तेनालीराम की पांच छोटी कहानियाँ | 5 Short Stories of Tenaliram in Hindi

तेनालीराम की पांच छोटी कहानियाँ | 5 Short Stories of Tenaliram in Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-2 months ago
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तेनालीराम की पांच बेहतरीन छोटी कहानियाँ | All About Five Short Stories of Tenaliram in Hindi

तेनलीरामा कृष्णा जिसे सम्पूर्ण संसार उनकी वाकपटुता, कुशाग्र बुद्धिमत्ता, हास्य-बोध और चातुर्यता से भरी वाचलता और हाज़िर जवाबी के कारण जानता है, विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेव राय (1509 - 1529) के दरबार के अष्ट दिग्गजों में से एक थे, तेलुगु के इस महान कवि की युक्तियों से भरपूर लोककथाएँ आज बच्चों के बीच में काफी लोकप्रिय है|

तेनालीराम कृष्णा की विजयनगर के राजपुरोहित तथाचार्य रामा से उतनी बनती न थी अर्थात दोनों के बीच एक वैमनस्य का भाव था लिहाजा धणीचार्य और मणिचार्य नाम के अपने शिष्यों के साथ मिलकर राजपुरोहित तेनाली को रोज नयी-नयी मुसीबतों में डाल देता था और तेनाली अपने कुशाग्र बुद्धि के उपयोग से बाहर निकल आते थे| तेनालीराम से जुड़े किस्से कहानियां बच्चे हो या बड़ें सभी को गुदगुदाने का प्रायोगिक अनुभव प्रस्तुत करते हैं, तेनालीराम की कुछ प्रसिद्द कहानियां:

1. तेनालीराम और सोने के आम | तेनालीराम की पांच छोटी कहानियाँ

 

एक बार की बात है की राजा कृष्णदेव राय की माँ ने उनसे आम खाने की इच्छा प्रकट की किन्तु आम खाये बिना ही उनकी माँ की मृत्यु हो गई, जब राज्य के ब्राह्मणो को ये बात पता चली तो उन्होंने राजा से कहा हे राजन! जिस किसी की अंतिम इच्छा अधूरी रहती है उसे पुनर्जन्म नहीं मिलता है और उसे कई योनियों में भटकना पड़ता है तो राजा ने ब्राह्मणो से पूछा की आप ब्राह्मणगण ही बतायें क्या उपाय है इस समस्या का? ब्राह्मणो ने उत्तर देते हुए कहा की हे राजन! आप ब्राह्मणो को भोजन दें और उसके उपरांत सोने का आम दान करें, राजा ने वैसा ही कर दिया| 

जब तेनालीराम को ये बात पता चली तो अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण वो समझ गए कि भ्रह्माणो ने राजा को मूर्ख बनाया है लिहाजा उन्हें एक तरकीब सूझी उन्होंने ब्राह्मणो से कहा कि मेरी मां कि भी मृत्यु हो गई है और उनकी भी एक इच्छा अधूरी रह गई है लिहाजा ब्राह्मणगण मेरे घर आ कर भोज लें और दान ग्रहण करें, ब्राहण नियत समय पर कुछ मिलने कि आस में तेनाली के घर पहुंचे, भोज के बात तेनाली लोहे के गर्म सलाखें लेकर खड़े हुए और बोले मेरी माँ को फोड़े हुए थे और उनको ठीक करने के लिए उनकी इच्छा थी कि फोड़ों को गर्म सलाखों से दागा जाये, ऐसा सुनते ही ब्राह्मण अचंभित हो गए तो तेनाली ने कहा कि जब आखिरी इच्छा पूर्ति के लिए आप सोने के आम लें सकते हैं तो ये भी ग्रहण करें| तब ब्राह्मणो को समझ आया कि उन्होंने क्या गलती कि थी|


2. तेनालीराम और स्वर्ग की खोज | तेनालीराम की पांच छोटी कहानियाँ

महाराजा कृष्णदेव राय को बचपन से सुनी कथाओं से ये सर्वविदित था कि पुरे ब्रह्माण्ड में सबसे सुन्दर जगह अगर कोई है तो वो स्वर्ग है लिहाजा एक बार उनके मन में स्वर्ग देखने कि इच्छा जागी, उन्होंने अपने दरबार में अपनी इच्छा जताते हुए कहा क्या किसी को स्वर्ग मालूम है, क्या मुझे कोई उसे दिखा सकता है दरबार में उपस्थित सभी मंत्रीगण अपना सर खुजाने लगे, परन्तु तभी तेनाली आगे आये और आकर राजा से कहा अगर आप मुझे दस हज़ार स्वर्ण मुद्राएँ और दो महीने का वक़्त दे दें तो मैं ये कर सकता हूँ, राजा ने कहा ठीक है दे दिया और साथ ही शर्त पूरी न करने पर  तेनाली को फांसी पर चढ़ा दो का आदेश भी दे दिया|

तेनाली के शत्रुओं में प्रसन्नता कि लहर दौड़ गई| तेनाली ने दरबार जाना बंद कर दिया, एक दिन राजा ने समय अवधि पूरी होने पर तेनाली को बुलाया और कहा - मुझे स्वर्ग लें चलो, फिर तेनाली ने कहा - हाँ !अवश्य, वह उन्हें लेकर एक अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण, चिड़ियों के चचहाहट से लबरेज स्थान पर ले  गया, राजा ऐसे अप्रतिम सुंदरता को देख स्तब्ध रह गए, तभी राजा के सहायकों ने स्वर्ग देखने कि बात याद दिलाई, राजा ने पूछा तुम मुझे स्वर्ग लें जाने वाले थे तो तेनाली ने कहा - हे राजन! जब स्वर्ग में पाए जाने वाले सारे सौंदर्य का पान आप ने यहाँ आकर आत्मसात कर लिया तो स्वर्ग कि इच्छा क्यों, वो तो एक कल्पना है, राजा समझ गया कि तेनाली क्या कहना चाह रहे हैं , फिर तेनाली ने राजा को दस हज़ार स्वर्ण मुद्राओं और दो महीने लें जाने वाली अवधि के बारे में बताया कि मैंने उन पैसों से उत्कृष्ट बीज और पौधे मंगाकर इस उद्यान को स्वर्ग सा सुन्दर बना दिया| राजा खुश हुए उन्होंने तेनाली को ढेरों इनाम दिए|


3. तेनालीराम और रसगुल्ले का पेड़

एक बार राजा कृष्णदेव के दरबार में अरब देश से एक शेख व्यापारी आया, उसके समक्ष साम्राज्य के रसोईयें ने खाने में रसगुल्ला परोसा, व्यापारी ने रसोईयें से कहा मुझे इसकी जड़ देखना है और अब रसोईयें सहित सभी लोग परेशान हो गए, उन्होंने तेनलीरामा को बुलवाया और सारी बात तेनलीरामा से कह सुनाई| तेनाली ने अपनी बुद्धि घुमाई और रसोईयें से कटोरी, छुरी और चम्मच लाने को कहा, अगले दिन शेख से सामने कटोरी को कपडे से ढक कर प्रस्तुत किया और जब शेख ने कपड़ा हटाया तो उसके नीचे कटोरी में गन्ने के पेड़ कि जड़ मिली तो तेनाली ने बताया - रसगुल्ले कि यही जड़ है क्योंकि प्रत्येक मिठाई शक्कर से बनती है, शक्कर गन्ने से निकलती है लिहाजा गन्ने कि जड़ रसगुल्ले कि जड़ हुई| सब लोग तेनाली के तर्क से सहमत हुए और ठहाके लगाकर हसने लगे|


4. तेनालीराम और कुबड़ा धोबी 

एक बार कि बात है कि तेनाली के राज्य में एक दुष्ट व्यक्ति आया, वो लोगों को धतूरा खिलाकर लूटता था| धतूरे को खाने से कुछ लोग पागल हो जाते, कुछ लोग मर जाते ये बात सुनकर तेनाली को बड़ा गुस्सा आया, पर उस दुष्ट के खिलाफ कोई सबूत न था, वो वैसे ही अकड़ कर राजमार्ग पर चलता| एक दिन एक पागल भी सड़क पर घूमता दिखाई दिया, जो उस दुष्ट का ताजा शिकार था, तेनालीराम उस पागल को उस दुष्ट आदमी के पास लें गया और पागल आदमी ने पागलपन में उसका सर पटक-पटक कर उसे मार डाला| दुष्ट के रिश्तेदारों ने उस दुष्ट के मृत्यु का जिम्मेदार तेनालीराम को ठहराया, तेनाली को राजा ने हाथिओं  के पाँव तले कुचलने का आदेश दे दिया और राज्य के दो सिपाहियों ने उसे जंगल में लें जाकर गाड़ दिया| तेनाली का पूरा शरीर जमीं के अंदर था केवल सर बाहर था, तभी वहां से एक कुबड़ा धोबी जा रहा था, उसने तेनाली से पूछा ! भाई ये क्या कर रहे हो? तेनाली ने कहा अरे भाई मैं भी तुम्हारी तरह एक कुबड़ा वाला इंसान हूँ और साधु महात्मा के कहने पर इस पवित्र स्थान पर समाधिस्त हूँ ताकि मेरा कूबड़ ठीक हो जाये, अगर तुम्हे भी करना है तो मेरी जगह आ जाओ, धोबी ने वैसा ही किया और जब राजा के सैनिक वापस आये तो उसे देखकर पूछा अरे मुर्ख! तुम कौन हो? यहाँ एक सजायाफ्ता मुजरिम गड़ा था तो धोबी ने कहा नहीं भाई! में कोई मुजरिम नहीं मैं तो अपन कूबड़ ठीक करने के लिए यहाँ आया था| मुझे निकाल दो, अब दरोगा और सिपाहियों के समझ में ये नहीं आ रहा था कि वो क्या करें, राजा से क्या कहेंगे? तभी एक वृद्ध आदमी वहां से गुजरा उसने बोला कह देना धरती निगल गई और कुछ मत बोलना बाद में पता चला वो वृद्ध कोई और नहीं तेनाली ही था| उधर राजा को तेनाली के निर्दोष होने का पता चला, तभी दरोगा और सिपाही वहां आये और कहे महाराज अपराधी को धरती निगल गई| महाराज उछल पड़े! वाह वाह यानि तेनाली राम अपने बुद्धि से बच निकला| महाराज कि जय हो! तभी सिपाहियों के साथ आये बूढ़े ने बोला और अपना वेश उतार दिया| राजा ने तेनाली को गले लगा लिया|

5. तेनालीराम और बाग़ की हवा दरबार में

ये उन दिनों कि बात है जब विजयनगर में भीषण गर्मी पड़ती थी| महाराज के दरबार में काफी उमस थी, सभी दरबारियों के शरीर पसीनों से नहाये थे और उनके साथ स्वयं महाराज भी पसीने से लथपथ थे, तभी महाराज ने कहा सुबह सवेरे बाग़ कि हवा कितनी शीतल और सुगन्धित होती है, उन्होंने राज दरबारियों से पूछा - कि क्या कोई इस हवा को दरबार में ला सकता है किसी ने उत्तर न दिया, दूसरे दिन पुनः दरबार लगा राजा ने फिर वही प्रश्न पूछा - किसी ने उत्तर न दिया पर तेनालीराम ने कहा हाँ महाराज मैं कर सकता हूँ, राजा ने कहा हाँ अवश्य! इशारा मिलने कि देर भर थी कि तेनाली ने बाहर खड़े व्यक्तियों को अंदर बुलाया जिनके हाथों में इत्र में डूबे पंखे थे, वो पंखे झलने लगे, सुगन्धित हवा के साथ शीतल हवा कि बयार ने राजा को प्रसन्न कर दिया| इस तरह तेनाली ने बाग़ कि हवा को दरबार में ला दिया| राजा खुश हुए और तेनाली को इनाम देने कि घोषणा कर दी| 
 

तेनालीराम की पांच छोटी कहानियाँ | 5 Short Stories of Tenaliram in Hindi