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पवित्र मक्का मदीना का इतिहास | All About Makka Madina History In Hindi

By N.j / About :-2 years ago

पवित्र मक्का मदीना का इतिहास | Makka Madina History 

पवित्र मुस्लिम तीर्थस्थल मक्का -

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सऊदी अरब की धरती पर इस्लाम का जन्म हुआ, इसलिए मक्का और मदीना जैसे पवित्र holy) मुस्लिम तीर्थस्थल उस देश की थाती हैं। मक्का में पवित्र काबा है, जिसकी परिक्रमा कर हर मुसलमान धन्य हो जाता है। यही वह जगह  है जहां हज यात्रा पूर्ण होती है। इस्लामी तारीख के अनुसार 10 जिलहज को दुनिया के कोने-कोने से मुसलमान इस पवित्र स्थान पर पहुंचते हैं, जिसे "ईदुल अजहा' कहा जाता है।

गैर मुस्लिमों को नहीं मिलती इज़ाज़त -

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मक्का  पहुंचने के लिए मुख्य नगर जेद्दाह है। यह नगर एक बंदरगाह भी है और 
International air मार्ग का मुख्य केन्द्र भी। जेद्दाह से मक्का जाने वाले मार्ग पर ये निर्देश लिखे होते हैं कि यहां मुसलमानों के अतिरिक्त किसी भी और धरम का व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। अधिकांश सूचनाएं अरबी भाषा में लिखी होती हैं, जिसे अन्य देशों के लोग बहुत कम जानते हैं।

काफिरों' का प्रवेश पर रोक -

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अब तक इन सुचना सन्देश में यह भी लिखा जाता था कि "काफिरों(Infidels)' का प्रवेश प्रतिबंधित(Restricted) है। लेकिन इस बार "काफिर' शब्द के स्थान पर "नान मुस्लिम' यानी गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है, लिखा था। "काफिर' शब्द का शाब्दिक(Verbal) अर्थ होता है "इनकार करना' अथवा "छिपाना'। वास्तव में "काफिर' शब्द का उपयोग नास्तिक(Atheist) के लिए किया जाता है। दुर्भाग्य से "काफिर' शब्द को हिन्दुओं से जोड़ दिया, जो एकदम (At once) गलत है। ईसाई, यहूदी, पारसी और बौद्ध भी उस वर्जित(restricted) क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकते।

मक्का में महादेव शिवलिंग  का रहस्य -

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मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का के बारे में कहते हैं कि वह मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इसके बारे में प्रसिद्ध इतिहासकार स्व0 P.N ने अपनी पुस्तक ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास’ में बहुत विस्तार(Expand) से लिखा है।

कहा जाता है की वेंकतेश पण्डित ग्रन्थ 'रामावतारचरित' के युद्धकांड(War chords) प्रकरण में उपलब्ध एक बहुत अद्भुत(wonderful) प्रसंग 'मक्केश्वर लिंग' से संबंधित हैं, जो आम तौर पर अन्य रामायणों में नहीं मिलता है। वह प्रसंग(Context) काफी दिलचस्प है। शिव रावण द्वारा याचना() करने पर उसे युद्ध में विजयी होने के लिए एक लिंग (मक्केश्वर महादेव) दे देते हैं और कहते हैं कि जा, यह तेरी रक्षा(Defence) करेगा, मगर ले जा
त समय इसे मार्ग में कहीं पर भी धरती(
Earth) पर नहीं रखना।

रावण आकाशमार्ग(Sky way) से लंका की ओर जाता है पर रास्ते में कुछ ऐसे परिस्थति बनते हैं की रावण को सिवलिंग धरती पर रखना पड़ता है। वह दुबारा शिवलिंग को उठाने(Lifting) की कोशिश करता है पर ज्यादा प्रयास करते है  पर भी लिंग(भगवान शिव की प्रथिमा) उस स्थान से हिलता नहीं। वेंकतेश पण्डित के अनुसर यह स्थान वर्तमान में सऊदी अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है। Saudi Arab के पास ही यमन नामक राज्य भी है जहाँ श्री कृष्ण ने कालयवन नामक राक्षस(Demon) का विनाश किया था।

 मुहम्मद पैगम्बर  पूर्व शिवलिंग को 'लात' मारना-

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कहा जाता है की Arab में मुहम्मद पैगम्बर से पूर्व शिवलिंग को 'लात' कहा जाता था। mkka के कावा में जिस काले पत्थर की उपासना(Worship) की जाती रही है, भविष्य पुराण में उसका उल्लेख(mention) मक्केश्वर के रूप में हुआ है। इस्लाम के प्रसार(Spreading) से पहले इजराइल और अन्य यहूदियों द्वारा इसकी पूजा किए जाने के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। लेकिन ये सब कितना सच है - यह विवादित है। अभी तक तो यह सिर्फ एक अफगाह ही लगती है।

काबा का पवित्र झरना -

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एक और धारना(assumption) है बहुत प्रसिध् है की काबा(इस्लाम की सबसे पवित्र मस्जिद) से जुड़ी है “पवित्र गंगा”। जैसा कि सभी जानते हैं भारतीय संस्कृति में शिव के साथ गंगा और चन्द्रमा के रिश्ते को कभी अलग नहीं किया जा सकता। जहाँ भी भोले होंगे,वहां सुध गंगा की अवधारणा(concept) निश्चित ही मौजूद होती है। काबा के पास भी एक पवित्र झरना पाया जाता है, इसका पानी भी पवित्र माना जाता है। Islamic काल से पहले भी इसे पवित्र (Abe Zamzam) ही माना जाता था।

आज भी मुस्लिम श्रद्धालु हज के दौरान इस आबे ज़मज़म को अपने साथ बोतल में भरकर ले जाते हैं। ऐसा क्यों है कि कुम्भ में शामिल होने वाले हिन्दुओं द्वारा भारत में लोग गंगाजल को सुध मानकर अपने घर लाते, तथा इसी प्रकार हज की इस परम्परा(Tradition) में इतनी समानता है? इसके पीछे(behind) क्या कारण है। मेरी मानें तो ये महज एक सुन्दर इत्तफ़ाक(Coincidence) है जिसे हम तोड-मरोड रहे हैं।

गुरु नानक मक्का प्रवेश -

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सिख धर्म के गुरु नानक देव(प्रथम ) ने जीवन के हर समय हिन्दू और मुस्लिम धर्म की एकता का लोगो को सन्देश दिया दिया और यातायात के बेहद कम साधनों वाले उस दौर में भी पूरे INDIA ही नहीं आधुनिक इराक के बगदाद और Saudi अरबिया के मक्का मदीना तक की यात्रा की।

 ग़ैर मुस्लिमों को प्रवेश की अनुमति क्यों नहीं -

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जैसे सभी नागरिकों को कन्टोन्मेंट एरिया (Containment सैनिक छावनी) में जाने की आज्ञा नहीं होती वैसे ही हर देश में कुछ न कुछ ऐेसे क्षेत्र अवश्य होते हैं जहाँ सामान्य जनता को जाने की इजाज़त नहीं होती। सैनिक छावनी में केवल वही लोग जा सकते हैं जो सेना अथवा प्रतिरक्षा विभाग से जुदे हों। इसी प्रकार इस्लाम के दो नगर मक्का और मदीना किसी सैनिक छावनी(Camp) के समान महत्वपूर्ण और पवित्र हैं, इन शहरों में जाने का उन्हें ही अधिकार है जो इस्लाम(मुस्लिम धर्म) में विश्वास रखते हो।

मक्का एव मदीना में जाने के लिए वीसा (Visa) कैसे प्राप्त करे -

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जब कोई नागरिक किसी दूसरे देश की यात्रा करता है तो उसे सबसे पहले उस देश में प्रवेश करने का अनुमति(permission) पत्र प्राप्त करना पड़ता है। प्रत्येक देश के अपने कायदे कानून होते हैं जो उनकी ज़रूरत और व्यवस्था(Arrangement) के अनुसार होते हैं तथा उन्हीं के अनुसार वीसा जारी किया जाता है। जब तक उस देश के कानून की सभी शर्तों को पूरा न कर दिया जाए उस देश के राजनयिक(Diplomat) कर्मचारी वीसा जारी नहीं करते।

Visa जारी करने के मामले में अमरीका अत्यंत कठोर देश है, विशेष रूप से तीसरी दुनिया के नागरिकों को वीसा(Visa) देने के बारे में, अमरीकी आवर्जन कानून की कड़ी शर्तें हैं जिन्हें अमरीका(US) जाने के इच्छुक(Desirous) को पूरा करना होता है।

मक्का और मदीना का Visa अथवा वहाँ प्रवेश करने की बुनियादी(Basic) शर्त यह है कि मुख से ‘‘ला इलाहा इल्लल्लाहु, मुहम्मदुर्रसूलल्लाहि’’ (कोई ईश्वर नहीं, सिवाय अल्लाह के (और) मुहम्मद (सल्लॉ) अल्लाह के सच्चे सन्देष्टा हैं), कहकर मन से अल्लाह के एकमात्र होने का इकष्रार किया जाए और हज़रत मुहम्मद (सल्लॉ) को अल्लाह का सच्चा रसूल स्वीकार किया जाए।

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