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हिंदी साहित्य जनक लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र | Bhartendu Harishchandra Biography In Hindi

हिंदी साहित्य जनक लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र | Bhartendu Harishchandra Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-1 month ago
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दोस्तों भारत के गौरवमयी इतिहास के पन्नो में कई महान कवियों का जन्म हुआ है  जिन्होंने अपने लेखन से देश की साहित्य जगत में अलग पहचान कायम की उन्ही में से एक है जिन्हे आज आधुनिक हिंदी साहित्य और हिंदी साहित्य जनक माना जाता है भारतेंदु हरिशचंद्र को आज के आधुनिक भारत का सबसे विशिष्ट लेखको में से एक माना जाता है अपने  विशिष्ट लेखन से वे कही नाटकों के लेखक के रूप में काम कर चुके है वो और कार्यो के लिए सामाजिक सुझाव के लिए उन्होंने पब्लिकेशन, ट्रांसलेशन और मिडिया के कई उपकारों को उपयोग में लेते थे

भारतेंदु हरिशचंद्र के लेखन में उन्होंने अपने उपनाम "रसा" से उन्होंने कई लेख लिखे हरिशचंद्र अपने लेखो के उद्यम से लोगो की पीड़ा , देश से जुडी कविताएं , शोषण, और साथ में देश के माध्यम वर्ग के लोगो के जीवन की दुविधाएं और देश के विकास में बाधा बनने वाले तथ्यों का लेखन किया जाता था दोस्तों भारतेंदु हरिशचंद्र एक हिन्दू परम्परावादी थे इन्होंने वैष्णव भक्ति के माध्यम से हिन्दू धर्म का विवेचन भी किया था 

भारतेंदु हरिशचंद्र का जन्म व परीवार | Bharatendu Harishchandra Birth and Family

Bhartendu Harishchandra Biography In HindiSource i0.wp.com

आधुनिक साहित्य के जनक भारतेंदु हरिशचंद्र का जन्म वाराणसी में 9 सितंबर 1850 को एक कवि के घर में हुआ था इनके पिता गोपाल चंद्र था भारतेंदु हरिशचंद्र अपना उपनाम गिरदास दास लिखते थे भारतेंदु हरिशचंद्र के जीवन में कई दुःखद घटनाएं घटी जब वो अपनी युवावस्था में आये तब उनके सिर से माता पिता का साया उठ गया लेकिन दोस्तों भारतेंदु पर दुनिया छोड़ से पहले उनके माता पिता प्रभाव छोड़ गए थे इसे बारे में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने बताया बताया की जब बचपन में भारतेंदु अपने माता पिता के साथ साल 1865 ओड़िसा में पूरी के जगन्नाथ मंदिर में गए थे उस समय भारतेंदु महज 15 साल के थे उस दौर में बंगाल पुनर्जागरण के कारण इसका प्रभाव भारतेंदु पड़ा और वही से उनके मन में  सामाजिक, इतिहासिक एव पौराणिक नाटको और उपन्यासों की रचना करने के बारे में मन बनाया और इसी के चलते उन्होंने साल  1868 पहली बार एक बंगाली नाटक विद्यासुंदर का हिंदी में व्याख्यान किया था 

हिंदी साहित्य को और प्रबल बनाने और उसे और विकसित करने के लिए हरिशचंद्र ने अपना पूरा जीवन लगा दिया उनेक लेखन  देशभक्ति और एक आधुनिक कवी के रूप में एक पहचान दिलाने के लिए साल 1880 में कशी के हिंदी के बड़े विद्वानों ने एक सामाजिक चर्चा बुलाई और  हरिशचंद्र को "भारतेंदु" की उपाधि देकर सम्मानित किया साथ ही उन्हें हिंदी साहित्य के प्रमुख आलोचक राम विलास शर्मा ने हरिशचंद्र आधुनिक जनक का प्रबल लेखक और साहित्य का जनक बताया

आधुनिक साहित्य के जनक  हरिशचंद्र ने  लेखन के साथ पत्रकारिता ड्रामा और कवि के उपलब्धियो के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण योगदान दिए है हरिशचंद्र ने कई पत्रिका में बदलाव किया कवी वचन सुधा में उन्होंने साल 1868 में बदलाव किया था उन्होंने देश में स्वेदशी के पथ पर भी काम किया साल 1874 में उन्होंने अपने द्वारा लिखे गए लेखों के माध्यम से देश के लोगो को स्वदेशी वस्तुओ के प्रयोग में लेने के लिए प्रेरित किया लेखक हरिशचंद्र  का संबध वाराणसी के चौधरी से भी था वो इस परिवार के एक सदस्य थे वाराणसी का ये परिवार अग्रवाल समझ से संबध थे इनके जो पूर्वज वे बंगाल के लैंडलॉर्ड के रूप शासित थे इन्हें एक पुत्री भी थी जिन्होंने अपने अग्रवाल समाज का पूर्ण इतिहास का व्याख्यान किया था 

साल 1983 में इन्हें हिंदी भाषा को विकसित करने और उसे एक नया आयाम देने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ़ इनफार्मेशन एंड ब्राडकास्टिंग ने भारतेंदु हरिशचंद्र अवार्ड दिया था 

भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित प्रमुख नाटक | Major Play by Bhartendu Harishchandra

Bhartendu Harishchandra Biography In HindiSource i.ytimg.com

भारतेंदु हरिशचंद्र लेखन के साथ एक कलाकार के रूप में सिनेमा में कदम रखा और इसकी शुरुआत के बाद वो जल्द ही एक डायरेक्टर और अच्छे कलाकार भी बन गए भारतेंदु हरिशचंद्र का थिएटर पर काम करने का मुख्य उद्देश्य जनता की राय जानना था 

  • वैदिकी हिमसा हित्न्सा ना भवती, 1873
  • जब्बलपुर
  • भारत दुर्दशा, 1875
  • पौराणिक सत्य हरिशचंद्र (सच्चा हरिशचंद्र), 1876
  • नील देवी, 1881
  • अंधेर नगरी, 1881

दोस्तों भारतेंदु हरिशचंद्र के आधुनिक हिंदी साहित्य में ये प्रमुख नाटक है इन नाटकों का देश की भाषाओ में अनुवाद किया जा चूका है 

भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित प्रमुख कविताएं | Major Poems written by Bharatendu Harishchandra

Bhartendu Harishchandra Biography In Hindi

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  • अंधेर नगरी, 1881 
  • चन्द्रावली, 1876 और कृष्णा चरित्र
  • फूलो का गुच्छा
  • भगत सर्वज्ञ
  • प्रेम मलिका (1872)
  • प्रेम माधुरी (1875)
  • प्रेम तरंग (1877), प्रेम प्रलाप, प्रेम फुहल्वारी (1883) और प्रेम सरोवर
  • होली
  • मधु मुकुल
  • राग संग्रह
  • वर्षा विनोद
  • विनय प्रेम पचासा

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