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इन दो ग्रहों पर होती है हीरे की बारिश बहुत अजीब है ये ग्रह

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प्रेशर बहुत ज्यादा होता
एक ओर, जहां इंडिया के कई इलाके बारिश और बाढ़ से जूझ रहे हैं और दुनिया के कई इलाकों में तूफान के कारण भारी बारिश ने कहर मचाया हुआ है, वहीं सुनकर आपको शायद यकीन नहीं हो, मगर ये सच है। दरअसल, हमारे सोलर सिस्टम में शामिल दो प्लैनेट्स नेप्ट्यून और यूरेनस में हीरों की बारिश होती है। यह दावा करते हुए साइंटिस्ट्स ने कहा है कि यूरेनस और नेप्च्यून में पानी नहीं, बहुमूल्य रत्न हीरे की बारिश होती है और ऐसा हाल ही में पिछले कुछ दिनों में वहां हो रहा है। साइंटिस्ट्स का कहना है कि इन दोनों प्लैनट्स के अंदरूनी भागों में एट्मॉस्फियरिक प्रेशर बहुत ज्यादा होता है, जिसकी वजह से हाइड्रोजन और कार्बन के बॉन्ड टूट जाते हैं।
ग्रहों पर हीरे की बारिश
इसी वजह से इन प्लैनेट्स हीरों की रैनी होती है। पिछले 1000 सालों से ये हीरे धीरे-धीरे इन प्लैनेट्स की बर्फीली सतह पर जमा हो रहे हैं। पृथ्वी से कहीं अलग हालात नेप्चयून पृथ्वी से 17 गुणा और यूरेनस 15 गुना बड़ा है। इन दोनों ग्रहों की संरचना पृथ्वी से काफी अलग है। इन ग्रहों पर हाइड्रोजन और हीलियम जैसी गैसों का दबदबा है। साइंटिस्ट्स का मानना है कि इन प्लैनेट्स के भीतरी भाग यानी सतह से लगभग 6200 मील अंदर अत्यधिक दबाव होता है। यही वजह है कि इन ग्रहों पर हीरे की बारिश होती है। हाल ही में एक प्रयोग ने इन ग्रहों पर हीरे की बारिश होने की पुष्टि भी की है।2 के पैटर्न में ज्यादा अंतर् नहीं है|
हीरों का आकार काफी बड़ा
दरअसल वॉटर वेपर्स का कंडेन्सेशन होता है और इसी तरह आसमान में बादल बारिश और ओले की शक्ल लेकर धरती पर गिरते हैं। नेप्ट्यून और यूरेनस के एट्मॉस्फियर में मिथेन है और उसे प्रेशराइज्ड करने पर हाइड्रोजन अलग हो जाता है और कार्बन डायमंड यानी कि हीरे की शक्ल ले लेता है। रिसर्च टीम का कहना है कि भले ही वह लैब में केवल कुछ नैनोमीटर के हीरे ही फॉर्म करने में सफल रहे, मगर नेप्ट्यून और यूरेनस पर वास्तविकता में हालात आंकलन से परे हो सकता है। नेप्च्यून और यूरेनस में इन हीरों का आकार काफी बड़ा हो सकता है जो कि सामान्य ओले के आकार से लेकर पत्थर के आकार तक हो सकता है।
इन दो ग्रहों पर होती है हीरे की बारिश बहुत अजीब है ये ग्रह




