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आखिर क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला और कब क्या हुआ

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देश के सबसे बड़े "2G" घोटाले में "CBI" की "विशेष अदालत" ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। "जज" ने सिर्फ "एक लाइन" में अपना फैसला सुनाया। जज "ओ. पी. सैनी" ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में नाकाम रहा।
इस मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि की बेटी और राज्यसभा सांसद कनिमोझी को भी बरी कर दिया है।
क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला?
2010 में आई एक CAG रिपोर्ट में 2008 में बांटे गए "स्पेक्ट्रम" पर सवाल उठाए गए थे। इसमें बताया गया था, "कि "स्पेक्ट्रम" की नीलामी के बजाए "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर इसे बांटा गया था।' इससे सरकार को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। इसमें इस बात का जिक्र था कि नीलामी के आधार पर लाइसेंस बांटे जाते तो यह रकम सरकार के खजाने में जाती। दिसंबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में विशेष अदालत बनाने पर विचार करने को कहा था।
2011 में पहली बार स्पेक्ट्रम घोटाला सामने आने के बाद अदालत ने इसमें 17 आरोपियों को शुरुआती दोषी मानकर 6 महीने की सजा सुनाई थी।
जानिए 2 जी घोटाले में कब क्या हुआ
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16 मई 2007: डीएमके नेता ए राजा को दूसरी बार दूरसंचार मंत्री नियुक्त किया गया।
25 अक्तूबर 2007: केंद्र सरकार ने मोबाइल सेवाओं के लिए टू-जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की संभावनाओं को खारिज किया।
सितम्बर-अक्तूबर 2008: दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिए गए।
15 नवंबर 2008: केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में खामियां पाईं और दूरसंचार मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की।
21 अक्तूबर 2009: सीबीआई ने टू-जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच के लिए मामला दर्ज किया।
22 अक्तूबर 2009: मामले के सिलसिले में सीबीआई ने दूरसंचार विभाग के कार्यालयों पर छापेमारी की।
17 अक्तूबर 2010: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने दूसरी पीढ़ी के मोबाइल फोन का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया।
नवंबर 2010: दूरसंचार मंत्री ए राजा को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने संसद की कार्यवाही ठप की।
14 नवम्बर 2010: राजा ने इस्तीफा दिया।
15 नवम्बर 2010: मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को दूरसंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
नवम्बर 2010: "2 जी स्पेक्ट्रम" आवंटन की जांच के लिए JPC गठित करने की मांग को लेकर "संसद" में गतिरोध जारी रहा।
13 दिसम्बर 2010: दूरसंचार विभाग ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज वी पाटिल समिति को स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों एवं नीतियों को देखने के लिए अधिसूचित किया. इसे दूरसंचार मंत्री को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया।
24 और 25 दिसम्बर 2010: राजा से सीबीआई ने पूछताछ की।
31 जनवरी 2011: राजा से सीबीआई ने तीसरी बार फिर पूछताछ की। एक सदस्यीय पाटिल समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
2 फरवरी 2011: टू-जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
21 दिसबंर 2017: पटियाला हाऊस कोर्ट स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सभी आरोपीयों को बरी किया।
आखिर क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला और कब क्या हुआ




