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सरोजिनी नायडू | All about Sarojini Naidu in Hindi

By N.j / About :-8 years ago

सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी, 1879 को हैदराबाद के एक छोटे से गाँव में हुआ था. सरोजिनी नायडू के बारे में जानने वाली एक विशेष बात यह ही कि सरोजिनी नायडू बचपन से ही हर चीज़ में प्रथम रहीं थी - चाहे वो पढ़ाई हो या खेल. इनकी यह प्रथम रहने वाली आदत की झलक स्वतंत्रता संग्राम में भी दिखती है. सरोजिनी नायडू भारतीय कांग्रेस पार्टी (Indian National Congress) की प्रथम महिला अध्यक्ष बनी, और तो और भारतीय राज्य की पहली गवर्नर भी बनीं. 

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सरोजिनी नायडू अपने पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय और अपनी माता श्री बारदा सुंदरी देवी की पहली बेटी थीं. इनका परिवार(family) हमेशा से ही पढने लिखने में आगे था, लिहाज़ा सरोजिनी नायडू को बचपन से ही उच्च शिक्षा (Higher education) दी गई. फलस्वरूप, सरोजिनी नायडू एक छोटी सी उम्र में ही कई भाषाओँ में महारत हासिल कर चुकी थीं. 

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सरोजिनी नायडू ने अपनी उच्च शिक्षा Madras University में ली और बाद में वे आगे पढने इंग्लैंड चलीं गई. England में ही इनकी भेंट मुथ्लाया गोविन्द्गारा नायडू से हुई, और यह भेंट आगे चल कर सात फेरों के रिश्ते में बदल गई. इस दम्पति के कुल पांच बचे थे जिनका नाम ने  - जयसूर्या, लील्मानी, नीलावर, पद्मया और रंधीर. 

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ज्ञात हो कि अबतक सरोजिनी नायडू का स्वतंत्रता संग्राम(Freedom Struggle) में न तो कोई योगदान था और न ही इसमें जुड़ने की कोई जिज्ञासा. परंतु बंगाल के बंटवारे और उसके बाद हुए नरसंहार के बाद सरोजिनी नायडू अपने आप को रोक नहीं पाइ और इन्होने इंडियन नेशनल कांग्रेस की सदस्यता ले ली. उस समय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे बड़े नेता मुहम्मद अली जिन्नाह थे. सरोजिनी नाडू जिन्नाह के व्यतित्व के काफ़ी प्रभावित थीं और उन्होंने सन 1916 में जिन्नाह की बायोग्राफी लिखी जिसका शीर्षक था - 'जिन्नाह: हिन्दू मुस्लिम भाईचारे का दूत'. 

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via:2.bp.blogspot

ज्ञात हो इस समय तक महात्मा गाँधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम(Indian freedom struggle) से नहीं जुड़े थे और न ही जवाहरलाल नेहरु. गाँधी जी के आने के बाद, सरोजिनी नायडू को सन 1925 में इंडियन नेशनल कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया जाता है और साथ ही जवाहरलाल नेहरु को इसका सचीव. सरोजिनी नायडू बतौर कांग्रेस अध्यक्ष उस पद पर आठ साल रहीं, और बाद में 'अन्ग्रेज़ो भारत छोड़ो' आन्दोलन में इनको और स्वतंत्रता संग्राम के बाकी बड़े नेताओं को जेल भेज दिया गया. 

इनके जेल से वापिस आने तक अंग्रेजों( British) की पकड़ भारत में कमज़ोर हो चुकी थी जिसके चलते अंग्रेजों(British) तो अंततः भारत छोड़ कर जाना पड़ा. आज़ादी के बाद पहली (Asian Relational कांफ्रेंस) में भारत की तरफ से अगुआई(Lead) करने के लिए सरोजिनी नायडू को भेजा गया. बाद में इनको भारत का पहला गवर्नर भी बना दिया गया.

सरोजिनी नायडू निश्चित ही एक महान स्वतंत्रता(Freedom) सेनानी थीं मगर इसके साथ साथ वे उतनी ही महान कवियत्री(Poet) और लेखिका भी थीं. इनकी अनेक कविताओं के पाठ आज भी स्कूली छात्रों को पढाया जाता है. 

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2 मार्च, सन 1949 को इनकी तबियत अचानक ख़राब हुई. तब वे दिल्ली में ही थीं. डॉक्टर को बुलाया गया और ने इनका चेक-अप (Checkup स्वास्थ्य की जांच ) करने के बाद इनको सोने की सलाह दी. इन्होने Doctor को  बोला की मुझे नींद(Sleep) नहीं आ रही है. Doctor ने इनको नींद की दवाई दी जिसे लेने के बाद सरोजिनी नायडू ने कहा - 'हाँ अब तो सो जाउंगी'. इसके बाद सरोजिनी नायडू कभी नहीं उठीं. उनकी मृत्यु को राष्ट्रिय शोक (National mourning) घोषित किया गया तथा सभी सरकारी दफ्तर, काम-काज एक दिन के लिए रोक दिया गया.

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