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कर्ण की अनोखी कहानी , द्रौपदी पांडवो से नहीं करना चाहती थी शादी

By Sumer / About :-2 years ago

Veer and Mahadani Karna

दुर्वासा ऋषि के वरदान से कुंती ने सूर्य का आह्वान करके कौमार्य में ही कर्ण को जन्म दिया था। लोक-लाज भय से कुंती ने उसे नदी में बहा दिया था। बाद में गंगा किनारे हस्तिनापुर के सारथी अधिरथ को कर्ण मिला और वह उस बालक को अपने घर ले गया। कर्ण को अधिरथ की पत्नी राधा ने पाला इसलिए कर्ण को राधेय भी कहते हैं। 

कुंती-सूर्य पुत्र कर्ण को महाभारत का एक महत्वपूर्ण योद्धा माना जाता है। कर्ण के धर्मपिता तो पांडु थे, लेकिन पालक पिता अधिरथ और पालक माता राधा थी। कर्ण दानवीर के रूप में प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपने कवच-कुण्डल दान में दिए और अंतिम समय में सोने का दांत भी दे दिया था। 

सूर्य पुत्र कर्ण एक दानवीर और दयावान योद्धा था 

महाभारत में वैसे तो कई पात्र हैं। लेकिन कर्ण की कहानी कुछ अलग है। कुंती पुत्र कर्ण के बारे में जितना लिखा और पढ़ा गया है, उससे यही जाहिर होता है कि वह महादानी और दुर्योधन का प्रिय मित्र था।

द्रोपदी कर्ण से शादी करना चाहती थीं , हुआ यूं कि द्रोपदी कर्ण का चित्र देखकर उन्हें पसंद करने लगी थीं। जब स्वयंवर का दिन आया तो द्रोपदी की दृष्टि सभी राजाओं और पांडवों में से कर्ण को ढूंढ़ रही थी।

किन्तु द्रोपदी को जब ये मालूम हुआ की कर्ण एक ' सूतपुत्र ' हैं और यदि उसका विवाह कर्ण से हो गया तो वह  सम्पूर्ण जीवन एक ' दासी ' के रूप में पहचानी जाएगी और इस कारण उसने कर्ण की बजाय पांडवों से विवाह किया था ।

और इस तरह कर्ण की द्रोपदी से विवाह का जो स्वपन  था वह पूरा न हो सका । इसलिए बाद में उन्होंने दो विवाह किए। कर्ण का पहला विवाह वरुशाली के साथ हुआ था , वरुशाली दुर्योधन के सारथी सत्यासेन की सुशील और सुंदर कन्या थी। कर्ण की मरने  के बाद वरुशाली उसकी चिता पर बैठ गयी और सती हो गई थी।

कर्ण की दूसरी पत्नी थी सुप्रिया जो कि दुर्योधन की पत्नी भानुमती की सहेली थी। सुप्रिया के दो पुत्र थे वृशासेन और सुशेन, जिन्होंने आगे कर्म का वंश चलाया। दुर्लभ बात यह भी है कि तमिल साहित्य में कर्ण की पत्नी का नाम पोन्नारुवि बताया गया है।


कर्ण की अनोखी कहानी , द्रौपदी पांडवो से नहीं करना चाहती थी शादी