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नॉर्मल से ज्‍यादा होती है सीजेरियन डिलीवरी जाने वजह इसकी...

By pooja / About :-8 years ago

What is Cesarean delivery

गर्भधारण करने के दौरान जो सवाल सबसे ज्‍यादा एक गर्भवती के दिमाग में घूमता है वो होता है कि डिलीवरी नॉर्मल होगी या सीजेरियन। पूरे नौ महीने तक गर्भवती महिला के घर में इसी पर चर्चा होती है। आजकल नॉर्मल से ज्‍यादा सी-सेक्‍शन डिलीवरी की संख्‍या में इजाफा होता जा रहा है। बहुत ही कम महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी से स्‍वस्‍थ बच्‍चें को जन्‍म देती है, मेट्रो सिटीज में तो ज्‍यादातर सीजेरियन डिलीवरी ही की जाती है। धीरे धीरे कई कारणों के वजह से नॉर्मल की जगह महिलाएं सी-सेक्‍शन का सहारा लेनी लगी है।

वजह

आजकल महिलाएं प्रेगनेंट होते ही फीजिकल वर्क पर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं देती है कामकाजी महिलाएं भी ज्‍यादात्‍तर लैपटॉप में बैठी रहती हैं| सीजेरियन डिलीवरी की एक खास वजह age भी है। इन सभी के कारण उनकी बॉडी में फ्लैक्सिबिलिटी भी कम हो जाती है। महिलाएं के कम फिजिकल वर्क के वजह से भी बेबी का अग्र भाग ठीक रुप से डवलप नहीं हो पाता है|

कारण

कुछ महिलाएं लेबर पेन सहन नहीं कर सकती है इसलिए वो सी-सेक्‍शन का सहारा लेती है। जबकि कुछ लोगों को एक खास डेट पर ही बच्चा चाहिए होता है।

क्या कहते हैं नेशनल फैमिली हेल्थ के सर्वे-

नेशनल फैमिली हेल्थ (NFHS-4) सर्वे के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में जहां 10% सीजेरियन डिलीवरी होती है, वहीं प्राइवेट हॉस्पिटल्स में 31.1% डिलीवरी सीजेरियन होती है। ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों में तीन गुना ज्यादा सीजेरियन डिलीवरी होती है। आपके मन में सवाल उठेगा कि आखिर इसके पीछे क्या कारण हैं? तो आपको बता दें, NFHS-4 के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं में निजीकरण के बढ़ते दबदबे और अस्पतालों की ज्यादा मुनाफा कमाने की नीति भी इसके पीछे एक बड़ी वजह बनकर सामने आई है।

सर्वे में खुलासा आंकड़ों में पाया गया

जिन राज्यों में साक्षरता दर ज्यादा है वहां पर सीजेरियन के जरिए ज्यादा बच्चे पैदा किए जा रहे हैं। डब्‍लूएचओ ने भी चौंकाया विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, 2010 तक देश में सिर्फ 8.5 फीसदी सीजेरियन डिलीवरी हुई थीं। इसमें सरकारी और निजी अस्पताल शामिल हैं।

गर्भाधारण से जुड़ी जानकारियां

विशेषज्ञों की मानें तो उम्र के साथ महिलाओं में गर्भाधारण को लेकर परेशानियां भी बढ़ती जाती हैं। जहां 19 से 25 साल तक की महिलाओं में प्रतिमाह 50 प्रतिशत तक प्रेगनेंसी के चांसेज रहते हैं, वहीं 30 साल की उम्र के बाद इसके चांसेज 30 प्रतिशत रह जाते हैं और गर्भपात की दर बढ़ती जाती है और 35 साल की महिलाओं के गर्भवती होने के चांसेज 20 साल की महिला के मुकाबले आधी हो जाती है। तकरीबन 40 प्रतिशत जोड़ों को स्पर्म से जुड़ी समस्याओं की वजह से गर्भाधारण की समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। ऐसे जोड़ों को इस बात का खास खयाल रखना चाहिए कि संभोग के दौरान शुक्राणु और अंडाणु के मिलने के लिए 24 घंटे तक का समय ही रखें|

अंधविश्वास

तमाम बातों के बावजूद यह भी एक मिथक है कि बड़ी उम्र में महिलाओं को सिजेरियन होना लाजिमी है। पर सिजेरियन बेबी का एक अन्य मुख्य कारण पंडितों पर किए जाने वाला अंधविश्वास भी है। तेज दिमाग और बेहतर भविष्य वाले बच्चों की चाहत में पंडितों के दिशा निर्देश से उनके जन्म को लेकर सही समय तय कर लिया जाता है।

मोटापा व अन्य बीमारियां

नॉर्मल डिलीवरी न होने की एक अन्य वजह गर्भवती महिला के मोटापे का शिकार होना भी है। गर्भावस्था के दौरान या उससे पहले युवती का अधिक मोटा होना भी एक समस्या है|

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