही सनातन ब्रह्मा है, सत्य को ही परम यज्ञ कहा गया है तथा सब कुछ सत्य पर ही टिका है " - वेदव्यास

" किसी का सहारा लिए बिना कोई ऊंचे नहीं चढ़ सकता, अत: सबको किसी प्रधान आश्रय का सहारा लेना चाहिए" - वेदव्यास

" मन का दुख मिट जाने पर शरीर का दुख भी मिट जाता है "  - वेदव्यास